
बांका। चांदन नदी रेलवे पुल के समीप सोमवार सुबह एक 30 वर्षीय युवक का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान सहरसा जिले के सोनवर्षा कचहरी थाना क्षेत्र के दिवारी गांव निवासी रूपेश कुमार के रूप में हुई है। वह पेशे से वाहन चालक था। रूपेश चार सितंबर को बोलेरो लेकर देवघर जाने की बात कहकर घर से निकला था, लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटा। अब उसका शव रेलवे पुल के पास मिलने के बाद मौत की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
सोमवार सुबह स्थानीय लोगों ने चांदन नदी रेलवे पुल के आसपास एक युवक का शव देखा। इसके बाद इसकी सूचना पुलिस को दी गई। जानकारी मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल की जांच शुरू की।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पहचान कराने का प्रयास किया। बाद में सूचना मिलने पर पहुंचे परिजनों ने मृतक की पहचान रूपेश कुमार के रूप में की। रूपेश की उम्र करीब 30 वर्ष थी और उसके पिता का नाम मणीकांत यादव बताया गया है।
रूपेश सहरसा जिले के दिवारी गांव का रहने वाला था। वह वाहन चलाकर अपनी आजीविका चलाता था। परिजनों के मुताबिक चार सितंबर को वह बोलेरो लेकर घर से निकला था। उसने घर वालों से देवघर जाने की बात कही थी।
परिवार को उम्मीद थी कि काम पूरा करने के बाद वह वापस लौट आएगा, लेकिन निर्धारित समय गुजरने के बावजूद रूपेश घर नहीं पहुंचा। उसका कोई पता नहीं चलने से परिवार के लोगों की चिंता बढ़ती गई।
इसके बाद सोमवार सुबह चांदन नदी रेलवे पुल के पास शव मिलने की खबर सामने आई। परिजनों को जब इसकी जानकारी मिली तो वे घटनास्थल पर पहुंचे। शव देखने के बाद उन्होंने उसकी पहचान रूपेश के रूप में की।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि चार सितंबर को घर से निकलने के बाद रूपेश के साथ क्या हुआ। वह देवघर पहुंचा था या नहीं और आखिरी बार उसे कहां देखा गया था, इसकी जानकारी जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
पुलिस रूपेश की मौत के कारणों का पता लगाने में जुटी है। शव की स्थिति और घटनास्थल से मिले संभावित साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के कारण और अनुमानित समय के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
इस मामले में रूपेश जिस बोलेरो को लेकर घर से निकला था, उसकी स्थिति भी जांच का अहम हिस्सा हो सकती है। वाहन कहां है और रूपेश से वह आखिरी बार कब तक जुड़ा हुआ था, इसका पता चलने पर उसके घर से निकलने के बाद के घटनाक्रम को समझने में मदद मिलेगी।
पुलिस यह भी पता लगा सकती है कि रूपेश बोलेरो लेकर अकेला निकला था या उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति मौजूद था। यदि उसने देवघर जाने के लिए किसी यात्री या परिचित को वाहन में बैठाया था तो उसकी जानकारी भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
रूपेश के मोबाइल फोन और कॉल से संबंधित जानकारी भी जांच को दिशा दे सकती है। घर से निकलने के बाद उसने किन लोगों से बातचीत की और आखिरी बार उसका फोन कब सक्रिय था, इससे उसकी अंतिम गतिविधियों की समयरेखा तैयार करने में मदद मिल सकती है।
चांदन नदी रेलवे पुल के पास शव मिलने के कारण यह भी जांच का विषय है कि युवक वहां कैसे पहुंचा। उसकी मौत उसी स्थान पर हुई या शव किसी अन्य स्थान से वहां पहुंचा, इसका निर्धारण घटनास्थल की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर किया जा सकेगा।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि युवक की मौत किसी दुर्घटना में हुई, उसके साथ कोई आपराधिक घटना हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण है। जांच पूरी होने से पहले किसी संभावना को निश्चित तौर पर सही नहीं माना जा सकता।
पुलिस घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों से भी जानकारी जुटा सकती है। यदि किसी व्यक्ति ने रविवार रात या सोमवार सुबह रेलवे पुल के आसपास रूपेश या किसी संदिग्ध गतिविधि को देखा हो तो उसका बयान महत्वपूर्ण हो सकता है।
रेलवे पुल के आसपास सीसीटीवी कैमरे उपलब्ध होने की स्थिति में उनकी फुटेज भी खंगाली जा सकती है। इसके अलावा आसपास की सड़कों, पेट्रोल पंपों या व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कैमरों से भी बोलेरो और रूपेश की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलने की संभावना हो सकती है।
परिवार के लिए रूपेश की मौत की खबर गहरा सदमा लेकर आई है। चार सितंबर को वह सामान्य तरीके से घर से निकला था। परिवार को उम्मीद थी कि वह देवघर से अपना काम पूरा कर वापस लौट आएगा, लेकिन तीन दिन बाद उसकी मौत की खबर मिली।
रूपेश पेशे से चालक था, इसलिए उसका अलग-अलग जगहों पर वाहन लेकर जाना सामान्य बात हो सकती थी। यही कारण है कि शुरुआत में परिवार ने उसके लौटने का इंतजार किया होगा। लेकिन संपर्क नहीं होने और लंबे समय तक घर नहीं लौटने से चिंता बढ़ती गई।
अब पुलिस के सामने घर से निकलने के बाद से शव मिलने तक के समय की पूरी कड़ी जोड़ने की चुनौती है। रूपेश ने चार सितंबर को घर से निकलने के बाद कौन सा रास्ता लिया, रास्ते में कहां रुका और किन लोगों से मिला, इन सवालों के जवाब उसकी मौत की गुत्थी सुलझाने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
यदि बोलेरो का पता चलता है तो वाहन की जांच भी की जा सकती है। वाहन के अंदर कोई संदिग्ध वस्तु, दस्तावेज या अन्य साक्ष्य मिलने की स्थिति में मामले को नई दिशा मिल सकती है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस जांच का सबसे महत्वपूर्ण आधार होगी। इससे शरीर पर चोटों, मौत के संभावित कारण और अन्य चिकित्सकीय तथ्यों की जानकारी मिल सकेगी। उसके बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मामला दुर्घटना से जुड़ा है या पुलिस को किसी अन्य दिशा में जांच आगे बढ़ानी चाहिए।
फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। परिजनों से भी रूपेश की गतिविधियों और उसके संपर्क में रहने वाले लोगों के बारे में जानकारी ली जा सकती है।
चांदन नदी रेलवे पुल के पास मिले शव ने रूपेश के परिवार के सामने कई सवाल छोड़ दिए हैं। चार सितंबर को देवघर जाने की बात कहकर बोलेरो लेकर निकला 30 वर्षीय चालक आखिर तीन दिन तक कहां था और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका जवाब अब जांच से मिलने की उम्मीद है।





