बिहार

Bihar : नगर परिषद की आय बढ़ी लेकिन अतिक्रमण जस का तस

Kavita2
3 July 2026 2:19 PM IST
Bihar : नगर परिषद की आय बढ़ी लेकिन अतिक्रमण जस का तस
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Bihar बिहार: शहर में लगातार बढ़ती सड़क जाम और अतिक्रमण की समस्या ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सदर बाजार, 6 नंबर गेट, नयागांव और मुंगरौरा जैसे प्रमुख इलाकों में फुटपाथ और सड़क किनारे लगने वाले अस्थायी बाजारों के कारण यातायात व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन की ओर से इस समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं किया जा सका है।

शहर के व्यस्त इलाकों में रोजाना सुबह और शाम के समय भारी जाम की स्थिति बन जाती है। फुटपाथों पर दुकानदारों द्वारा किए गए अतिक्रमण और सड़क किनारे लगाए गए अस्थायी बाजारों के कारण पैदल चलने वालों के लिए भी रास्ता मुश्किल हो गया है। कई बार आपातकालीन सेवाओं के वाहन भी जाम में फंस जाते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर परिषद हर वर्ष इन बाजारों से अच्छी-खासी आय प्राप्त कर रही है, लेकिन इसके बावजूद अतिक्रमण पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर राजस्व वसूली के बावजूद शहर की व्यवस्था क्यों नहीं सुधर रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर परिषद ने वर्ष 2023-24 के बजट में बाजार बंदोबस्ती से लगभग 16 लाख रुपये की आय का अनुमान लगाया था। इसके बाद वर्ष 2024-25 में यह अनुमान घटकर 10.70 लाख रुपये रहा। वहीं वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 16.50 लाख रुपये की आय का लक्ष्य रखा गया है, जिसे टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से वसूला जाता है।

नगर परिषद द्वारा की जा रही इस बंदोबस्ती प्रणाली के तहत अस्थायी बाजारों और स्थानों को ठेके पर दिया जाता है, जिससे परिषद को राजस्व प्राप्त होता है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इस व्यवस्था के चलते अतिक्रमण को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिल रहा है, क्योंकि ठेकेदार और दुकानदार निर्धारित सीमाओं का पालन नहीं करते।

सदर बाजार और 6 नंबर गेट जैसे क्षेत्रों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। यहां सुबह से लेकर रात तक सड़क किनारे दुकानें लगी रहती हैं, जिससे वाहनों की आवाजाही बाधित होती है। नयागांव और मुंगरौरा क्षेत्रों में भी यही स्थिति देखी जा रही है, जहां फुटपाथ पूरी तरह से बाजार में तब्दील हो चुके हैं।

नागरिकों का कहना है कि नगर परिषद द्वारा समय-समय पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है, लेकिन कुछ ही दिनों बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। इससे यह साफ है कि कार्रवाई केवल अस्थायी साबित हो रही है।

स्थानीय व्यापारियों का एक वर्ग यह भी मानता है कि अस्थायी बाजारों से छोटे दुकानदारों को रोजगार मिलता है, लेकिन इसके लिए व्यवस्थित योजना की आवश्यकता है ताकि सड़क यातायात प्रभावित न हो। उनका कहना है कि यदि उचित स्थान पर वैकल्पिक बाजार विकसित किए जाएं, तो अतिक्रमण की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नगर परिषद को केवल राजस्व संग्रह पर ध्यान देने के बजाय शहर के ट्रैफिक प्रबंधन और शहरी नियोजन पर भी ध्यान देना चाहिए। बिना ठोस योजना के अतिक्रमण नियंत्रण संभव नहीं है।

शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि फुटपाथ और सड़क किनारे लगने वाले बाजारों के लिए अलग से निर्धारित स्थान बनाए जाएं और सख्ती से नियम लागू किए जाएं। साथ ही अतिक्रमण करने वालों पर नियमित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

फिलहाल स्थिति यह है कि राजस्व तो लगातार बढ़ रहा है, लेकिन शहर की यातायात व्यवस्था और नागरिक सुविधाएं उसी समस्या से जूझ रही हैं। इससे नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं और स्थायी समाधान की मांग तेज हो गई है।

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