
पटना। बच्चों की आंखों में दिखाई देने वाली कुछ असामान्य चीजें किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती हैं। अगर बच्चे की आंख में सफेद चमक दिखाई दे, पुतली के रंग में बदलाव नजर आए या दोनों आंखों की दिशा अलग-अलग दिखे तो अभिभावकों को सतर्क हो जाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, ये लक्षण रेटिनोब्लास्टोमा नामक आंख के कैंसर की ओर इशारा कर सकते हैं। समय पर बीमारी की पहचान और इलाज शुरू होने से बच्चे की आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है और उसकी जान को भी खतरे से बचाया जा सकता है।
इसी जागरूकता को बढ़ाने के उद्देश्य से इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) पटना के क्षेत्रीय चक्षु संस्थान में रेटिनोब्लास्टोमा को लेकर एक विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बच्चों में होने वाले इस गंभीर रोग के लक्षण, जांच और आधुनिक उपचार पद्धतियों के बारे में जानकारी दी।
संगोष्ठी में रेटिनोब्लास्टोमा से जंग जीत चुके 10 बच्चे अपने माता-पिता के साथ शामिल हुए। इन बच्चों ने अपनी हिम्मत और सकारात्मक सोच से बीमारी से जूझ रहे अन्य बच्चों और उनके परिवारों का हौसला बढ़ाया। विशेषज्ञों ने बताया कि सही समय पर इलाज मिलने पर रेटिनोब्लास्टोमा से पीड़ित कई बच्चों को स्वस्थ जीवन दिया जा सकता है।
चिकित्सकों के अनुसार, रेटिनोब्लास्टोमा बच्चों में होने वाला आंख का एक प्रकार का कैंसर है, जो मुख्य रूप से आंख की रेटिना में विकसित होता है। यह बीमारी सामान्य रूप से पांच साल से कम उम्र के बच्चों में अधिक देखी जाती है। शुरुआत में इसके लक्षणों को पहचानना मुश्किल हो सकता है, लेकिन आंख में सफेद चमक इसका सबसे प्रमुख संकेत माना जाता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि कई बार अभिभावक बच्चों की आंख में दिखने वाले बदलाव को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही बीमारी को गंभीर बना सकती है। अगर समय रहते जांच करा ली जाए तो इलाज के बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों की आंखों में किसी भी असामान्य बदलाव को गंभीरता से लें।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में वैज्ञानिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें दिल्ली से आईं विशेषज्ञ डॉ. सीमा ने रेटिनोब्लास्टोमा की जांच और इलाज में हो रहे नए बदलावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आधुनिक जांच तकनीकों और बेहतर उपचार विकल्पों की मदद से अब इस बीमारी से लड़ना पहले की तुलना में आसान हुआ है।
विशेषज्ञों ने कहा कि बिहार में बच्चों के कैंसर इलाज की सुविधाओं में पहले के मुकाबले काफी सुधार हुआ है। अब सबसे बड़ी जरूरत बीमारी की जल्द पहचान और सही समय पर उपचार शुरू करने की है। शुरुआती अवस्था में बीमारी पकड़ में आने पर बच्चे की आंख बचाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
कार्यक्रम में कैंसर से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को मानसिक और सामाजिक सहयोग देने पर भी जोर दिया गया। राज्यसभा सांसद धर्मशीला गुप्ता ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि कैंसर पीड़ित बच्चों के इलाज, पुनर्वास और परिवारों की सहायता के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. बिंदे कुमार, डीन एकेडमिक डॉ. ओम कुमार, स्टेट कैंसर संस्थान के प्रमुख डॉ. राजेश कुमार समेत कई चिकित्सक मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ऋचा माधवी और डॉ. एमएस अली ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने दिया।
चिकित्सकों ने एक बार फिर अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों की आंखों में सफेद चमक, पुतली के रंग में बदलाव, आंखों का तिरछापन या देखने में परेशानी जैसे लक्षण नजर आएं तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें। जागरूकता और समय पर जांच ही इस गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।





