बिहार

उत्तरी बहोरवा में बागमती का कटाव तेज, अधिकारियों ने संभाला मोर्चा

Kavita2
7 Aug 2026 4:26 PM IST
उत्तरी बहोरवा में बागमती का कटाव तेज, अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
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खगड़िया। केबी तटबंध के 13-14 किलोमीटर के सामने स्थित उत्तरी बहोरवा क्षेत्र में एक बार फिर बागमती नदी ने उग्र रूप धारण कर लिया है। नदी के तेज कटाव के कारण स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। कटाव की सूचना मिलने के बाद गुरुवार को फ्लड फाइटिंग फोर्स और बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया।

फ्लड फाइटिंग फोर्स के अध्यक्ष सत्यजीत, बाढ़ नियंत्रण अंचल खगड़िया के अधीक्षण अभियंता रवींद्र सिंह और बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-दो, खगड़िया के कार्यपालक अभियंता मनीष कुमार नाव से उत्तरी बहोरवा पहुंचे। अधिकारियों ने नदी के कटाव प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया और वर्तमान स्थिति की जानकारी ली।

नाव से पहुंचे अधिकारी, कटाव का लिया जायजा

कटाव प्रभावित इलाके तक पहुंचने के लिए अधिकारियों की टीम नाव के सहारे पहुंची। मौके पर पहुंचकर उन्होंने नदी की धारा, कटाव की गति और तटबंध की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया।

अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से भी बातचीत की और नदी के बढ़ते कटाव से जुड़ी जानकारी ली। ग्रामीणों ने बताया कि बागमती की तेज धारा लगातार किनारे की मिट्टी को काट रही है, जिससे आसपास के इलाकों में खतरा बढ़ गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी के कटाव के कारण हर साल बरसात के मौसम में परेशानी बढ़ जाती है। समय रहते बचाव कार्य नहीं किए गए तो कई इलाकों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है।

बाढ़ नियंत्रण विभाग सतर्क

बागमती नदी के कटाव को देखते हुए बाढ़ नियंत्रण विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्र की स्थिति का आकलन कर आवश्यक कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है।

फ्लड फाइटिंग फोर्स की टीम का मुख्य उद्देश्य बाढ़ और कटाव जैसी आपात परिस्थितियों में तटबंधों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है। टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर स्थिति की समीक्षा की गई, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

अधिकारियों ने कटाव वाले स्थानों की स्थिति, नदी के दबाव और संभावित खतरे का मूल्यांकन किया। इसके आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।

ग्रामीणों में बढ़ी चिंता

उत्तरी बहोरवा के ग्रामीण नदी के कटाव को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि बागमती की धारा में लगातार बदलाव हो रहा है और कटाव का दायरा बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कटाव रोकने के लिए जल्द से जल्द ठोस उपाय किए जाएं। उनका कहना है कि समय रहते बचाव कार्य शुरू होने से बड़े नुकसान को टाला जा सकता है।

लोगों को डर है कि यदि नदी का कटाव इसी तरह जारी रहा तो आसपास के खेत, घर और अन्य संपत्तियां प्रभावित हो सकती हैं।

तटबंध की सुरक्षा पर विशेष नजर

केबी तटबंध क्षेत्र में नदी के दबाव को देखते हुए विभाग की नजर लगातार बनी हुई है। बरसात के मौसम में नदियों का जलस्तर बढ़ने के साथ कटाव की समस्या भी गंभीर हो जाती है।

बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारी लगातार संवेदनशील स्थानों की निगरानी कर रहे हैं। तटबंधों की मजबूती बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।

जल्द शुरू हो सकते हैं बचाव कार्य

निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कार्रवाई का संकेत दिया है। विभाग की ओर से जल्द ही कटाव रोकने के लिए बचाव कार्य शुरू किए जाने की संभावना है।

कटाव प्रभावित क्षेत्रों में आमतौर पर बांस, बोरी, मिट्टी और अन्य सामग्रियों के माध्यम से तत्काल सुरक्षा उपाय किए जाते हैं। इसके अलावा नदी की धारा और कटाव की स्थिति के अनुसार स्थायी समाधान की योजना भी बनाई जाती है।

प्रशासन की सक्रियता से ग्रामीणों को उम्मीद

अधिकारियों के मौके पर पहुंचने से ग्रामीणों में राहत की उम्मीद जगी है। लोगों को भरोसा है कि प्रशासन समय रहते कदम उठाकर बागमती के कटाव से होने वाले संभावित नुकसान को रोकने का प्रयास करेगा।

फिलहाल बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीम स्थिति पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में नदी के जलस्तर और कटाव की गति के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

बागमती नदी के किनारे बसे इलाकों में हर साल मानसून के दौरान कटाव एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है। ऐसे में समय पर निगरानी और प्रभावी बचाव उपाय ही लोगों और तटबंधों की सुरक्षा के लिए सबसे अहम माने जा रहे हैं।

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