
जमुई। बिहार के जमुई जिले के सोनो अंचल में जमीन की जमाबंदी ऑनलाइन कराने के नाम पर कथित रिश्वत लेने का मामला सामने आया है। आरोप है कि राजस्व कर्मचारी ने काम कराने के बदले ढाई लाख रुपये की मांग की और राशि अपने बेटे के बैंक खाते में ऑनलाइन जमा कराई गई। मामला सामने आने के बाद शिकायतकर्ता ने इसकी शिकायत उद्योग एवं खेल मंत्री श्रेयसी सिंह समेत कई अधिकारियों से की है। वहीं, अंचल प्रशासन ने आरोपित राजस्व कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगा है।
जानकारी के अनुसार, सोनो अंचल की बाबूडीह पंचायत में पदस्थापित राजस्व कर्मचारी छोटेलाल यादव पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है। लालपुर निवासी अशोक कुमार सिंह ने अंचलाधिकारी को दिए आवेदन में बताया कि डोकली गांव स्थित उनके परिवार की पैतृक जमीन की ऑफलाइन जमाबंदी को ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए वह पिछले करीब दो वर्षों से अंचल कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमाबंदी ऑनलाइन कराने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उनसे रिश्वत की मांग की गई। आरोप के मुताबिक, पहले एक लाख रुपये नकद लिए गए, जबकि बाद में डेढ़ लाख रुपये राजस्व कर्मचारी के पुत्र संतोष राज के बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कराए गए। शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन के साथ ऑनलाइन भुगतान की रसीद भी संलग्न करने का दावा किया है।
अशोक कुमार सिंह ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकारी कार्य को पूरा कराने के लिए उनसे अवैध रूप से पैसे लिए गए। उन्होंने दोषी पाए जाने पर संबंधित राजस्व कर्मचारी को पद से हटाने, रिश्वत की पूरी राशि वापस दिलाने और विभागीय कार्रवाई करने की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत की प्रतिलिपि बिहार सरकार के उद्योग एवं खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल और जमुई जिलाधिकारी को भी भेजी है। मंत्री और अधिकारियों तक शिकायत पहुंचने के बाद प्रशासनिक स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया गया है।
वहीं, आरोपित राजस्व कर्मचारी छोटेलाल यादव ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत और निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि उन पर दबाव बनाकर गलत कार्य कराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने रिश्वत लेने के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि मामले की जांच में वास्तविकता सामने आ जाएगी।
इस मामले में सोनो की अंचलाधिकारी निकिता अग्रवाल ने बताया कि राजस्व कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उनका जवाब मिलने के बाद पूरे मामले की जानकारी वरीय अधिकारियों को दी जाएगी और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बिहार में जमीन से जुड़े कामों को लेकर पहले भी भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती रही हैं। सरकार की ओर से जमीन रिकॉर्ड को डिजिटल करने और जमाबंदी को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया शुरू की गई है, ताकि लोगों को कार्यालयों के चक्कर कम लगाने पड़ें। हालांकि, इस तरह के आरोपों से ऑनलाइन व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासन अब यह जांच करेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। यदि जांच में रिश्वत लेने की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, अगर आरोप गलत पाए जाते हैं तो मामले की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल सभी की नजरें प्रशासनिक जांच और राजस्व कर्मचारी के स्पष्टीकरण पर टिकी हुई हैं।





