
बिहार | बिहार में वक्फ़ बिल को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच तीखी जंग जारी है। इस विवाद में अब चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी कूद पड़े हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वह न तो मुसलमानों के हैं और न ही भाजपा के, बल्कि वह किसी के नहीं हैं।
विपक्ष का आरोप है कि वक्फ़ बिल से सरकार एक समुदाय को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रही है। वहीं, सत्ता पक्ष का दावा है कि यह बिल सिर्फ संपत्तियों के सही प्रबंधन और प्रशासनिक सुधार के लिए लाया गया है। लेकिन, विपक्ष इसे एक राजनीतिक मुद्दा बना रहा है।
प्रशांत किशोर का बयान क्यों अहम?
प्रशांत किशोर, जो नीतीश कुमार के कभी करीबी रह चुके हैं, अब उनके कट्टर आलोचक बन गए हैं। उन्होंने कहा,
"नीतीश कुमार अपनी सियासी मजबूरियों के चलते कभी इधर, कभी उधर झूलते रहते हैं। बिहार की जनता समझ चुकी है कि उन्हें सिर्फ कुर्सी से मतलब है।"
नीतीश सरकार की सफाई
सरकार का कहना है कि बिल किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है बल्कि यह वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए जरूरी है। हालांकि, विपक्ष इसे चुनावी एजेंडा करार दे रहा है।
राजनीतिक असर
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा बड़ा रूप ले सकता है। मुस्लिम वोट बैंक पर पकड़ बनाने के लिए राजद, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस बिल के खिलाफ माहौल बना सकते हैं।
अब देखना यह होगा कि सरकार इस विवाद को कैसे संभालती है और क्या प्रशांत किशोर की टिप्पणी से बिहार की सियासत में नया मोड़ आता है?





