
Bihar बिहार: जिले के बहादुरपुर थाना क्षेत्र में रविवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां पोखर में डूबने से पांचवीं कक्षा के एक छात्र की मौत हो गई। यह घटना उस समय हुई जब वह अपने मोहल्ले के अन्य बच्चों के साथ स्नान करने के लिए गया था। हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है और परिवार में मातम पसरा हुआ है।
जानकारी के अनुसार, बहादुरपुर थाना क्षेत्र के वार्ड स्थित भगवती पोखर में रविवार सुबह लगभग 10 बजे चार से पांच बच्चे स्नान कर रहे थे। इसी दौरान विकास कुमार कामत के 10 वर्षीय पुत्र अविनाश कुमार का संतुलन बिगड़ गया और वह अचानक गहरे पानी में चला गया। गहराई का अंदाजा न लग पाने के कारण वह खुद को संभाल नहीं सका और देखते ही देखते पानी में डूब गया।
घटना के बाद वहां मौजूद अन्य बच्चों ने शोर मचाया और मदद के लिए चीख-पुकार शुरू कर दी। बच्चों की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने तुरंत बच्चे को बचाने की कोशिश की और पोखर में उतरकर उसे ढूंढने का प्रयास किया। हालांकि, काफी देर बाद बच्चे को पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी।
स्थानीय लोगों ने तुरंत उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, बच्चे की मौत डूबने के कारण हुई और उसे बचाया नहीं जा सका।
घटना की जानकारी मिलते ही परिवार के लोग मौके पर पहुंचे, जहां उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पूरे इलाके में इस हादसे के बाद गहरा शोक फैल गया है। ग्रामीणों ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद है और इसने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चे अक्सर गर्मी के मौसम में पोखर में स्नान करने जाते हैं, लेकिन गहरे पानी और सुरक्षा के इंतजामों की कमी के कारण ऐसे हादसे हो जाते हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पोखरों और तालाबों के आसपास सुरक्षा के उचित इंतजाम किए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि घटना एक दुर्घटना है, लेकिन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में जलस्रोतों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे स्थानों पर चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा घेराबंदी और बच्चों की निगरानी की व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि समय रहते बेहतर सुरक्षा व्यवस्था होती, तो इस तरह की दुखद घटना को टाला जा सकता था। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए और ऐसे जलस्रोतों के आसपास सतर्कता बढ़ाई जाए।
फिलहाल, अविनाश कुमार की मौत के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है। परिवार के सदस्य इस असहनीय क्षति से उबर नहीं पा रहे हैं। गांव के लोग परिवार को सांत्वना देने में जुटे हुए हैं, लेकिन माहौल पूरी तरह गमगीन बना हुआ है।
यह हादसा एक बार फिर यह याद दिलाता है कि छोटे बच्चों की सुरक्षा और निगरानी में लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगा।





