
Bihar:आरा में भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर के बाद गांव में तनाव और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। परिजनों के बाद अब ग्रामीणों ने भी पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि भरत ने सरेंडर कर दिया था, इसके बावजूद उसे कई गोलियां मारी गईं।
सरेंडर के बाद कार्रवाई पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि यदि भरत ने हथियार डालकर सरेंडर कर दिया था, तो उसके बाद गोली चलाने की जरूरत क्यों पड़ी। लोगों ने आरोप लगाया कि एनकाउंटर के दौरान नियमों का पालन नहीं किया गया।
“घुटने के नीचे गोली क्यों नहीं मारी गई?”
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऑपरेशन लंगड़ा के तहत आमतौर पर आरोपी को घुटने के नीचे गोली मारी जाती है ताकि उसे पकड़ा जा सके। लेकिन इस मामले में भरत को जांघ और पेट के निचले हिस्से में गोली लगने की बात कही जा रही है।
आपराधिक रिकॉर्ड न होने का दावा
गांव के लोगों का दावा है कि भरत तिवारी का कोई बड़ा आपराधिक इतिहास नहीं था। उनका कहना है कि वह स्थानीय मुद्दों को उठाने और लोगों की मदद करने का काम करता था। इसी कारण उसकी मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है।
सड़क जाम और विरोध प्रदर्शन
घटना के बाद ग्रामीणों ने आरा-बक्सर फोरलेन को जाम कर दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।
पुलिस का पक्ष
पुलिस का कहना है कि कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी ने टीम पर फायरिंग की थी, जिसके जवाब में वह घायल हुआ और बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार कार्रवाई नियमों के तहत की गई।
गांव में तनाव कायम
घटना के बाद गांव में अब भी तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। ग्रामीण लगातार न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी है।





