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सीने पर 21 कलश, 9 दिन निर्जला व्रत
पटना : बिहार के दरभंगा में शारदीय नवरात्र के दौरान नागेश्वर दास अपनी अनोखी साधना और अटूट आस्था को लेकर चर्चा में हैं। वह पिछले करीब 30 वर्षों से मां दुर्गा की आराधना कर रहे हैं। नवरात्र के नौ दिनों में वह सीने पर 21 कलश रखकर निर्जला व्रत करते हैं। उनकी यह साधना श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का विषय बनी हुई है।
नवरात्र को मां दुर्गा की उपासना और शक्ति की आराधना का पर्व माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार व्रत, पूजा-पाठ और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। नागेश्वर दास की साधना भी इसी धार्मिक आस्था से जुड़ी है।
30 साल से कर रहे मां दुर्गा की आराधना
दरभंगा के नागेश्वर दास पिछले तीन दशकों से नवरात्र के अवसर पर विशेष साधना करते आ रहे हैं। उनकी पूजा पद्धति सामान्य व्रत से अलग है। वह नौ दिनों तक निर्जला व्रत रखते हुए मां दुर्गा की आराधना करते हैं और अपने सीने पर 21 कलश स्थापित करते हैं।
उनकी साधना में धैर्य, अनुशासन और आस्था का विशेष महत्व है। नवरात्र के दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और परिवार की सुख-शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं। नागेश्वर दास भी इसी पर्व पर अपनी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं।
सीने पर 21 कलश रखकर करते हैं साधना
नागेश्वर दास की साधना का प्रमुख आकर्षण सीने पर 21 कलश स्थापित करना है। नवरात्र में कलश स्थापना को शुभ शुरुआत और देवी आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। हालांकि, सीने पर कलश रखकर साधना करना एक विशेष धार्मिक परंपरा है, जिसे नागेश्वर दास कई वर्षों से निभाते आ रहे हैं।
नौ दिनों तक इस तरह साधना करने के लिए शारीरिक स्थिरता और लगातार देखभाल की जरूरत हो सकती है। निर्जला व्रत में पानी नहीं पीया जाता, इसलिए स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी हो सकते हैं। लंबे समय तक बिना पानी के रहने से शरीर में पानी की कमी, चक्कर और अन्य गंभीर परेशानियां हो सकती हैं। ऐसे कठोर व्रत करने वालों के लिए चिकित्सकीय सलाह और सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है।
नवरात्र में भक्तिभाव का विशेष माहौल
शारदीय नवरात्र के दौरान बिहार के कई इलाकों में पूजा-पंडाल सजाए जाते हैं और मंदिरों में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। घरों में भी घटस्थापना, दुर्गा पाठ, आरती और व्रत जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
नागेश्वर दास की साधना ने भी स्थानीय स्तर पर लोगों का ध्यान खींचा है। उनके लिए यह परंपरा मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम है। नवरात्र के दौरान भक्त अपनी क्षमता और विश्वास के अनुसार पूजा करते हैं, लेकिन सभी के लिए व्रत की एक जैसी विधि अनिवार्य नहीं है।
आस्था के साथ सेहत का ध्यान जरूरी
नागेश्वर दास की करीब 30 वर्षों से चली आ रही साधना नवरात्र की धार्मिक परंपराओं और व्यक्तिगत आस्था को दर्शाती है। हालांकि, निर्जला व्रत हर व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त नहीं होता। खासकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के लंबे समय तक पानी से परहेज नहीं करना चाहिए।
दरभंगा के नागेश्वर दास की साधना नवरात्र के दौरान चर्चा का विषय बनी हुई है। सीने पर 21 कलश रखकर नौ दिनों तक निर्जला व्रत करने की उनकी परंपरा उनके धार्मिक विश्वास और लंबे समय से चली आ रही आराधना को सामने लाती है।
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