
पटना। बिहार विधान परिषद चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी पर मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए पैसे बांटने का गंभीर आरोप लगाया है। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें जन सुराज पार्टी की प्रचार सामग्री के साथ 500 रुपये के नोटों की गड्डियां दिखाई दे रही हैं। प्रचार सामग्री पर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर और तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी उम्मीदवार श्याम नंदन यादव की तस्वीर भी नजर आ रही है। भाजपा ने इस मामले की जांच कराने की मांग चुनाव आयोग से की है। वहीं प्रशांत किशोर और जन सुराज पार्टी ने आरोपों को खारिज करते हुए वायरल तस्वीर को फर्जी बताया है। फिलहाल तस्वीर की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जन सुराज के पर्चे के साथ नोटों की गड्डियों की तस्वीर वायरल
बिहार विधान परिषद चुनाव के बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीर ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। इस तस्वीर में कथित रूप से जन सुराज पार्टी की प्रचार सामग्री के साथ 500 रुपये के नोटों की कई गड्डियां रखी दिखाई दे रही हैं।
प्रचार सामग्री पर प्रशांत किशोर और तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के उम्मीदवार श्याम नंदन यादव की तस्वीर होने की बात सामने आई है।
भाजपा का आरोप है कि चुनाव में मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए नकदी का इस्तेमाल किया जा रहा है। पार्टी ने वायरल तस्वीर को गंभीर विषय बताते हुए इसकी जांच कराने की मांग उठाई है।
हालांकि, केवल तस्वीर में नोटों की गड्डियां दिखाई देने से यह प्रमाणित नहीं होता कि मतदाताओं को पैसे बांटे गए हैं। तस्वीर कब, कहां और किन परिस्थितियों में ली गई, इसकी पुष्टि होना बाकी है।
भाजपा नेता दानिश इकबाल ने उठाए सवाल
भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने शनिवार को इस मामले में बयान जारी कर जन सुराज पार्टी पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि जन सुराज की प्रचार सामग्री के साथ नोटों की गड्डियों की तस्वीर सामने आना गंभीर चिंता का विषय है।
दानिश इकबाल ने आशंका जताई कि चुनाव के दौरान नकदी के माध्यम से मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक चुनाव में वोट के बदले पैसे देने जैसी गतिविधियों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
भाजपा नेता ने चुनाव आयोग से वायरल तस्वीर की सत्यता की जांच कराने और नोटों के स्रोत का पता लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि चुनाव में पैसे के इस्तेमाल का आरोप सही पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रशांत किशोर ने भाजपा पर किया पलटवार
भाजपा के आरोपों के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी प्रतिक्रिया दी है। नालंदा में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा की आर्थिक ताकत पर सवाल उठाए।
प्रशांत किशोर ने कहा कि भाजपा केंद्र और बिहार की सत्ता में है तथा उसके बड़े उद्योगपतियों से संबंध हैं। इसके बावजूद पैसे बांटने का आरोप जन सुराज के उम्मीदवार पर लगाया जा रहा है।
उन्होंने भाजपा के आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए सवाल उठाया कि वास्तविकता की जांच किए बिना जन सुराज पार्टी को क्यों निशाना बनाया जा रहा है।
प्रशांत किशोर की प्रतिक्रिया के बाद दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं।
जन सुराज ने वायरल तस्वीर को बताया फर्जी प्रचार
जन सुराज पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ ने भी भाजपा के आरोपों को खारिज किया है।
उन्होंने दावा किया कि वायरल तस्वीर जन सुराज पार्टी की छवि खराब करने के उद्देश्य से फैलाए जा रहे दुष्प्रचार का हिस्सा है।
कुमार सौरभ ने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगी राजनीतिक कारणों से जन सुराज को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
पार्टी का कहना है कि चुनाव के दौरान ऐसे आरोप लगाकर मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि, जन सुराज के इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वायरल तस्वीर की वास्तविकता और उससे जुड़े तथ्यों का पता जांच से ही चल सकेगा।
चुनाव आयोग से निष्पक्ष जांच की मांग
इस पूरे विवाद में भाजपा ने चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी चाहती है कि वायरल तस्वीर की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि नोटों की गड्डियां किसकी थीं और उनका चुनाव प्रचार से कोई संबंध था या नहीं।
चुनाव में मतदाताओं को पैसे या अन्य प्रलोभन देकर प्रभावित करना चुनावी नियमों और संबंधित कानूनों का उल्लंघन हो सकता है।
यदि किसी उम्मीदवार या राजनीतिक दल द्वारा मतदाताओं को नकदी देने के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई संभव है।
लेकिन इसके लिए आरोपों का साक्ष्यों के आधार पर सत्यापन आवश्यक है।
अभी उपलब्ध जानकारी में चुनाव आयोग द्वारा इस विशेष मामले में किसी जांच का निष्कर्ष जारी किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में चुनावी मुकाबला तेज
बिहार विधान परिषद के तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।
इस सीट पर भाजपा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और जन सुराज पार्टी के बीच चुनावी मुकाबला है।
जन सुराज ने श्याम नंदन यादव को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देते हुए चुनाव प्रचार कर रही है।
वहीं अन्य दल भी अपने उम्मीदवारों के समर्थन में राजनीतिक गतिविधियां चला रहे हैं।
इसी चुनावी माहौल में नोटों की गड्डियों वाली तस्वीर सामने आने से विवाद बढ़ गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर की सत्यता पर सवाल
राजनीतिक विवाद का प्रमुख आधार सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर है। लेकिन इसकी प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होने के कारण कई सवाल बने हुए हैं।
तस्वीर किसने ली, इसे सबसे पहले किस सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया गया और इसमें दिखाई गई नकदी का वास्तविक स्रोत क्या है, ये सभी पहलू जांच का विषय हैं।
यह स्पष्ट होना भी जरूरी है कि तस्वीर में दिखाई गई प्रचार सामग्री और नोटों का आपस में कोई वास्तविक संबंध है या उन्हें केवल एक साथ रखकर तस्वीर ली गई है।
डिजिटल सामग्री की जांच के बिना किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज
बिहार विधान परिषद चुनाव से पहले भाजपा और जन सुराज के बीच यह विवाद राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
एक ओर भाजपा ने मतदाताओं को नकदी से प्रभावित करने की आशंका जताते हुए चुनाव आयोग से जांच की मांग की है, वहीं दूसरी ओर जन सुराज पार्टी ने आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
प्रशांत किशोर ने भी भाजपा पर पलटवार करते हुए उसके आरोपों की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
फिलहाल इस मामले में किसी भी दल द्वारा पैसे बांटे जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में चुनाव आयोग या सक्षम जांच एजेंसी की पड़ताल से ही वायरल तस्वीर और उससे जुड़े आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।





