बिहार

बिहार सरकार का डिजिटल कदम, ई कैबिनेट में होगा AI का इस्तेमाल

Ratna Netam
4 Nov 2026 9:57 PM IST
बिहार सरकार का डिजिटल कदम, ई कैबिनेट में होगा AI का इस्तेमाल
x
पटना। बिहार में सरकारी कामकाज को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। बुधवार, 4 नवंबर को मुख्यमंत्री ने पटना स्थित लोक सेवक आवास के संकल्प सभागार में ई-कैबिनेट प्रणाली लागू करने की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में मंत्रिपरिषद के कामकाज को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं में आधुनिक तकनीक के अधिकतम इस्तेमाल पर जोर देते हुए ई-कैबिनेट व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए।
ई-कैबिनेट से बदलेगा सरकारी कामकाज का तरीका
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बैठक में कहा कि ई-कैबिनेट प्रणाली बिहार में सुशासन और डिजिटल प्रशासन को नई गति देने वाली महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद कैबिनेट से संबंधित फाइलों, प्रस्तावों और अन्य दस्तावेजों का काम डिजिटल माध्यम से किया जा सकेगा।इससे सरकारी फाइलों के निपटारे में लगने वाला समय कम होने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों को सरल, तेज और जवाबदेह बनाना है। तकनीक के उपयोग से निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।बैठक में कैबिनेट सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने ई-कैबिनेट प्रणाली की तैयारियों और इसकी कार्यप्रणाली पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
कैबिनेट की फाइलें होंगी डिजिटल
ई-कैबिनेट व्यवस्था के तहत मंत्रिपरिषद की बैठकों में इस्तेमाल होने वाले एजेंडे, प्रस्ताव और आवश्यक दस्तावेज डिजिटल रूप में उपलब्ध कराए जा सकेंगे।वर्तमान में कई सरकारी प्रक्रियाओं में कागजी दस्तावेज तैयार करने, उन्हें संबंधित विभागों तक पहुंचाने और आवश्यक स्वीकृतियां लेने में समय लगता है। डिजिटल व्यवस्था से इन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।प्रस्तावित प्रणाली में दस्तावेजों के सुरक्षित डिजिटल प्रबंधन, विभागों के बीच सूचना के आदान-प्रदान और निर्णयों के रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होगा।इसका एक महत्वपूर्ण लाभ यह भी हो सकता है कि अधिकारियों को फाइलों की स्थिति और संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी समय पर उपलब्ध हो सके।हालांकि, ई-कैबिनेट प्रणाली कब से पूरी तरह लागू होगी, इसकी आधिकारिक तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। फिलहाल सरकार इसकी तैयारियों की समीक्षा कर रही है।
AI तकनीक से प्रशासनिक प्रक्रियाएं होंगी आसान
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कामकाज को सरल और प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए।AI तकनीक की सहायता से दस्तावेजों को व्यवस्थित करने, बड़ी मात्रा में उपलब्ध सूचनाओं का विश्लेषण करने और संबंधित अधिकारियों तक आवश्यक जानकारी तेजी से पहुंचाने जैसी संभावनाओं पर काम किया जा सकता है।इसके अलावा भविष्य में डिजिटल दस्तावेजों की खोज, प्रस्तावों के सारांश तैयार करने और प्रक्रियागत देरी की पहचान करने में भी तकनीक उपयोगी हो सकती है।हालांकि, ई-कैबिनेट में AI के कौन-कौन से विशेष फीचर शामिल किए जाएंगे, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि नई तकनीक का इस्तेमाल केवल व्यवस्था को आधुनिक दिखाने के लिए नहीं, बल्कि सरकारी कामकाज की वास्तविक गुणवत्ता सुधारने के लिए होना चाहिए।
पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर
राज्य सरकार का मानना है कि ई-कैबिनेट व्यवस्था से प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने में सहायता मिलेगी।डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से सरकारी निर्णयों से जुड़ी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित रखना आसान हो सकता है। संबंधित विभागों के बीच समन्वय बेहतर होने से योजनाओं और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भी तेजी आने की संभावना है।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके प्रशासन को अधिक कुशल और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने विश्वास जताया कि ई-कैबिनेट प्रणाली बिहार में डिजिटल प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगी।
कागज की बचत से पर्यावरण को भी फायदा
ई-कैबिनेट प्रणाली लागू होने के बाद सरकारी बैठकों में कागज के इस्तेमाल को कम किया जा सकेगा। मंत्रिपरिषद से संबंधित बड़ी संख्या में दस्तावेजों को प्रिंट करने और उनकी प्रतियां तैयार करने की जरूरत घट सकती है।इससे कागज और अन्य संसाधनों की बचत के साथ दस्तावेजों के रखरखाव पर होने वाले खर्च को भी कम करने में सहायता मिलेगीमुख्यमंत्री ने इस पहल को पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया।डिजिटल दस्तावेजों का उपयोग बढ़ने से सरकारी कार्यालयों में रिकॉर्ड को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने के नए अवसर मिलेंगे।हालांकि, ऐसी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए डेटा सुरक्षा, अधिकारियों के प्रशिक्षण और तकनीकी सुविधाओं की उपलब्धता पर भी ध्यान देना आवश्यक होगा।
बिहार AI नीति 2026 को भी मिली मंजूरी
ई-कैबिनेट पहल को बिहार सरकार की व्यापक डिजिटल विकास रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इससे पहले 22 अक्टूबर को बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नीति 2026 की समीक्षा की थी। उस बैठक में राज्य में AI आधारित उद्योगों, स्टार्टअप और डिजिटल उद्यमों के विकास पर जोर दिया गया था।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तकनीकी क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, युवाओं को नए कौशल से जोड़ने और AI के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के निर्देश दिए थे।इसके बाद 28 अक्टूबर को बिहार मंत्रिमंडल ने AI नीति 2026 को मंजूरी दी। इस नीति का उद्देश्य राज्य में नवाचार, डिजिटल उद्यमिता और आधुनिक तकनीक आधारित अवसरों को बढ़ावा देना है।
डिजिटल प्रशासन की दिशा में बड़ा कदम
बिहार सरकार की ई-कैबिनेट पहल आने वाले समय में राज्य की प्रशासनिक कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।यदि प्रस्तावित व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो मंत्रिपरिषद के प्रस्तावों की प्रक्रिया तेज होने, विभागों के बीच समन्वय बढ़ने और सरकारी निर्णयों के क्रियान्वयन में सुधार की उम्मीद है।इसके साथ ही AI आधारित सुविधाओं का उपयोग प्रशासन को नई तकनीकी क्षमताएं प्रदान कर सकता है।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार का लक्ष्य तकनीक के माध्यम से सुशासन को मजबूत करना और सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि ई-कैबिनेट प्रणाली को किस समयसीमा में लागू किया जाता है और इसकी डिजिटल सुविधाओं को किस प्रकार विकसित किया जाता है।
Next Story