बिहार

गोपालगंज में अवैध हिरासत और वसूली का आरोप, पूर्व थानाध्यक्ष समेत चार गिरफ्तार

Kavita2
20 Aug 2026 5:20 PM IST

गोपालगंज। बिहार के गोपालगंज जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। अवैध तरीके से लोगों को हिरासत में रखने और उन्हें छोड़ने के एवज में कथित तौर पर पैसे मांगने के आरोप में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में एक पूर्व थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिसकर्मियों और एक कथित बिचौलिए को गिरफ्तार किया गया है। शिकायत सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू की थी, जिसमें कई गंभीर आरोपों की पुष्टि होने की बात सामने आई है।

गोपालगंज एसपी विनय तिवारी के अनुसार, जांच में यह सामने आया कि 14 और 15 अगस्त को एक महिला और उसकी नाबालिग बेटी समेत कुल पांच लोगों को करीब 36 घंटे तक थाने के परिसर में कथित तौर पर रखा गया। आरोप है कि इन लोगों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना हिरासत में रखा गया और बाद में रिहाई के लिए पैसों की मांग की गई।

36 घंटे तक थाने में रखने का आरोप

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले की शिकायत मिलने के बाद पूरे घटनाक्रम की जांच कराई गई। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि पांच लोगों को किस आधार पर थाने लाया गया था और उन्हें इतने लंबे समय तक हिरासत में रखने की क्या वजह थी।

आरोप है कि महिला और उसकी नाबालिग बेटी सहित पांच लोगों को करीब 36 घंटे तक थाने में रखा गया। इस दौरान उनके परिजनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। मामले में पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सवाल उठने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच शुरू की।

जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने संबंधित पुलिसकर्मियों और कथित बिचौलिए के खिलाफ कार्रवाई की। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है।

रिहाई के बदले पैसे मांगने का आरोप

मामले का सबसे गंभीर पहलू हिरासत में लिए गए लोगों की कथित रिहाई के बदले पैसे मांगने से जुड़ा है। शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि पुलिसकर्मियों की ओर से रिहाई के लिए रकम की मांग की गई।

इस आरोप के बाद जांच अधिकारियों ने यह पता लगाने की कोशिश की कि कथित रूप से पैसों की मांग किसके माध्यम से की गई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। इसी क्रम में एक कथित बिचौलिए की भूमिका भी सामने आई, जिसे बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस अधिकारियों ने कार्रवाई के बाद स्पष्ट किया कि मामले में किसी भी स्तर पर कानून का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पूर्व थानाध्यक्ष की भूमिका भी जांच के घेरे में

मामले में एक पूर्व थानाध्यक्ष की गिरफ्तारी ने पुलिस महकमे में भी चर्चा पैदा कर दी है। थाने के स्तर पर होने वाली कार्रवाई की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारी पर होती है। ऐसे में हिरासत से जुड़े आरोपों में पूर्व थानाध्यक्ष की भूमिका की भी जांच की गई।

अधिकारियों ने यह जानने का प्रयास किया कि पांच लोगों को थाने में रखने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया था और इस दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं। इसके साथ ही रिहाई के लिए कथित तौर पर पैसे मांगने के मामले में पुलिसकर्मियों के बीच किसी प्रकार के समन्वय की भी जांच की जा रही है।

महिला और नाबालिग की हिरासत पर गंभीर सवाल

मामले में एक महिला और उसकी नाबालिग बेटी के शामिल होने के कारण यह घटना और गंभीर हो गई है। किसी महिला और नाबालिग को पुलिस हिरासत में लेने के लिए कानूनी प्रक्रिया और सुरक्षा संबंधी प्रावधानों का पालन करना जरूरी होता है।

करीब 36 घंटे तक थाने में रखे जाने के आरोप ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। जांच अधिकारियों के सामने यह भी महत्वपूर्ण बिंदु है कि नाबालिग को किस परिस्थिति में थाने लाया गया और उसके साथ निर्धारित प्रक्रिया के तहत व्यवहार किया गया या नहीं।

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

मामला सामने आने के बाद शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच शुरू कराई। जांच के दौरान संबंधित पुलिसकर्मियों से पूछताछ की गई और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई गई।

अधिकारियों ने यह भी पता लगाने का प्रयास किया कि पांचों लोगों को थाने लाने और वहां रखने के दौरान कौन-कौन से पुलिसकर्मी मौजूद थे। इसके अलावा कथित बिचौलिए की भूमिका और पुलिसकर्मियों के साथ उसके संपर्क की भी जांच की गई।

पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर पुलिस हिरासत और थानों में आम लोगों के साथ व्यवहार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का काम कानून के मुताबिक कार्रवाई करना और लोगों के अधिकारों की रक्षा करना है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में रखा जाता है या रिहाई के बदले पैसे मांगे जाते हैं, तो यह गंभीर आरोप माना जाता है।

गोपालगंज पुलिस की ओर से की गई गिरफ्तारी को इसी मामले में कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, आरोपों की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

एसपी विनय तिवारी के मुताबिक, मामले की जांच जारी है और सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। चार लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस घटनाक्रम में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा हिरासत में रखे गए पांच लोगों के साथ कथित तौर पर क्या-क्या हुआ। मामले ने गोपालगंज पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर चर्चा जरूर छेड़ दी है।

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