बिहार

सरसों तेल से मिठाइयों तक मिलावट का आरोप

Kavita2
15 Sept 2026 4:17 PM IST
सरसों तेल से मिठाइयों तक मिलावट का आरोप
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नवादा। जिले में खाद्य सामग्री में कथित मिलावट की शिकायतों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सरसों तेल से लेकर आटा, दाल, मसाला, पनीर, खोवा और मिठाइयों तक की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। त्योहारों का मौसम शुरू होने के साथ बाजार में खाद्य वस्तुओं की मांग बढ़ रही है। इसी बीच कम कीमत पर उपलब्ध सामान और बिना स्पष्ट पहचान वाले उत्पादों की बिक्री को लेकर नियमित जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।

जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण बाजारों तक किराना दुकानों, जनरल स्टोर, मिलों और मिठाई की दुकानों पर विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्री बेची जा रही है। स्थानीय स्तर पर शिकायत है कि कुछ स्थानों पर शुद्धता और गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। हालांकि किन दुकानों या प्रतिष्ठानों में मिलावटी सामग्री मिली है, इसकी आधिकारिक और विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में सभी दुकानदारों या उत्पादों को मिलावटी बताना उचित नहीं होगा।

सबसे अधिक शिकायतें सरसों तेल में मिलावट को लेकर सामने आ रही हैं। आरोप है कि महंगे सरसों तेल में सस्ता पाम ऑयल मिलाकर उसे रंग देने के बाद बाजार में बेचा जाता है। इससे तेल सरसों तेल जैसा दिखाई दे सकता है और सामान्य ग्राहक के लिए उसकी वास्तविक गुणवत्ता पहचानना कठिन हो जाता है। इन शिकायतों की पुष्टि प्रयोगशाला में नमूनों की जांच के बाद ही हो सकती है।

बाजार में सरसों तेल की अलग-अलग कीमतों ने भी ग्राहकों को उलझन में डाल रखा है। एक ही तरह के बताए जाने वाले तेल के मूल्य में काफी अंतर दिखाई देने पर उसकी गुणवत्ता को लेकर संदेह पैदा होता है। कम कीमत देखकर कई ग्राहक सामान खरीद लेते हैं, लेकिन वे पैकेट पर लिखी जरूरी जानकारियों, निर्माण और इस्तेमाल की अवधि तथा निर्माता के विवरण पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते।

मसालों की शुद्धता को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं। हल्दी, मिर्च, धनिया और दूसरे पिसे मसालों में रंग या अन्य सस्ती सामग्री मिलाए जाने की आशंका जताई जा रही है। खुले मसालों की गुणवत्ता पहचानना आम ग्राहक के लिए कठिन होता है। रंग और खुशबू के आधार पर शुद्धता का सही आकलन हमेशा संभव नहीं होता। इसलिए ऐसे उत्पादों के नमूने लेकर अधिकृत प्रयोगशाला में जांच कराने की मांग की जा रही है।

आटा और दाल जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध कुछ वस्तुओं की पैकिंग तथा स्रोत के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं रहती। मिलों और दुकानों में बिकने वाली सामग्री की नियमित जांच नहीं होने की शिकायत भी की जा रही है। ग्राहकों का कहना है कि जांच अभियान केवल त्योहारों तक सीमित न रहकर पूरे वर्ष चलना चाहिए।

त्योहारी मौसम में पनीर, खोवा और मिठाइयों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। मांग बढ़ने पर कम समय में अधिक उत्पादन और बिक्री का दबाव रहता है। इसी कारण इन खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंका को लेकर लोग अधिक चिंतित हैं। पनीर और खोवा जैसे उत्पाद जल्द खराब होने वाले होते हैं। इनके निर्माण, भंडारण और बिक्री के दौरान स्वच्छता तथा उचित तापमान का ध्यान रखना भी जरूरी होता है।

शहर के साथ ग्रामीण बाजारों में भी मिठाई की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ने लगी है। लोग पूजा, पारिवारिक आयोजनों और उपहार के लिए बड़ी मात्रा में मिठाइयां खरीदते हैं। ऐसे समय में यदि कच्चे माल की गुणवत्ता खराब हो या तैयार सामान को असुरक्षित परिस्थितियों में रखा जाए तो उपभोक्ताओं की सेहत प्रभावित हो सकती है। इसीलिए मिठाई, खोवा और पनीर के नमूनों की जांच की मांग तेज हो रही है।

जानकारी के अभाव में ग्राहक भी सस्ते सामान की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कई बार लोग बिना बिल लिए सामान खरीद लेते हैं, जिससे बाद में शिकायत करना मुश्किल हो सकता है। खुले और बिना पहचान वाले उत्पादों के मामले में निर्माता तथा सामग्री का विवरण भी नहीं मिल पाता। उपभोक्ताओं को खरीदारी के समय पैकेट की सील, लेबल, निर्माण और उपयोग की अवधि तथा विक्रेता की विश्वसनीयता पर ध्यान देने की जरूरत है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा से संबंधित विभाग को बाजारों में नियमित रूप से नमूने लेने चाहिए। जांच में मानकों के विपरीत पाए जाने वाले उत्पादों के बारे में उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। इसके साथ ही संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की जा रही है। जांच रिपोर्ट सामने आने से शिकायतों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर भी स्पष्ट हो सकेगा।

ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है। कई ग्राहक यह नहीं जानते कि संदिग्ध खाद्य सामग्री मिलने पर शिकायत कहां और किस प्रकार करनी है। प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम चलाने पर लोग मिलावट के संभावित संकेतों, सुरक्षित खरीदारी और शिकायत की प्रक्रिया को समझ सकेंगे।

व्यापारियों की भी जिम्मेदारी है कि वे प्रमाणित स्रोतों से सामग्री खरीदें और भंडारण के नियमों का पालन करें। दुकानों पर साफ-सफाई रखने तथा खराब या अवधि समाप्त हो चुके उत्पादों को बिक्री से हटाने की जरूरत है। उपभोक्ताओं का भरोसा बनाए रखने के लिए दुकानदारों को सामान की गुणवत्ता और स्रोत से संबंधित जानकारी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध करानी चाहिए।

फिलहाल खाद्य सामग्री में मिलावट से जुड़ी शिकायतों की आधिकारिक जांच और नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट सामने आना बाकी है। यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित विभाग ने कितने प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया या कितने नमूने एकत्र किए हैं। त्योहारों से पहले बाजारों में नियमित जांच, उपभोक्ता जागरूकता और संदिग्ध उत्पादों की प्रयोगशाला जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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