
पटना। बिहार सरकार ने बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में युवाओं, किसानों, पोषण और हरित ऊर्जा से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुल 30 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। सरकार के इन फैसलों में रोजगार और कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं पर विशेष जोर दिया गया है। बिहार सरकार के आधिकारिक विभागीय पोर्टलों पर सम्राट चौधरी को वर्तमान मुख्यमंत्री के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
बैठक में ‘दोगुना रोजगार, दोगुना आय’ के लक्ष्य के तहत कुशल युवा कार्यक्रम को संशोधित स्वरूप में लागू करने का फैसला प्रमुख रहा। सरकार का उद्देश्य युवाओं को रोजगार के अनुरूप प्रशिक्षण देकर उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाना है।
नई व्यवस्था के तहत हर साल 2,57,440 युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अलावा कार्यक्रम के संचालन और उससे जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से सीधे 4,572 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई है।
कुशल युवा कार्यक्रम बिहार में युवाओं के कौशल विकास से जुड़ी प्रमुख योजनाओं में शामिल है। राज्य में युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग के तहत प्रशिक्षण, रोजगार और अप्रेंटिसशिप से संबंधित कई कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
सरकार की योजना युवाओं को केवल प्रमाणपत्र देने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें नौकरी और स्वरोजगार के लिए जरूरी व्यावहारिक कौशल उपलब्ध कराने की है। बदलते रोजगार बाजार में कंप्यूटर ज्ञान, संचार क्षमता और कार्यस्थल से जुड़ी बुनियादी दक्षताओं की मांग बढ़ी है।
इसी को देखते हुए कुशल युवा कार्यक्रम में समय-समय पर बदलाव किए जा रहे हैं। नए संशोधनों के जरिए प्रशिक्षण को रोजगार की जरूरतों से ज्यादा नजदीकी से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।
हर साल ढाई लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा जाना इस योजना के विस्तार का संकेत है। यदि लक्ष्य के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाता है तो पांच वर्षों में बड़ी संख्या में युवा इसका लाभ उठा सकते हैं।
सरकार का फोकस ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं तक भी प्रशिक्षण सुविधाएं पहुंचाने पर रहेगा। रोजगार के अवसरों की कमी के कारण बड़ी संख्या में युवा दूसरे राज्यों की ओर जाते हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
बिहार सरकार ने हाल के महीनों में रोजगार और कौशल विकास से जुड़े कई प्रस्तावों को मंजूरी दी है। अगस्त में भी राज्य मंत्रिमंडल ने कुशल युवा कार्यक्रम को आगे जारी रखने और युवाओं के प्रशिक्षण से जुड़े फैसलों को मंजूरी दी थी।
बुधवार की बैठक में रोजगार के साथ किसानों से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। सरकार का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में आय बढ़ाने और किसानों को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाना है।
बिहार की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है और बड़ी आबादी सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से खेती से जुड़ी हुई है। ऐसे में किसानों की आय बढ़ाने से जुड़े फैसले राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकते हैं।
सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। राज्य का ग्रामीण विकास विभाग रोजगार सृजन, आजीविका और कौशल विकास से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम संचालित करता है। विभाग के आधिकारिक विवरण में भी ग्रामीण गरीब परिवारों के लिए स्थायी रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने को प्रमुख लक्ष्य बताया गया है।
कैबिनेट बैठक में पोषण से संबंधित प्रस्ताव भी शामिल रहे। सरकार बच्चों, महिलाओं और जरूरतमंद वर्गों तक पोषण योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में विभिन्न कार्यक्रम चला रही है।
पोषण योजनाओं में बजट, वितरण व्यवस्था और लाभार्थियों तक समय पर सहायता पहुंचाना महत्वपूर्ण होता है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद संबंधित विभाग अब स्वीकृत प्रस्तावों को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।
हरित ऊर्जा से जुड़े फैसलों को भी बैठक में महत्व दिया गया। बिहार सरकार पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ-साथ स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
राज्य में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए सौर ऊर्जा और अन्य हरित विकल्पों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बढ़ी है। हरित ऊर्जा परियोजनाओं से एक ओर बिजली आपूर्ति में विविधता आ सकती है, वहीं पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम करने में मदद मिल सकती है।
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब संबंधित विभागों को योजनाओं के लिए प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
युवाओं के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण फैसला कुशल युवा कार्यक्रम का संशोधित स्वरूप है। सरकार इसे ‘दोगुना रोजगार, दोगुना आय’ अभियान से जोड़कर आगे बढ़ाना चाहती है।
इसके तहत प्रशिक्षण केंद्रों, प्रशिक्षकों और तकनीकी व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। हर साल 2,57,440 युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए बड़े स्तर पर संसाधनों और निगरानी की आवश्यकता होगी।
योजना की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं को वास्तविक रोजगार या स्वरोजगार से किस हद तक जोड़ा जाता है।
सरकार के सामने केवल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य पूरा करना ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षित युवाओं को उद्योग, सेवा क्षेत्र और नए रोजगार अवसरों तक पहुंचाना भी चुनौती होगी।
इसके लिए उद्योगों, निजी कंपनियों, प्रशिक्षण संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत होगी। बिहार का उद्योग विभाग भी राज्य में उद्यमिता और रोजगार अवसरों को बढ़ाने को अपनी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल करता है।
सीधे 4,572 रोजगार सृजित होने की उम्मीद भी इसी व्यापक कार्यक्रम से जुड़ी है। इनमें प्रशिक्षण व्यवस्था और योजना के संचालन से संबंधित रोजगार शामिल हो सकते हैं।
कैबिनेट के 30 फैसले अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों को कवर करते हैं। रोजगार, कृषि, पोषण और हरित ऊर्जा को एक साथ प्राथमिकता देने की कोशिश सरकार की व्यापक विकास रणनीति का हिस्सा है।
अब इन फैसलों का असर उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। खास तौर पर कुशल युवा कार्यक्रम में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता कैसी रहती है और कितने युवाओं को इसके बाद रोजगार से जोड़ा जा सकता है।
फिलहाल सरकार ने हर साल 2.57 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देने का बड़ा लक्ष्य तय कर दिया है। इसके साथ ही किसानों, पोषण और हरित ऊर्जा से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी देकर कैबिनेट ने कई क्षेत्रों में नई योजनाओं और संशोधनों का रास्ता साफ कर दिया है।





