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Bihar : खाजेकलां घाट बदहाल, करोड़ों की व्यवस्था रखरखाव के अभाव में जर्जर हालत में

Kavita2
2 July 2026 10:34 AM IST
Bihar : खाजेकलां घाट बदहाल, करोड़ों की व्यवस्था रखरखाव के अभाव में जर्जर हालत में
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Bihar बिहार: पटना सिटी स्थित नगर निगम के अजीमाबाद अंचल अंतर्गत आने वाला खाजेकलां घाट, जो कभी गंगा किनारे एक व्यवस्थित और आकर्षक स्थल के रूप में विकसित किया गया था, आज रखरखाव के अभाव में अपनी मूल पहचान खोता नजर आ रहा है। इंडियन ऑयल फाउंडेशन द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से यहां विकसित की गई जनसुविधाएं अब बदहाली की स्थिति में पहुंच चुकी हैं, जिससे स्थानीय लोगों और आगंतुकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इस घाट पर पटना सिटी और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले लोग अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर पहुंचते हैं। ऐसे शोकाकुल परिजनों के लिए यहां पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव स्थिति को और कठिन बना रहा है। दुख की घड़ी में आए लोग मूलभूत सुविधाओं के बिना परेशान होकर इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।

घाट पर बने पेयजल व्यवस्था की हालत बेहद खराब है। पानी पीने के लिए बनाए गए दो बड़े बेसिनों में लगे दर्जनभर से अधिक नल टूट चुके हैं। कई नलों से पानी की आपूर्ति नियमित नहीं हो रही है, जबकि बेसिनों में गंदगी जमा हो गई है। यह स्थिति साफ-सफाई और देखरेख की कमी को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

इसके अलावा, घाट पर बाहर की ओर बनाए गए एक अन्य बड़े बेसिन में लगे आधा दर्जन नलों से भी नियमित रूप से पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिससे यहां आने वाले लोगों को पीने के पानी के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

एक सामाजिक संस्था द्वारा जनहित में लगाया गया प्याऊ भी अब पूरी तरह से बंद हो चुका है। यह प्याऊ, जो कभी लोगों की प्यास बुझाने का साधन था, आज अनुपयोगी अवस्था में पड़ा हुआ है। इसके पास लगे शिलापट पर दर्जनभर नाम अंकित हैं, लेकिन देखरेख के अभाव में यह व्यवस्था भी निष्क्रिय हो गई है।

गंगा घाट पर घूमने और समय बिताने आने वाले स्थानीय लोग तथा पर्यटक भी सुविधाओं के अभाव से परेशान हैं। स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाएं न होने के कारण उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग पानी की तलाश में इधर-उधर भटकते देखे जाते हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से विकसित यह घाट आज प्रशासनिक लापरवाही और नियमित रखरखाव की कमी के कारण अपनी उपयोगिता खो रहा है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते ध्यान दिया जाए तो यह स्थान फिर से एक बेहतर सार्वजनिक सुविधा स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।

नगर निगम की ओर से समय-समय पर विकास कार्यों की घोषणा तो की जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर रखरखाव की कमी के कारण योजनाओं का लाभ जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है। खाजेकलां घाट की वर्तमान स्थिति इस बात का उदाहरण है कि केवल निर्माण ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि निरंतर देखरेख भी उतनी ही जरूरी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक स्थलों पर बनाई गई सुविधाओं का नियमित रखरखाव न होने से सरकारी धन का सही उपयोग नहीं हो पाता और जनता को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। इस घाट की स्थिति भी इसी समस्या को उजागर करती है।

फिलहाल स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि खाजेकलां घाट पर तुरंत सुधार कार्य शुरू किए जाएं, ताकि यहां आने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाएं मिल सकें और यह स्थान फिर से एक उपयोगी और व्यवस्थित सार्वजनिक स्थल बन सके।

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