
बिहार | बिहार कांग्रेस में बड़े स्तर पर फेरबदल किया गया है। पार्टी ने 20 जिलों के अध्यक्ष बदल दिए, जबकि कई जिलों में कार्यकारी अध्यक्षों की भी नियुक्ति की गई है। आगामी चुनाव को देखते हुए नई टीम को उतारा गया है, जिससे संगठन को मजबूत करने और पार्टी को नई ऊर्जा देने की रणनीति अपनाई गई है।
कांग्रेस का बिहार में प्रदर्शन बीते कुछ वर्षों से मजबूत नहीं रहा है। पार्टी के कई बड़े नेता दूसरी पार्टियों में शामिल हो गए, जिससे संगठन कमजोर हुआ। इसे दोबारा खड़ा करने के लिए नई रणनीति बनाई गई, जिसमें जमीनी स्तर पर मजबूत नेताओं को आगे लाने का फैसला लिया गया।
नई सूची में कई पुराने नेताओं को हटाकर नए चेहरों को मौका दिया गया है। कुछ जिलों में दोहरे अध्यक्षों की भी तैनाती की गई है, जिससे संगठन को अधिक मजबूती मिले।
अररिया – साद अहमद
दरभंगा – दयानंद पासवान
पूर्वी चंपारण – शशि भूषण राय
गोपालगंज – ओम प्रकाश गर्ग
कटिहार – सुनील यादव (गुलाम शाहिद और सौरभ कुमार कार्यकारी अध्यक्ष)
किशनगंज – इमाम अली (शाहिबुल अख्तर कार्यकारी अध्यक्ष)
मधेपुरा – सूर्यनारायण राम
मधुबनी – सुबोध मंडल
मुजफ्फरपुर – अरविंद मुकुल
पूर्णिया – बिजेंद्र यादव
सहरसा – मुकेश झा (तारणी ऋषिदेव कार्यकारी अध्यक्ष)
समस्तीपुर – अबू तमीम
सारण – बाचु प्रसाद बिरु
शिवहर – नूरी बेगम
सीतामढ़ी – रकतू प्रसाद
सीवान – सुशील कुमार यादव
सुपौल – सूर्यनारायण मेहता (राम नारायण पी डी गुप्ता कार्यकारी अध्यक्ष)
वैशाली – महेश पी डी राय (अक्षय शुक्ला कार्यकारी अध्यक्ष)
पश्चिम चंपारण – परमोद सिंह पटेल
औरंगाबाद – राकेश कुमार सिंह (महानंदा यादव कार्यकारी अध्यक्ष)
बिहार कांग्रेस की नई रणनीति
कांग्रेस अब बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी ने तय किया है कि स्थानीय स्तर पर सक्रिय नेताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी, ताकि जमीनी पकड़ मजबूत हो सके।
आगे क्या?
बिहार कांग्रेस के इस बदलाव से पार्टी में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। हालांकि, यह देखना होगा कि नई टीम लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की स्थिति को कितना सुधार पाती है।





