बिहार

Bihar : घूस मांगने पर डाटा एंट्री ऑपरेटर बर्खास्त

Kavita2
2 Aug 2026 9:57 AM IST
Bihar : घूस मांगने पर डाटा एंट्री ऑपरेटर बर्खास्त
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पटना। बिहार सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। इसी क्रम में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग ने रिश्वतखोरी के एक मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए सीतामढ़ी जिला कल्याण कार्यालय में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटर चंदन कुमार को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया। कार्रवाई अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र पासवान के निर्देश पर की गई।

मामला उस समय सामने आया जब शनिवार को मंत्री के सरकारी आवास पर आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम में सीतामढ़ी जिले के सोनवर्षा थाना क्षेत्र से आए एक शिकायतकर्ता ने अपनी समस्या रखी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मिलने वाली अनुदान राशि जारी करने के बदले जिला कल्याण कार्यालय में तैनात डाटा एंट्री ऑपरेटर चंदन कुमार ने 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। शिकायत सुनते ही मंत्री ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल विभागीय अधिकारियों से रिपोर्ट तलब करते हुए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

मंत्री के निर्देश के बाद विभाग ने प्रारंभिक जांच कराई। उपलब्ध तथ्यों और शिकायत के आधार पर डाटा एंट्री ऑपरेटर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा दिया गया। विभाग का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर किसी भी कर्मचारी द्वारा रिश्वत मांगना पूरी तरह अस्वीकार्य है और ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता की राशि के लिए लंबे समय से प्रयास कर रहा था। आरोप है कि संबंधित कर्मचारी ने फाइल आगे बढ़ाने और अनुदान राशि जारी कराने के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की। पीड़ित ने रिश्वत देने से इनकार किया और सीधे मंत्री के जनता दरबार में पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत कर दी।

जनसुनवाई के दौरान मंत्री लखेंद्र पासवान ने स्पष्ट कहा कि सरकार की प्राथमिकता पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा और बिना किसी भ्रष्टाचार के पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

मंत्री ने यह भी कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मिलने वाली सहायता राशि पीड़ितों का अधिकार है। ऐसे मामलों में किसी भी कर्मचारी द्वारा रिश्वत की मांग करना न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह सामाजिक न्याय की भावना के भी खिलाफ है। इसलिए दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस मामले की विस्तृत जांच भी जारी है। यदि जांच के दौरान अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि संबंधित कर्मचारी के खिलाफ पहले भी ऐसी शिकायतें मिली थीं या नहीं।

बिहार सरकार पिछले कुछ समय से भ्रष्टाचार के मामलों में लगातार सख्त कदम उठा रही है। विभिन्न विभागों में शिकायत मिलने पर त्वरित जांच और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है ताकि आम नागरिकों को सरकारी सेवाओं का लाभ बिना किसी अवैध वसूली के मिल सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि जनता दरबार जैसी व्यवस्था आम लोगों को अपनी शिकायत सीधे मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने का अवसर देती है। इससे कई मामलों में त्वरित कार्रवाई संभव हो पाती है और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में भी मदद मिलती है। सीतामढ़ी का यह मामला भी इसका एक उदाहरण माना जा रहा है, जहां शिकायत मिलते ही विभाग ने तत्काल कार्रवाई की।

सरकार ने सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पात्र लाभार्थियों को समय पर योजनाओं का लाभ मिलना सुनिश्चित करना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

फिलहाल, डाटा एंट्री ऑपरेटर की बर्खास्तगी के बाद विभाग आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी कर रहा है। वहीं शिकायतकर्ता को आश्वस्त किया गया है कि उसके मामले का निष्पक्ष निस्तारण किया जाएगा और यदि वह अनुदान राशि का पात्र है तो उसे नियमानुसार बिना किसी अवैध मांग के लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।

इस कार्रवाई को बिहार सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ "जीरो टॉलरेंस" की नीति का हिस्सा माना जा रहा है। विभाग का कहना है कि भविष्य में भी यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ रिश्वत लेने या सरकारी योजनाओं में अनियमितता की शिकायत मिलती है तो उसके विरुद्ध इसी तरह सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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