बिहार

हिजाब विवाद के बीच AYUSH डॉक्टर नुसरत परवीन अभी तक नहीं हुई तिब्बी कॉलेज में शामिल

SHIDDHANT
20 Dec 2025 10:37 PM IST
हिजाब विवाद के बीच AYUSH डॉक्टर नुसरत परवीन अभी तक नहीं हुई तिब्बी कॉलेज में शामिल
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Bihar बिहार: हिजाब विवाद की गूंज अब स्वास्थ्य क्षेत्र तक पहुँच गई है। नुसरत परवीन, वह AYUSH डॉक्टर जिनका हिजाब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में हटाया था, आज दोपहर 2 बजे तक पटना के सरकारी तिब्बी कॉलेज और अस्पताल में ड्यूटी जॉइन करने वाली थीं। हालांकि, उनकी अनुपस्थिति ने प्रशासन और मीडिया में नई चर्चाओं को जन्म दिया है। सिविल सर्जन अविनाश कुमार सिंह ने कहा कि नुसरत परवीन अस्पताल में ड्यूटी के लिए आएंगी और फिलहाल वह किसी कारणवश विलंब कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, "वह जुड़ेंगी, क्यों नहीं आएंगी। हमारी उम्मीद है कि शीघ्र ही वह तैनाती में शामिल होंगी।"
घटना ने राज्य में धार्मिक पोशाक और सरकारी कार्यालयों में पहनावे को लेकर बहस को नया आयाम दे दिया है। नुसरत परवीन का हिजाब विवाद पिछले सप्ताह तब शुरू हुआ था, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उनका हिजाब हटाया था। इसके बाद राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर विरोध और समर्थन दोनों ही तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नुसरत परवीन की अनुपस्थिति अस्पताल की दैनिक
कार्यवाही
पर असर डाल सकती है, क्योंकि वह एक प्रशिक्षित AYUSH चिकित्सक हैं और उनके आने से विभिन्न चिकित्सा सेवाओं का संचालन सुचारू रूप से होगा। अधिकारियों ने यह भी कहा कि उनकी ड्यूटी का पालन सरकारी आदेशों और अस्पताल के नियमों के तहत सुनिश्चित किया जाएगा।
इस विवाद ने मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर भी काफी ध्यान खींचा है। लोग इस मामले को धार्मिक स्वतंत्रता, महिला अधिकार और सरकारी नियमों के परिप्रेक्ष्य में देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना बिहार में सरकारी कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में पहनावे और धार्मिक पहचान के मुद्दों को लेकर गहन बहस को जन्म दे सकती है। नुसरत परवीन की ड्यूटी रिपोर्टिंग को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियां की गई हैं। अस्पताल में उनके आने पर आवश्यक स्वास्थ्य सुरक्षा और कार्यप्रणाली सुनिश्चित की जाएगी। अस्पताल के अन्य स्टाफ और चिकित्सक भी इस स्थिति के प्रति सतर्क हैं।
इससे पहले, नुसरत परवीन की तैनाती को लेकर अधिकारियों ने कहा था कि राज्य सरकार की ओर से सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा। अब तक उनके अस्पताल न पहुँचने के कारण प्रशासन और मीडिया दोनों ही इस पर नजर बनाए हुए हैं। सिविल सर्जन ने सभी मरीजों और नागरिकों से अपील की है कि वह इस मामले को लेकर अनावश्यक अफवाहों में न फंसें और स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि डॉक्टर शीघ्र ही अपने कार्यस्थल पर उपस्थित होंगी और सभी चिकित्सा सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध होंगी।
यह मामला बिहार में धार्मिक पहचान, सरकारी तैनाती और महिला कर्मचारियों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को उजागर करता है। जैसे ही नुसरत परवीन अस्पताल में शामिल होंगी, यह विवाद एक नई दिशा में जाएगा, और सामाजिक व प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण साबित होगा।
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