
Bihar बिहार: जिले के काको प्रखंड अंतर्गत नारायणपुर गांव के प्रगतिशील किसान सुरेंद्र सिंह ने पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाकर बेहतर उत्पादन और अधिक आमदनी हासिल की है। उनकी यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।
सुरेंद्र सिंह के पास लगभग 20 एकड़ कृषि भूमि है, जिसका उपयोग वे संतुलित तरीके से विभिन्न प्रकार की खेती के लिए करते हैं। उन्होंने अपनी खेती को दो हिस्सों में बांट रखा है, जिससे उत्पादन में विविधता के साथ-साथ आर्थिक स्थिरता भी बनी रहती है।
लगभग 10 एकड़ भूमि पर वे धान, सरसों और राई जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते हैं। इन फसलों से उन्हें नियमित आय प्राप्त होती है और स्थानीय बाजार में इनकी अच्छी मांग भी बनी रहती है। पारंपरिक खेती के साथ उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों को जोड़कर उत्पादन क्षमता में सुधार किया है।
शेष 10 एकड़ भूमि पर वे विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती करते हैं। इसमें मौसमी और नकदी फसलें शामिल हैं, जिनसे उन्हें अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिलता है। सब्जी उत्पादन से उनकी आय में वृद्धि हुई है और बाजार में सीधी बिक्री के कारण उन्हें बेहतर मूल्य भी प्राप्त हो रहा है।
सुरेंद्र सिंह ने खेती में वैज्ञानिक तकनीकों जैसे बेहतर बीज चयन, संतुलित उर्वरक उपयोग, समय पर सिंचाई और आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग शुरू किया है। इन तरीकों से उनकी फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार हुआ है।
इसके अलावा, वे समय-समय पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह भी लेते हैं और नई तकनीकों को अपनाने में पीछे नहीं रहते। उनका मानना है कि बदलते समय के साथ खेती को भी आधुनिक बनाना जरूरी है, तभी किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि संभव है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि सुरेंद्र सिंह की खेती का मॉडल अन्य किसानों के लिए भी एक अच्छा उदाहरण है। उनकी सफलता यह दिखाती है कि पारंपरिक और आधुनिक खेती के संतुलन से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ऐसे प्रगतिशील किसान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। यदि अधिक किसान इस तरह की तकनीकों को अपनाएं, तो कृषि उत्पादन और आय दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
कुल मिलाकर, सुरेंद्र सिंह की यह पहल यह साबित करती है कि आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाकर सीमित संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन और अधिक आय हासिल की जा सकती है, जिससे किसानों का जीवन स्तर सुधारने में मदद मिलती है।





