बिहार
अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी से छिना राज्यमंत्री का दर्जा, अब बंगले पर भी संकट
Rajeshwari Nishad
26 Oct 2026 12:35 PM IST

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पटना। बिहार की राजनीति में मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनके परिवार को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को निष्कासित किए जाने के बाद अब नीलम देवी से राज्यमंत्री का दर्जा भी वापस लिए जाने की खबर है। इस कार्रवाई को अनंत सिंह के लिए दूसरा बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। नीलम देवी पूर्व विधायक हैं और बिहार की राजनीति में उनकी अपनी पहचान रही है। लगातार सामने आ रहे इन फैसलों के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
जदयू से निष्कासन के बाद एक और कार्रवाई
मोकामा विधायक अनंत सिंह लंबे समय से बिहार की राजनीति का चर्चित चेहरा रहे हैं। अपने राजनीतिक प्रभाव और विवादों के कारण वह अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। अब उनकी पत्नी नीलम देवी को लेकर सामने आए नए फैसले ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार, पहले अनंत सिंह और नीलम देवी को जदयू से बाहर किए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद नीलम देवी से राज्यमंत्री का दर्जा वापस लेने का फैसला किए जाने की खबर है।इन दोनों घटनाक्रमों को अनंत सिंह परिवार के राजनीतिक प्रभाव के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, कार्रवाई के पीछे की आधिकारिक वजह और संबंधित आदेश का पूरा विवरण सामने आना बाकी है।
नीलम देवी के राजनीतिक कद पर असर
नीलम देवी बिहार विधानसभा की सदस्य रह चुकी हैं। उन्होंने मोकामा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है और अपने पति अनंत सिंह के राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है।राज्यमंत्री का दर्जा वापस लिए जाने की खबर को उनके राजनीतिक कद के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किसी व्यक्ति को दिया गया राज्यमंत्री का दर्जा उसके सरकारी प्रोटोकॉल और उससे जुड़ी सुविधाओं को प्रभावित कर सकता है।हालांकि, नीलम देवी को किस पद के आधार पर यह दर्जा दिया गया था और उसे वापस लेने के बाद कौन-कौन सी सुविधाएं समाप्त होंगी, यह संबंधित सरकारी आदेश से ही स्पष्ट होगा।
20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति से हटाया गया
ताजा जानकारी के अनुसार, नीलम देवी को 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के सदस्य पद से हटा दिया गया है। इसी समिति में उनकी सदस्यता के आधार पर उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था। समिति से हटाए जाने के साथ ही उनका यह दर्जा भी समाप्त हो गया है।बताया जा रहा है कि जदयू की अनुशंसा पर यह कार्रवाई की गई है। इससे पहले 24 अक्टूबर को पार्टी ने अनंत सिंह और नीलम देवी को छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया था।
विधान परिषद चुनाव से शुरू हुआ विवाद
अनंत सिंह और जदयू नेतृत्व के बीच विवाद की मुख्य वजह बिहार विधान परिषद चुनाव बताया जा रहा है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जदयू ने नीरज कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया था।लेकिन अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी का समर्थन करने के बजाय जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार किया। उन्होंने नीरज कुमार के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयानबाजी भी की।पार्टी नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधि माना। इसके बाद अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हो गई।
छह साल के लिए पार्टी से बाहर किए गए अनंत सिंह
जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने 24 अक्टूबर को अनंत सिंह और नीलम देवी के निष्कासन का आदेश जारी किया था।पार्टी ने आरोप लगाया कि अनंत सिंह ने संगठन के निर्देशों की अवहेलना की और वरिष्ठ नेतृत्व के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। साथ ही उन्होंने दूसरे दल के उम्मीदवार के समर्थन में चुनाव प्रचार किया।इन आरोपों के आधार पर दोनों की प्राथमिक सदस्यता छह साल के लिए समाप्त कर दी गई।
अनंत सिंह की विधायकी पर भी मंडरा रहा खतरा
पार्टी से निष्कासन के बाद अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। जदयू ने विधानसभा अध्यक्ष से संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा की है।हालांकि, पार्टी से निष्कासित किए जाने का अर्थ अपने आप विधानसभा सदस्यता समाप्त होना नहीं है। इसके लिए संवैधानिक प्रक्रिया और संबंधित प्राधिकारी का निर्णय आवश्यक है।ताजा जानकारी के अनुसार, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा है कि आधिकारिक पत्र प्राप्त होने के बाद उसकी समीक्षा की जाएगी और कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। फिलहाल अनंत सिंह की विधायकी समाप्त होने का कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
सरकारी बंगले पर भी संकट के बादल
नीलम देवी का राज्यमंत्री दर्जा समाप्त होने के बाद उनके सरकारी आवास को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।बताया जा रहा है कि उन्हें पद के आधार पर पटना में सरकारी आवास की सुविधा मिली हुई थी। अब पद समाप्त होने के बाद इस आवास की पात्रता की समीक्षा हो सकती है।हालांकि, सरकारी बंगला खाली कराने को लेकर अभी किसी अंतिम आदेश की पुष्टि नहीं हुई है। यदि संबंधित विभाग आवास आवंटन समाप्त करता है, तो नियमानुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
मोकामा की राजनीति में अनंत सिंह का प्रभाव
अनंत सिंह बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। मोकामा विधानसभा क्षेत्र में उनका राजनीतिक प्रभाव रहा है और समर्थकों के बीच उन्हें 'छोटे सरकार' के नाम से भी जाना जाता है।साल 2022 में उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद उनकी पत्नी नीलम देवी ने उपचुनाव में जीत हासिल की थी। बाद में नीलम देवी ने राजनीतिक समीकरण बदलते हुए 2024 में एनडीए का समर्थन किया।अब जदयू से निष्कासन और राज्यमंत्री दर्जा समाप्त होने के बाद दोनों के राजनीतिक भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
आगे क्या होगा अनंत सिंह का राजनीतिक भविष्य?
अनंत सिंह के सामने फिलहाल दो प्रमुख राजनीतिक चुनौतियां हैं। पहली चुनौती जदयू से निष्कासन के बाद अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत बनाए रखने की है। दूसरी चुनौती विधानसभा सदस्यता को लेकर शुरू हुई प्रक्रिया से जुड़ी है।वहीं, नीलम देवी को 20 सूत्री समिति से हटाए जाने के बाद परिवार का एक महत्वपूर्ण सरकारी दर्जा भी समाप्त हो गया है।
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