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Bihar : धान की खेती बनी चर्चा का विषय, किसान कृष्णानंद सिंह ने 20 एकड़ में की खेती

Kavita2
2 July 2026 2:21 PM IST
Bihar : धान की खेती बनी चर्चा का विषय, किसान कृष्णानंद सिंह ने 20 एकड़ में की खेती
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Bihar बिहार: प्रखंड के विउरी गांव में गर्मा धान की खेती इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। गांव निवासी किसान कृष्णानंद सिंह ने अपने 20 एकड़ खेत में गर्मा धान की खेती कर क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक मिसाल पेश की है। जिस समय अधिकतर खेत खाली रहते हैं, उसी समय उन्होंने खेती कर कृषि के क्षेत्र में नया उदाहरण प्रस्तुत किया है।

किसान कृष्णानंद सिंह द्वारा की गई यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब अधिकांश किसान रबी फसलों की कटाई के बाद खेतों को खाली छोड़ देते हैं। लेकिन उन्होंने इस खाली समय का सदुपयोग करते हुए गर्मा धान की खेती शुरू की, जिससे न केवल भूमि का बेहतर उपयोग हुआ बल्कि उत्पादन की संभावनाएं भी बढ़ गईं।

कृष्णानंद सिंह ने बताया कि गर्मा धान की खेती पारंपरिक खरीफ धान से अलग होती है और इसे विशेष समय पर तैयार किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस खेती की शुरुआत गेहूं की फसल कटने के बाद की जाती है। इसके लिए फरवरी माह के अंतिम सप्ताह से मार्च माह की शुरुआत के बीच धान का बिचड़ा तैयार किया जाता है, जिसके बाद खेतों में रोपाई की जाती है।

उनके अनुसार, गर्मा धान की खेती में उचित सिंचाई और देखभाल की आवश्यकता होती है, लेकिन यदि सही तरीके से इसे अपनाया जाए तो यह किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। उन्होंने बताया कि इस खेती में खेतों का बेहतर उपयोग होता है और अतिरिक्त आय का साधन भी बनता है।

गांव के अन्य किसानों का कहना है कि कृष्णानंद सिंह की यह पहल प्रेरणादायक है। आमतौर पर किसान रबी फसल के बाद खेतों को खाली छोड़ देते हैं, लेकिन उन्होंने दिखाया है कि सही योजना और मेहनत से इस समय का भी उपयोग कर बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है।

स्थानीय कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मा धान की खेती उन क्षेत्रों में अधिक सफल हो सकती है जहां सिंचाई की उचित व्यवस्था हो। यह खेती किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां कृषि पूरी तरह से वर्षा पर निर्भर नहीं है।

कृष्णानंद सिंह ने बताया कि उन्होंने इस बार 20 एकड़ भूमि में गर्मा धान की खेती की है और उन्हें उम्मीद है कि इस बार अच्छी उपज प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि यदि मौसम और सिंचाई की स्थिति अनुकूल रही तो यह खेती लाभकारी साबित होगी।

इस पहल के बाद विउरी गांव में अन्य किसान भी गर्मा धान की खेती को लेकर रुचि दिखा रहे हैं। कई किसानों ने उनसे जानकारी ली है और आने वाले समय में इस तकनीक को अपनाने की योजना बना रहे हैं।

कृषि विभाग के जानकारों का मानना है कि इस तरह की वैकल्पिक खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर सकती है। किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ नई फसलों और समय आधारित खेती को अपनाना चाहिए, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके।

कुल मिलाकर, विउरी गांव के किसान कृष्णानंद सिंह की यह पहल कृषि क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा करती है। उनकी मेहनत और नवाचार अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है और यह दिखा रही है कि सही योजना के साथ खाली समय को भी उत्पादन में बदला जा सकता है।

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