बिहार

कान्हा के जन्मोत्सव के लिए सजा बैकुंठनाथ मंदिर

nidhi
3 Sept 2026 8:20 AM IST
कान्हा के जन्मोत्सव के लिए सजा बैकुंठनाथ मंदिर
x
जन्म मंदिर में विशेष उत्सव की तैयारी

बक्सर: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर बक्सर में श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों की तैयारियां की जा रही हैं। शहर के प्रसिद्ध बैकुंठनाथ मंदिर में भी जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष उत्सव की तैयारी है। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा और कान्हा के जन्म के साथ मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठेगा। जन्माष्टमी को लेकर मंदिर को विशेष रूप से सजाने की तैयारी की गई है। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के लिए आकर्षक झांकी तैयार की जाएगी। फूलों और रोशनी से मंदिर परिसर की सजावट होगी। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए दर्शन और पूजा की व्यवस्था भी की जा रही है।

आधी रात मनेगा कान्हा का जन्मोत्सव
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। इसी कारण जन्माष्टमी पर रात 12 बजे भगवान के जन्म का विशेष उत्सव मनाने की परंपरा है।
बैकुंठनाथ मंदिर में भी मध्यरात्रि के समय विशेष पूजा होगी। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद बाल गोपाल का अभिषेक और श्रृंगार किया जाएगा। इसके बाद आरती होगी और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया जाएगा। कान्हा के जन्म की घड़ी आते ही शंख और घंटियों की आवाज के बीच भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए जाएंगे। श्रद्धालु भगवान के बाल स्वरूप के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
विशेष श्रृंगार और झांकी बनेगी आकर्षण
जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। बाल गोपाल को नए वस्त्र पहनाकर मुकुट, मोरपंख और आभूषणों से सजाया जाएगा। भगवान के लिए विशेष पालना भी तैयार किया जा रहा है। जन्मोत्सव के बाद श्रद्धालुओं को कान्हा का पालना झुलाने का अवसर मिलेगा। मंदिर में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से संबंधित झांकियां भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन सकती हैं। जन्माष्टमी पर मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में नजर आएगा।
भजन कीर्तन से गूंजेगा मंदिर
उत्सव के दौरान भजन और कीर्तन का आयोजन भी किया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण के भजनों के साथ श्रद्धालु जन्मोत्सव की प्रतीक्षा करेंगे। रात बढ़ने के साथ मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है और मध्यरात्रि में मुख्य जन्मोत्सव मनाया जाएगा। जन्माष्टमी के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपवास भी रखते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद पूजा और प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु भगवान को माखन-मिश्री, फल और अन्य प्रसाद अर्पित करेंगे।
घरों में भी सजेंगे लड्डू गोपाल
मंदिरों के साथ घरों में भी जन्माष्टमी की तैयारियां की जा रही हैं। श्रद्धालु अपने घरों में लड्डू गोपाल का विशेष श्रृंगार करेंगे। छोटे पालने सजाए जाएंगे और रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। बच्चों के लिए श्रीकृष्ण और राधा की वेशभूषा भी जन्माष्टमी का विशेष आकर्षण रहती है। कई परिवार बच्चों को कान्हा और राधा के रूप में सजाते हैं। बाजारों में भगवान के वस्त्र, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, पालना और सजावट की सामग्री की खरीदारी भी की जा रही है।
सुरक्षा और व्यवस्था पर भी रहेगा ध्यान
बैकुंठनाथ मंदिर में जन्माष्टमी पर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं को परेशानी न हो इसके लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भगवान कृष्ण के जन्म और उनकी लीलाओं की स्मृति में मनाया जाता है। श्रद्धालुओं के लिए यह दिन विशेष धार्मिक महत्व रखता है। बक्सर में भी जन्माष्टमी को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है। बैकुंठनाथ मंदिर में आधी रात जैसे ही कान्हा के जन्म की घोषणा होगी पूरा परिसर 'नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की' और 'हरे कृष्ण' के जयकारों से गूंज उठेगा। विशेष पूजा, श्रृंगार, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण के साथ भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा।
Next Story