बिहार

तिरहुत टाउनशिप में जमीन खरीद-बिक्री से हटी रोक, भू-स्वामियों को बड़ी राहत

nidhi
31 Oct 2026 8:36 AM IST
तिरहुत टाउनशिप में जमीन खरीद-बिक्री से हटी रोक, भू-स्वामियों को बड़ी राहत
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तिरहुत के भू-स्वामियों का इंतजार होगा खत्म
मुजफ्फरपुर: बिहार सरकार ने ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप क्षेत्रों में भूमि की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण पर लगी रोक हटाने का फैसला लिया है। इससे मुजफ्फरपुर की तिरहुत ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के दायरे में आने वाले भू-स्वामियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 28 अक्टूबर को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। हालांकि, स्थानीय स्तर पर रजिस्ट्री की प्रक्रिया दोबारा शुरू होने के लिए संबंधित विभागों के आदेश और उनके क्रियान्वयन की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
सरकार के इस निर्णय से उन लोगों के लिए जमीन बेचने या हस्तांतरित करने का रास्ता खुलेगा, जिनकी संपत्ति अधिसूचित टाउनशिप क्षेत्र में आती है। अप्रैल में प्रतिबंध लागू होने के बाद सामान्य तरीके से जमीन का लेनदेन प्रभावित हुआ था। अब रोक हटाने की मंजूरी मिलने से भू-स्वामी अपनी जरूरतों के अनुसार संपत्ति के संबंध में निर्णय ले सकेंगे। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, नगर विकास एवं आवास विभाग और निबंधन विभाग के संबंधित पत्र जारी होने के बाद निबंधन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
भूमि की खरीद-बिक्री की छूट के साथ निर्माण संबंधी नियम भी स्पष्ट किए गए हैं। टाउनशिप की विकास योजना अधिसूचित होने के बाद जमीन का विकास और भवन निर्माण निर्धारित भूमि उपयोग तथा संबंधित डेवलपमेंट कंट्रोल रेगुलेशन यानी डीसीआर के अनुसार होगा। ऐसे में जमीन खरीदने वाले व्यक्ति को यह देखना होगा कि संबंधित भूखंड पर किस प्रकार का उपयोग और निर्माण अनुमन्य है। केवल खरीद-बिक्री पर रोक हटने से किसी भी तरह का भवन बनाने की स्वतः अनुमति नहीं मिलती।
तिरहुत टाउनशिप मुजफ्फरपुर के आसपास सुनियोजित शहरी विकास की परियोजना है। इसके अंतर्गत आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों के साथ सड़क, हरित क्षेत्र तथा अन्य शहरी सुविधाओं के लिए नियोजित व्यवस्था विकसित करने की परिकल्पना की गई है। परियोजना से जुड़े क्षेत्र जिले के कांटी, कुढ़नी, मड़वन और मुशहरी प्रखंडों में हैं। प्रारंभिक योजना के विवरण में लगभग 800 एकड़ कोर क्षेत्र और करीब 20,200 एकड़ विशेष क्षेत्र का उल्लेख किया गया था।
इस परियोजना के लिए जमीन के लेनदेन पर रोक का असर निबंधन कार्यालय में भी दिखाई दिया था। अप्रैल में प्रतिबंध लागू होने के शुरुआती दिन ही जमीन की खरीद-बिक्री के लिए तैयार 113 दस्तावेज लौटा दिए गए थे। उस समय प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित राजस्व गांवों की जमीन के निबंधन और स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया प्रभावित हुई थी। इससे पहले से लेनदेन की तैयारी कर चुके लोगों को भी इंतजार करना पड़ा। अब सरकारी निर्णय के बाद ऐसे लंबित प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की संभावना बनेगी।
प्रतिबंध के दौरान जरूरतमंद भू-स्वामियों के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था भी बनाई गई थी। नगर विकास एवं आवास विभाग के अभिलेखों के अनुसार, 19 जून, 2026 के संकल्प के जरिए बिहार राज्य आवास बोर्ड को निर्धारित नीति के तहत जमीन खरीदने के लिए अधिकृत किया गया था। इसमें भू-स्वामियों की तात्कालिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखा गया था। साथ ही सरकारी प्राधिकार के भू-अर्जन तथा स्वीकृत निवेश परियोजनाओं के लिए भूमि क्रय या लीज से संबंधित प्रावधान भी किए गए थे।
अक्टूबर की शुरुआत में सामने आई एक स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, तिरहुत टाउनशिप क्षेत्र में जमीन बेचने के इच्छुक 60 से अधिक रैयत आवास बोर्ड की प्रक्रिया के तहत आवेदन कर चुके थे। जमीन खरीद की प्रक्रिया में राजस्व अभिलेखों के मिलान और भूमि पर किसी प्रकार के भार की जांच का भी उल्लेख था। इससे पता चलता है कि सामान्य खरीद-बिक्री बंद रहने के दौरान जरूरतमंद जमीन मालिक वैकल्पिक रास्ते का उपयोग कर रहे थे।
राज्य सरकार का ताजा फैसला केवल तिरहुत परियोजना तक सीमित नहीं है। राज्य के चयनित 11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप क्षेत्रों के लिए खरीद-बिक्री और हस्तांतरण पर लगी रोक हटाने को मंजूरी दी गई है। इनमें पटना, सोनपुर, गया, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, छपरा, भागलपुर और सीतामढ़ी शामिल हैं। इन क्षेत्रों में मास्टर प्लान तैयार करने और सुनियोजित विकास के उद्देश्य से पहले प्रतिबंध लगाए गए थे।
तिरहुत क्षेत्र में जमीन का सौदा करने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए अब संबंधित भूखंड, मौजा और निबंधन कार्यालय में लागू आदेश की स्थिति स्पष्ट करना जरूरी होगा। कैबिनेट की मंजूरी और कार्यालय में रजिस्ट्री शुरू होने की प्रक्रिया के बीच विभागीय निर्देश अहम कड़ी हैं। इसके साथ ही प्रस्तावित भूमि उपयोग की जानकारी भविष्य में निर्माण की योजना बनाने में मदद करेगी। सरकार के निर्णय से संपत्ति के लेनदेन में राहत का रास्ता खुला है, जबकि टाउनशिप का विकास स्वीकृत योजना और निर्माण नियमों के दायरे में आगे बढ़ेगा।
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