बिहार

बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर की परीक्षा

Kavita2
3 Aug 2026 9:37 AM IST
बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर की परीक्षा
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पटना। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर के लिए आज का दिन राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव की मतगणना शुरू हो चुकी है और दोपहर तक यह स्पष्ट हो जाएगा कि प्रशांत किशोर अपनी राजनीतिक पारी की तीसरी बड़ी परीक्षा में सफल होते हैं या उन्हें एक बार फिर हार का सामना करना पड़ता है।

बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन के खाली करने के बाद उपचुनाव के लिए गई थी। इस सीट पर मुकाबला काफी चर्चा में रहा, क्योंकि प्रशांत किशोर ने इसे केवल एक विधानसभा चुनाव नहीं, बल्कि राज्य सरकार और भाजपा के खिलाफ जनता की राय के तौर पर पेश किया था। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान दावा किया था कि यदि जनता भाजपा को हराती है तो इसका संदेश बिहार से निकलकर दिल्ली तक जाएगा।

मतगणना शुरू होने के बाद शुरुआती रुझानों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि बिहार की राजनीति में नया विकल्प देने का दावा करने वाली जन सुराज पार्टी को जनता का कितना समर्थन मिला है। प्रशांत किशोर लंबे समय तक चुनावी रणनीतिकार के रूप में अलग-अलग दलों और नेताओं के साथ काम करते रहे हैं, लेकिन सक्रिय राजनीति में उतरने के बाद यह उनकी तीसरी बड़ी राजनीतिक परीक्षा है।

इससे पहले नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव और उससे कुछ समय पहले हुए चार विधानसभा उपचुनावों में जन सुराज पार्टी को कोई सीट हासिल नहीं हो पाई थी। ऐसे में बांकीपुर चुनाव प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी के लिए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का बड़ा अवसर माना जा रहा है।

बांकीपुर विधानसभा सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने लगातार स्थानीय मुद्दों और शासन व्यवस्था को लेकर भाजपा पर निशाना साधा था। उन्होंने मतदाताओं से अपील की थी कि वे पारंपरिक राजनीति से अलग एक नए विकल्प को मौका दें। उनका कहना था कि बिहार की जनता बदलाव चाहती है और जन सुराज इस बदलाव का माध्यम बन सकता है।

इस सीट पर भाजपा ने नीरज सिन्हा को मैदान में उतारा था, जबकि राजद की ओर से रेखा गुप्ता चुनावी मैदान में थीं। चुनाव के दौरान मुख्य मुकाबला भाजपा और जन सुराज के बीच माना गया। वहीं, राजद उम्मीदवार को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों के बीच अलग-अलग राय सामने आई।

30 जुलाई को बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में मतदान हुआ था। मतदान के बाद आए कुछ एग्जिट पोल में प्रशांत किशोर को भाजपा उम्मीदवार नीरज सिन्हा पर बढ़त दिखाई गई थी। सर्वे में दावा किया गया था कि राजद का एक बड़ा वोट बैंक जन सुराज की ओर स्थानांतरित हो सकता है। हालांकि, वास्तविक तस्वीर मतगणना पूरी होने के बाद ही साफ होगी।

बांकीपुर विधानसभा सीट पटना शहर की महत्वपूर्ण सीटों में से एक मानी जाती है। यहां शहरी मतदाताओं की संख्या अधिक है और चुनावी समीकरण भी अन्य क्षेत्रों से अलग रहे हैं। भाजपा लंबे समय से इस सीट पर मजबूत स्थिति में रही है, इसलिए प्रशांत किशोर के लिए यहां जीत हासिल करना राजनीतिक रूप से बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बांकीपुर का परिणाम केवल एक सीट का फैसला नहीं होगा, बल्कि यह जन सुराज पार्टी की स्वीकार्यता का संकेत भी देगा। यदि प्रशांत किशोर यहां जीत दर्ज करते हैं तो बिहार की राजनीति में उनकी पार्टी को एक नई पहचान मिल सकती है। वहीं, अगर परिणाम उनके पक्ष में नहीं आता है तो पार्टी के संगठन और रणनीति को लेकर नए सवाल खड़े हो सकते हैं।

प्रशांत किशोर ने चुनाव को भाजपा बनाम जन सुराज की लड़ाई के रूप में पेश करने की कोशिश की थी। उन्होंने अपने प्रचार अभियान में युवाओं, रोजगार, शिक्षा और बेहतर प्रशासन जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। उनका दावा रहा कि बिहार में लोग बदलाव के लिए तैयार हैं और उन्हें एक नए राजनीतिक विकल्प की जरूरत है।

दूसरी ओर, भाजपा ने अपने मजबूत संगठन और पुराने जनाधार के सहारे चुनाव लड़ा। पार्टी नेताओं ने क्षेत्र में विकास कार्यों और सरकार की उपलब्धियों को प्रमुख मुद्दा बनाया। राजद ने भी अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने का प्रयास किया।

अब मतगणना के साथ ही सभी राजनीतिक दलों की नजरें परिणाम पर टिकी हैं। शुरुआती रुझान आने के बाद तस्वीर धीरे-धीरे साफ होगी और दोपहर तक बांकीपुर की जनता का फैसला सामने आ जाएगा।

यदि जन सुराज पार्टी इस चुनाव में जीत दर्ज करती है तो यह प्रशांत किशोर के लिए बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। वहीं, भाजपा के लिए भी यह सीट अपनी पकड़ बनाए रखने की चुनौती है। फिलहाल सभी की निगाहें मतगणना केंद्र पर हैं और कुछ घंटों में बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम बिहार की राजनीतिक दिशा पर असर डाल सकता है।

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