
Bihar बिहार: निर्दलीय सांसद और पूर्णिया से लोकसभा सदस्य पप्पू यादव ने गुरुवार को राजनीति में महिलाओं को लेकर दिए गए अपने हालिया विवादित बयान पर माफी मांग ली है। यह मामला उस समय शुरू हुआ जब सोमवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि “90 प्रतिशत महिलाएं किसी नेता के कमरे में जाए बिना राजनीति में आगे नहीं बढ़ सकतीं।” उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में भारी विवाद खड़ा हो गया।
पप्पू यादव के इस बयान की तीखी आलोचना विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और महिला संगठनों द्वारा की गई। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने इसे महिलाओं का अपमान बताते हुए कड़ी निंदा की। वहीं बिहार राज्य महिला आयोग ने भी इस बयान को आपत्तिजनक करार दिया और कार्रवाई की मांग की। आयोग ने कहा कि इस तरह के बयान समाज में महिलाओं की छवि को गलत तरीके से पेश करते हैं और इससे राजनीतिक तथा सामाजिक स्तर पर गलत संदेश जाता है।
बयान के सामने आने के बाद राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और रैलियां भी देखने को मिलीं। विभिन्न संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने पप्पू यादव से सार्वजनिक माफी की मांग की और उनके बयान को महिला विरोधी मानसिकता का उदाहरण बताया। लगातार बढ़ते विवाद के बीच यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील बन गया।
बढ़ते दबाव और विरोध के बीच गुरुवार को पप्पू यादव ने मीडिया के सामने आकर अपने बयान पर सफाई दी और माफी मांगी। उन्होंने कहा, “अगर मेरे बयान से राजनीति में महिलाओं को दुख पहुंचा है तो मैं उनसे माफी मांगता हूं।” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी माफी “बहनों और बेटियों के लिए है, नेताओं के लिए नहीं।” उनके इस बयान के बाद भी राजनीतिक बहस पूरी तरह शांत नहीं हुई और इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर राजनीति में भाषा और बयानों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के बाद यह मुद्दा तेजी से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया। कई लोगों ने इस बयान को अस्वीकार्य बताया, जबकि कुछ ने इसे गलत संदर्भ में पेश किया गया बयान भी कहा।
फिलहाल राजनीतिक माहौल में इस मुद्दे को लेकर चर्चा जारी है और विपक्षी दलों के साथ-साथ महिला संगठनों द्वारा भी आगे की कार्रवाई की मांग की जा रही है। यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर संवेदनशील बन चुका है।





