
सीतामढ़ी। बिहार के सीतामढ़ी जिले में पुलिस ने लूट और डकैती की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। रुन्नीसैदपुर थाना क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन अवैध हथियार, आठ जिंदा कारतूस और 11 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की योजना नानपुर थाना क्षेत्र के बहुरार गांव स्थित एक सोने की दुकान और ग्राहक सेवा केंद्र (सीएसपी) में लूटपाट करने की थी। हालांकि, वारदात को अंजाम देने से पहले ही पुलिस ने गिरोह के सदस्यों को पकड़ लिया। इस मामले में कुल 12 लोगों को नामजद किया गया है, जिनमें से दो आरोपी अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।
सोने की दुकान और सीएसपी केंद्र था निशाने पर
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी नानपुर थाना क्षेत्र के बहुरार गांव में बड़ी लूट की योजना बना रहे थे। उनके निशाने पर एक आभूषण की दुकान और ग्राहक सेवा केंद्र था।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य दोनों स्थानों पर लूटपाट करने की तैयारी में थे। लेकिन इससे पहले ही पुलिस को आरोपियों की गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल गई।
जांच के दौरान मिले डिजिटल साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने गिरोह से जुड़े लोगों की पहचान की। इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
इस कार्रवाई से एक संभावित बड़ी आपराधिक वारदात को रोकने में सफलता मिली है।
हथियार के साथ वायरल तस्वीर से खुला मामला
रुन्नीसैदपुर थानाध्यक्ष ललित कुमार के अनुसार, बघाड़ी गांव निवासी दीपक कुमार की अवैध हथियार के साथ एक तस्वीर व्हाट्सएप पर प्रसारित हुई थी।
इसकी जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान दीपक कुमार को गिरफ्तार किया गया और उससे पूछताछ की गई।
पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने उसके अन्य साथियों के बारे में पता लगाया। पुलिस को दीपक की निशानदेही पर उसकी चाची बच्ची देवी के पास से एक देसी पिस्टल और दो कारतूस भी बरामद हुए।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों ने भी जांच को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पुलिस ने बरामद किए हथियार और कारतूस
सदर डीएसपी-1 राजीव कुमार सिंह ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि कार्रवाई में एक देसी पिस्टल, दो देसी कट्टे, आठ जिंदा कारतूस और 11 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
पुलिस ने सभी हथियारों को जब्त कर लिया है। बरामद मोबाइल फोन भी जांच के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों के पास हथियार कहां से आए और इनका इस्तेमाल किन आपराधिक गतिविधियों में किया जाना था।
इसके अलावा पुलिस गिरोह के सदस्यों के बीच संपर्क और संभावित आपराधिक नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
अलग-अलग थाना क्षेत्रों से पकड़े गए आरोपी
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में रुन्नीसैदपुर थाना क्षेत्र के बघाड़ी गांव निवासी दीपक कुमार, सोनू कुमार, मनीष कुमार, आयुष कुमार और बच्ची देवी शामिल हैं।
इसके अलावा बाजपट्टी थाना क्षेत्र के सौरा गांव निवासी अभिमन्यु कुमार और आनंद मोहन कुमार को गिरफ्तार किया गया है।
नानपुर थाना क्षेत्र के अधगांव निवासी प्रिंस कुमार और मोहित कुमार तथा ददरी गांव निवासी अवधेश कुमार भी गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ के आधार पर गिरोह की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
दो आरोपी फरार, गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज
इस मामले में पुलिस ने कुल 12 आरोपियों को नामजद किया है। इनमें से 10 को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दो आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
फरार आरोपियों की पहचान बघाड़ी गांव निवासी शिवम कुमार और रुन्नीसैदपुर बाजार के वार्ड नंबर नौ निवासी भोलू उर्फ राजीव कुमार के रूप में हुई है।
पुलिस दोनों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
फिलहाल पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य संभावित संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है।
तीन आरोपियों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड
पुलिस जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि गिरफ्तार आरोपियों में शामिल कुछ लोगों के खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं।
सदर डीएसपी के अनुसार, दीपक कुमार के खिलाफ रुन्नीसैदपुर थाने में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज है। वहीं, सोनू कुमार समेत कुछ अन्य आरोपियों के खिलाफ भी अलग-अलग थाना क्षेत्रों में पूर्व से मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है।
पुलिस इन मामलों से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गिरफ्तार आरोपियों की पूर्व की आपराधिक गतिविधियों और वर्तमान मामले के बीच कोई संबंध है या नहीं।
डिजिटल साक्ष्यों ने जांच को दी नई दिशा
इस मामले में मोबाइल फोन और डिजिटल जानकारी की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। हथियार के साथ तस्वीर सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी।
इसके बाद मोबाइल से मिली ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल सामग्री के आधार पर कथित लूट की योजना का पता चला।
अपराध की योजना बनाने और गिरोह के सदस्यों के बीच संपर्क स्थापित करने में मोबाइल फोन की भूमिका को देखते हुए पुलिस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।
हालांकि, इन साक्ष्यों से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।
व्यापारियों और सीएसपी संचालकों की सुरक्षा अहम
सोने की दुकान और सीएसपी केंद्र को निशाना बनाने की कथित योजना सामने आने के बाद ऐसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है।
आभूषण की दुकानों में कीमती सामान मौजूद रहता है, जबकि ग्राहक सेवा केंद्रों पर नकदी का लेनदेन होता है। ऐसे प्रतिष्ठानों में सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरे और संदिग्ध गतिविधियों की समय पर सूचना देना अपराध रोकने में सहायक हो सकता है।
पुलिस की इस कार्रवाई ने एक संभावित बड़ी लूट की घटना को रोक दिया है। अब जांच का मुख्य उद्देश्य फरार आरोपियों को पकड़ना और गिरोह की कथित आपराधिक गतिविधियों की पूरी जानकारी जुटाना है।
रुन्नीसैदपुर पुलिस की इस कार्रवाई को अपराध नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है और दो फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।





