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बिहार टेंडर घोटाला: IAS धर्मेंद्र कुमार से ED की 6 घंटे पूछताछ, विदेश यात्रा पर सवाल

Kavita2
29 Oct 2026 9:55 AM IST
बिहार टेंडर घोटाला: IAS धर्मेंद्र कुमार से ED की 6 घंटे पूछताछ, विदेश यात्रा पर सवाल
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पटना। बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच तेज कर दी है। बुधवार, 28 अक्टूबर को ईडी ने 2013 बैच के आईएएस अधिकारी और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार से करीब छह घंटे तक पूछताछ की। पटना स्थित ईडी कार्यालय में सुबह 11 बजे शुरू हुई पूछताछ शाम पांच बजे तक चली। इस दौरान अधिकारियों ने ठेकेदार रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशुश्री के साथ धर्मेंद्र कुमार के कथित निजी और वित्तीय संबंधों को लेकर कई सवाल पूछे। जांच एजेंसी उन आरोपों की पड़ताल कर रही है, जिनके मुताबिक रिशुश्री ने आईएएस अधिकारी और उनके परिवार की विदेश यात्रा का खर्च उठाया था। सूत्रों के अनुसार धर्मेंद्र कुमार को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। हालांकि, अब तक उनके खिलाफ आरोप सिद्ध होने की जानकारी सामने नहीं आई है।

सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक चली पूछताछ

बिहार में सरकारी ठेकों के आवंटन में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में धर्मेंद्र कुमार बुधवार को ईडी के समक्ष उपस्थित हुए।

जांच एजेंसी ने उनसे रिशुश्री के साथ संपर्क, परिचय और कथित आर्थिक लेनदेन की जानकारी मांगी।

ईडी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दोनों के बीच संबंध कब और कैसे बने तथा क्या इन संबंधों का सरकारी ठेकों के आवंटन पर कोई प्रभाव पड़ा।

धर्मेंद्र कुमार पूर्व में बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रह चुके हैं।

इसके अतिरिक्त वह नगर विकास एवं आवास विभाग में अपर सचिव और बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी बुडको के एमडी भी रहे हैं।

वर्तमान में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष होने के साथ उनके पास शिक्षा विभाग के विशेष सचिव का अतिरिक्त प्रभार है।

विदेश यात्रा के लिए 10 लाख रुपये के डॉलर देने का आरोप

धर्मेंद्र कुमार से पूछताछ में विदेश यात्रा से जुड़े कथित आर्थिक लाभ का मुद्दा प्रमुख रहा।

सूत्रों के मुताबिक, ठेकेदार रिशुश्री ने धर्मेंद्र कुमार और उनके परिवार की विदेश यात्रा के लिए करीब 10 लाख रुपये मूल्य के अमेरिकी डॉलर उपलब्ध कराए थे।

ईडी इस कथित लेनदेन के स्रोत और उद्देश्य की जांच कर रही है।

जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विदेश यात्रा का खर्च किसने उठाया, भुगतान किस माध्यम से हुआ और क्या इसके बदले किसी सरकारी कार्य में अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

इन आरोपों का अंतिम सत्यापन अभी होना बाकी है। केवल किसी अधिकारी से पूछताछ किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि उसके खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप साबित हो गया है।

मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन के टेंडरों की भी जांच

धर्मेंद्र कुमार के बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड में प्रबंध निदेशक रहने के दौरान स्वीकृत निविदाओं को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

ईडी ने संबंधित अवधि में जारी टेंडरों, उनकी स्वीकृति प्रक्रिया और भुगतान से जुड़े सवाल पूछे हैं।

जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि सरकारी ठेकों के आवंटन में निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या किसी ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए प्रक्रिया प्रभावित की गई थी।

जांच एजेंसी संबंधित दस्तावेजों और कथित वित्तीय लेनदेन का मिलान कर रही है।

यह भी जांच की जा रही है कि ठेकेदार से कथित संपर्क के दौरान किन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई और क्या उन निर्णयों के पीछे किसी प्रकार का दबाव या अनुचित प्रभाव था।

रिशुश्री के मोबाइल से मिले व्हाट्सऐप चैट और दस्तावेज

टेंडर घोटाले की जांच में रिशुश्री के मोबाइल फोन से कथित तौर पर मिले डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, जांच एजेंसी को मोबाइल से कई आईएएस अधिकारियों और उनके करीबी सहयोगियों के साथ बातचीत तथा वित्तीय लेनदेन से संबंधित चैट मिले थे।

इसके अलावा विभिन्न सरकारी विभागों की निविदाओं से जुड़े कुछ गोपनीय दस्तावेज भी मिलने की जानकारी सामने आई है।

जांच एजेंसी को संदेह है कि ठेकेदार ने सरकारी अधिकारियों के संपर्क का इस्तेमाल करके टेंडरों से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल की।

आरोप है कि कुछ मामलों में निविदा की शर्तों को प्रभावित कर मनपसंद कंपनियों को फायदा पहुंचाने का प्रयास किया गया।

हालांकि, इन आरोपों में अलग-अलग अधिकारियों की भूमिका अभी जांच के अधीन है।

छह वरिष्ठ IAS अधिकारियों को ईडी का समन

इस मामले में ईडी ने धर्मेंद्र कुमार के अलावा कई अन्य वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया है।

इनमें आनंद किशोर, संतोष कुमार मल्ल, योगेश कुमार सागर, अभिलाषा कुमारी शर्मा और सुनील यादव के नाम शामिल हैं।

सोमवार को अभिलाषा कुमारी शर्मा और मंगलवार को सुनील यादव से पूछताछ की गई थी।

रिपोर्टों के अनुसार, योगेश कुमार सागर ने जांच एजेंसी से उपस्थित होने के लिए अगले सप्ताह तक का समय मांगा है।

वहीं संतोष कुमार मल्ल को 29 अक्टूबर और आनंद किशोर को 30 अक्टूबर को पूछताछ के लिए बुलाए जाने की जानकारी सामने आई है।

ईडी इन सभी अधिकारियों से अलग-अलग पूछताछ करके उपलब्ध डिजिटल दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का सत्यापन कर रही है।

पटना हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद जांच में आई तेजी

इस कथित घोटाले की जांच में तेजी आने के पीछे पटना हाईकोर्ट की हालिया टिप्पणी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

15 अक्टूबर को रिशुश्री की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच को लेकर सवाल उठाए थे।

अदालत ने टिप्पणी की थी कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर रिशुश्री इस मामले में एक छोटा मोहरा प्रतीत होता है और इसके पीछे अन्य प्रभावशाली लोगों की भूमिका की भी पड़ताल आवश्यक है।

इसके बाद ईडी ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को समन जारी कर पूछताछ की प्रक्रिया तेज की।

अदालत की टिप्पणी जांच के दौरान सामने आए मुद्दों पर आधारित थी, इसे किसी अधिकारी के दोषी होने का अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

265 करोड़ की संपत्तियों और कथित कमीशन की पड़ताल

जांच एजेंसी सरकारी ठेकों के कथित घोटाले में बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है।

रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 265.73 करोड़ रुपये की संपत्तियां जांच के दायरे में हैं।

इसके अलावा कुछ अधिकारियों और उनके परिवारों की विदेश यात्राओं पर किए गए कथित खर्च की भी पड़ताल की जा रही है।

ईडी इस बात की जांच कर रही है कि ठेकों के आवंटन से जुड़े निर्णयों और कथित आर्थिक लाभ के बीच कोई संबंध था या नहीं।

सीतामढ़ी में नगर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिलाने के लिए 25 लाख रुपये के कथित भुगतान का मामला भी जांच के दौरान सामने आया है।

धर्मेंद्र कुमार को दोबारा बुला सकती है ईडी

धर्मेंद्र कुमार से बुधवार को करीब छह घंटे चली पूछताछ के बाद जांच एजेंसी उपलब्ध जवाबों और दस्तावेजों की समीक्षा कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर उन्हें दोबारा समन जारी किया जा सकता है।

ईडी अन्य अधिकारियों के बयानों, मोबाइल चैट, वित्तीय रिकॉर्ड और निविदाओं से संबंधित दस्तावेजों का भी मिलान कर रही है।

फिलहाल बिहार के इस कथित टेंडर घोटाले में जांच का दायरा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच गया है। आने वाले दिनों में पूछताछ और दस्तावेजों के सत्यापन से यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी ठेकों में कथित अनियमितताओं और वित्तीय लेनदेन में किसकी क्या भूमिका रही।

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