
गया। मानपुर प्रखंड स्थित गोपाल नगर के करीब 90 घरों में रहने वाले 800 से अधिक लोग आज भी सड़क और पुलिया जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गांव से मुख्य सड़क और स्कूल की ओर जाने वाले रास्ते में पइन-नाला पड़ता है। सामान्य दिनों में ग्रामीण किसी तरह इसे पार कर लेते हैं, लेकिन बारिश के मौसम में नाले में गहरा पानी भर जाने से आवागमन बेहद खतरनाक हो जाता है। इसके बावजूद बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को मजबूरी में इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है।
ग्रामीणों के मुताबिक, पइन-नाले पर पुलिया नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में गोपाल नगर का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से प्रभावित हो जाता है। पानी का बहाव तेज होने और नाले की गहराई का अनुमान नहीं लगने से हादसे का खतरा बना रहता है। स्कूली बच्चे किताबों से भरा बैग लेकर रोज इसी कठिन रास्ते को पार करते हैं। बच्चों के स्कूल जाने और सुरक्षित घर लौटने तक अभिभावकों को चिंता सताती रहती है।
बारिश के समय स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाती है। नाले का पानी बढ़ने पर छोटे बच्चों के लिए अकेले इसे पार करना संभव नहीं रहता। ऐसे में परिवार के बड़े सदस्य उन्हें सहारा देकर दूसरी ओर पहुंचाते हैं। कई बार अभिभावकों को बच्चों को कंधे पर बैठाकर या हाथ पकड़कर पानी से बाहर निकालना पड़ता है। जरा सी असावधानी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसके बावजूद शिक्षा जारी रखने के लिए बच्चे हर दिन जोखिम उठाने को मजबूर हैं।
रास्ते की खराब स्थिति का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। तेज बारिश या नाले में अधिक पानी होने पर अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से डरते हैं। इससे विद्यार्थियों की कक्षाएं छूट जाती हैं और पढ़ाई प्रभावित होती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पइन-नाले पर पुलिया बन जाए और गांव तक पक्की सड़क तैयार हो जाए तो बच्चों को स्कूल जाने में सुविधा होगी और बरसात में भी उनकी पढ़ाई नहीं रुकेगी।
गोपाल नगर के लोगों की सबसे बड़ी परेशानी चिकित्सा संबंधी आपात स्थिति में सामने आती है। गांव में किसी गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल ले जाना हो तो परिवार के सदस्यों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो जाती है। सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव के घरों तक नहीं पहुंच पाती। मजबूरन प्रसव पीड़िता को खटिया पर लिटाकर या अन्य अस्थायी साधनों से मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।
परिजनों के लिए यह सफर शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से बेहद कठिन होता है। एक ओर प्रसव पीड़िता की हालत बिगड़ने का डर रहता है तो दूसरी ओर खराब रास्ते तथा पानी से भरे नाले को सुरक्षित पार करने की चुनौती होती है। बारिश, अंधेरा या रात का समय होने पर जोखिम और बढ़ जाता है। अस्पताल पहुंचने में हुई थोड़ी सी देरी जच्चा और बच्चा दोनों के जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
इसी प्रकार बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर रूप से बीमार लोगों को अस्पताल या मुख्य सड़क तक पहुंचाने में भी ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। स्ट्रेचर या वाहन की सुविधा नहीं मिलने पर मरीज को खटिया पर उठाकर ले जाना पड़ता है। कीचड़ भरे रास्ते पर मरीज को लेकर चलना आसान नहीं होता। इस दौरान मरीज के गिरने या उसकी स्थिति और खराब होने का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुलिया के अभाव का असर केवल शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं पर नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और आजीविका पर भी पड़ रहा है। खेती-किसानी से जुड़ी सामग्री, राशन और अन्य जरूरी सामान गांव तक पहुंचाने में अतिरिक्त समय तथा पैसा खर्च होता है। किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में परेशानी होती है। वाहन नहीं आने से उन्हें सामान सिर या साइकिल पर ढोना पड़ता है।
किसी शादी, सामाजिक कार्यक्रम या आपात स्थिति के दौरान भी गांव के लोगों को इसी दुर्गम रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। बरसात में रिश्तेदार और बाहरी लोग गांव पहुंचने से कतराते हैं। बच्चों और युवाओं को पढ़ाई, रोजगार तथा प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित काम के लिए बाहर निकलने में भी दिक्कत होती है। ग्रामीणों का कहना है कि एक छोटी पुलिया और संपर्क सड़क बनने से उनकी कई बड़ी समस्याओं का समाधान हो सकता है।
देश और प्रदेश में सड़क संपर्क बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। ग्रामीण इलाकों को मुख्य मार्गों से जोड़ने और हर मौसम में आवागमन सुनिश्चित करने के दावे भी किए जाते हैं। इसके बावजूद गोपाल नगर के लोगों का सड़क तथा पुलिया की सुविधा से वंचित रहना स्थानीय विकास व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। करीब 800 की आबादी के लिए सुरक्षित आवागमन का रास्ता उपलब्ध कराना उनकी बुनियादी जरूरत है।
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करें। पइन-नाले की चौड़ाई, गहराई और बरसात के पानी के बहाव का तकनीकी आकलन किया जाए। इसके आधार पर सुरक्षित और मजबूत पुलिया का निर्माण कराया जाए। इसके साथ गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए पक्की संपर्क सड़क भी बनाई जाए, ताकि सभी मौसम में एंबुलेंस, स्कूल वाहन तथा अन्य जरूरी गाड़ियां गांव तक पहुंच सकें।
स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। हर बरसात में परेशानी बढ़ जाती है और बारिश समाप्त होने के बाद मामला फिर ठंडा पड़ जाता है। ग्रामीण चाहते हैं कि इस बार केवल आश्वासन देने के बजाय निर्माण कार्य के लिए ठोस योजना बनाई जाए और समय सीमा निर्धारित की जाए।
गोपाल नगर की स्थिति यह दिखाती है कि बुनियादी ढांचे की एक कमी किस तरह पूरे गांव की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। बच्चों का पानी से भरे नाले को पार कर स्कूल जाना और प्रसव पीड़ित महिलाओं को खटिया पर मुख्य सड़क तक पहुंचाना केवल असुविधा नहीं, बल्कि गंभीर मानवीय और विकास संबंधी समस्या है। ग्रामीणों को अब प्रशासन से सड़क और पुलिया के निर्माण की जल्द स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।





