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बिहार में 'सूखे नशे' पर पुलिस का बड़ा प्रहार, अक्टूबर में 51 तस्कर गिरफ्तार

Rajeshwari Nishad
4 Nov 2026 4:47 PM IST
बिहार में सूखे नशे पर पुलिस का बड़ा प्रहार, अक्टूबर में 51 तस्कर गिरफ्तार
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मोतिहारी। बिहार में सूखे नशे के खिलाफ राज्य सरकार के अभियान के बीच पूर्वी चंपारण जिले की मोतिहारी पुलिस ने अक्टूबर महीने में की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा जारी किया है। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान कुल 35 मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 51 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में 48 पुरुष और तीन महिलाएं शामिल हैं। पुलिस ने इस दौरान भारी मात्रा में गांजा, चरस, स्मैक, नशीले इंजेक्शन और प्रतिबंधित कफ सिरप भी बरामद किए हैं। 4 नवंबर को जारी इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
बिहार सरकार ने पिछले सप्ताह पूरे राज्य में सूखे नशे के खिलाफ विशेष अभियान शुरू करने की घोषणा की थी। इसके बाद पुलिस और संबंधित एजेंसियों की गतिविधियां चर्चा में हैं। हालांकि, मोतिहारी पुलिस द्वारा जारी आंकड़े पूरे अक्टूबर महीने की कार्रवाई से संबंधित हैं। ऐसे में इन्हें केवल पिछले सप्ताह शुरू हुए अभियान का परिणाम नहीं माना जा सकता। ये आंकड़े जिले में पहले से जारी मादक पदार्थ विरोधी प्रयासों की भी तस्वीर पेश करते हैं।
205 किलो से ज्यादा गांजा बरामद
पुलिस की ओर से जारी विवरण के अनुसार, अक्टूबर महीने में अलग-अलग थाना क्षेत्रों से कुल 205.953 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया। इसके अलावा 12.886 किलोग्राम चरस और 50.566 ग्राम स्मैक भी जब्त की गई है। मादक पदार्थों की इतनी बड़ी मात्रा में बरामदगी को पुलिस की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
कार्रवाई के दौरान 3,252 नशीले इंजेक्शन, 206 ओनरेक्स कफ सिरप और 80 गोगो पेपर भी बरामद किए गए हैं। पुलिस ने विभिन्न मामलों में इन सामग्रियों को जब्त कर संबंधित आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है।मादक पदार्थों की बरामदगी के इन आंकड़ों से यह भी संकेत मिलता है कि अवैध नशे का कारोबार केवल गांजा और चरस तक सीमित नहीं है। स्मैक, नशीले इंजेक्शन और प्रतिबंधित दवाओं का इस्तेमाल भी पुलिस के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
हरसिद्धि में पकड़ी गई गांजे की बड़ी खेप
अक्टूबर महीने की प्रमुख कार्रवाइयों में हरसिद्धि थाना क्षेत्र का मामला शामिल है। पुलिस के अनुसार, 13 अक्टूबर 2026 को दर्ज कांड संख्या 503/26 में 58.93 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया था। इस मामले में तीन आरोपियों के नाम दर्ज किए गए हैं।यह बरामदगी अक्टूबर में जिले के भीतर पकड़ी गई बड़ी खेपों में शामिल है। इसके अलावा अन्य थाना क्षेत्रों में भी अलग-अलग कार्रवाई के दौरान मादक पदार्थ जब्त किए गए।पुलिस की रिपोर्ट में नगर, सुगौली, बंजरिया, रघुनाथपुर, लखौरा, पिपराकोठी, कोटवा, केसरिया, पिपरा और मेहसी सहित कई थाना क्षेत्रों में कार्रवाई का उल्लेख है। गोविंदगंज, अरेराज, मधुबन, छौड़ादानो, ढाका, चिरैया, पकड़ीदयाल, फेनहारा और पताही क्षेत्रों में भी मादक पदार्थों से संबंधित मामले सामने आए हैं।पुलिस की इस व्यापक कार्रवाई से पता चलता है कि नशे के अवैध कारोबार पर निगरानी किसी एक इलाके तक सीमित नहीं रखी गई है।
नेपाल सीमा से सटे इलाकों में विशेष चुनौती
पूर्वी चंपारण जिला नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्रों में मादक पदार्थों की तस्करी रोकना पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।रक्सौल, आदापुर, हरैया, घोड़ासहन और जितना जैसे सीमावर्ती थाना क्षेत्रों में भी अक्टूबर के दौरान मादक पदार्थों से संबंधित कार्रवाई दर्ज की गई है।सीमावर्ती इलाकों में तस्करी रोकने के लिए स्थानीय पुलिस के साथ अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इन क्षेत्रों में वाहनों की निगरानी, संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाने और अवैध आपूर्ति के रास्तों की पहचान करने जैसे उपायों से तस्करी के नेटवर्क पर दबाव बनाया जा सकता है।हालांकि, किसी विशेष बरामदगी का संबंध अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क से है या नहीं, इसका निर्धारण जांच के बाद ही किया जा सकता है।
35 मामलों में 51 लोगों की गिरफ्तारी
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में दर्ज 35 मामलों में कुल 51 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने अब आरोपियों से जुड़े आपूर्ति नेटवर्क की पहचान करने की चुनौती है।मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों में केवल खेप बरामद करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। यह भी पता लगाना जरूरी होता है कि नशीले पदार्थ कहां से लाए गए, किन लोगों तक पहुंचाए जाने थे और इनके कारोबार में कौन-कौन शामिल है।इस तरह की जांच के जरिए पुलिस बड़े तस्करों, आपूर्तिकर्ताओं और स्थानीय स्तर पर सक्रिय अवैध विक्रेताओं की पहचान कर सकती है।इसके अलावा जब्त किए गए मादक पदार्थों की कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जांच और मामलों में मजबूत साक्ष्य जुटाना भी महत्वपूर्ण होता है, ताकि अदालत में आरोपों को प्रमाणित किया जा सके।
युवाओं को नशे से बचाना बड़ी चुनौती
सूखे नशे का बढ़ता चलन सामाजिक दृष्टि से भी गंभीर चिंता का विषय है। विशेष रूप से किशोरों और युवाओं को नशीले पदार्थों की लत से बचाने के लिए कानून लागू करने के साथ जागरूकता अभियान भी जरूरी हैं।
नशीले पदार्थों के नियमित सेवन से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसकी लत व्यक्ति की पढ़ाई, रोजगार, पारिवारिक संबंधों और आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित कर सकती है।विशेषज्ञों के अनुसार, नशे की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तस्करी पर रोक लगाने के साथ उपचार, परामर्श और पुनर्वास सेवाओं की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है।विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी से युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा सकता है।
नशे के बड़े नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी
मोतिहारी पुलिस की अक्टूबर महीने की कार्रवाई में 35 मामले दर्ज होना और 51 आरोपियों की गिरफ्तारी महत्वपूर्ण है। हालांकि, अवैध मादक पदार्थों के कारोबार पर स्थायी नियंत्रण के लिए इन मामलों की जांच को आगे बढ़ाना भी जरूरी होगा।पुलिस के सामने यह चुनौती रहेगी कि गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े बड़े आपूर्ति नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ भी प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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