
Bihar बिहार: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईंधन संकट की आशंका के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्यूल की खपत कम करने और समझदारी से संसाधनों के उपयोग की अपील का असर बिहार में भी देखने को मिला। शुक्रवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सीनियर अधिकारियों के साथ अपने सरकारी आवास से कैबिनेट सचिवालय तक पैदल यात्रा की।
जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री सुबह लोक सेवक आवास (CM का सरकारी घर) से लगभग 500 मीटर की दूरी तय कर पैदल कैबिनेट सचिवालय कार्यालय पहुंचे। उनके साथ वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। इस कदम को ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
इसी दौरान बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देते हुए ई-रिक्शा का उपयोग किया। उन्होंने अपने सरकारी आवास से कार्यालय आने-जाने के लिए निजी वाहनों की बजाय ई-रिक्शा चुना।
माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के आह्वान पर लोकसेवक आवास से मुख्यमंत्री सचिवालय पैदल जाते हुए... pic.twitter.com/lvdZs1We7f
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) May 15, 2026
मीडिया से बातचीत करते हुए मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा, “हमें फ्यूल के रोज़ाना इस्तेमाल को कम करने के लिए इको-फ्रेंडली तरीके अपनाने चाहिए।” उनके इस बयान को सरकार की ईंधन बचत नीति के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।
इससे पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकारी स्तर पर भी एक निर्देश जारी किया था, जिसके तहत उनके काफिले के आकार को कम करने का आदेश दिया गया था। इसके बाद अन्य कैबिनेट सदस्यों ने भी अपने काफिलों में वाहनों की संख्या घटाई है, ताकि ईंधन की खपत को नियंत्रित किया जा सके।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह पहल केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य आम जनता को भी ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। राज्य सरकार का मानना है कि छोटे-छोटे कदमों से भी बड़े स्तर पर ईंधन की बचत संभव है।
बिहार सरकार के इस कदम को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा मिल रही है। इसे केंद्र सरकार की अपील के साथ जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें देशभर में ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया गया है।





