
पटना : बिहार सरकार ने राज्य की वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा चालू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने चीनी उपक्रम (अधिग्रहण) अधिनियम में संशोधन कर बंद चीनी मिलों की जमीन निजी निवेशकों और सहकारी समितियों को हस्तांतरित करने का रास्ता साफ कर दिया है। इस निर्णय के बाद बंद पड़ी नौ चीनी मिलों के पुनरुद्धार की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल राज्य में चीनी उद्योग को नई गति मिलेगी, बल्कि किसानों, स्थानीय युवाओं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ होगा।
राज्य सरकार लंबे समय से बंद चीनी मिलों को फिर से संचालित करने की योजना पर काम कर रही थी। अब कानूनी संशोधन के बाद मिलों की जमीन का स्वामित्व निजी कंपनियों अथवा सहकारी समितियों को सौंपा जा सकेगा। इससे निवेशकों के सामने आ रही सबसे बड़ी कानूनी बाधा दूर हो गई है और नए निवेश का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
सरकार ने राज्य की कुल नौ बंद चीनी मिलों को पुनः शुरू करने का निर्णय लिया है। इनमें से सकरी और रैयाम चीनी मिलों का संचालन सहकारिता विभाग के माध्यम से किया जाएगा। इन दोनों मिलों को सहकारी मॉडल पर विकसित करने की योजना है, ताकि किसानों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। वहीं शेष सात बंद चीनी मिलों के संचालन के लिए सरकार निजी निवेशकों को आमंत्रित करेगी। इसके लिए जल्द ही निवेश प्रस्ताव (आरएफपी) और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं शुरू की जा सकती हैं।
अब तक बंद चीनी मिलों की जमीन का स्वामित्व चीनी विकास निगम के पास था। इन मिलों का अधिग्रहण निगम ने वर्षों पहले किया था और कानूनी रूप से भूमि का मालिकाना हक उसी के पास बना हुआ था। यही कारण था कि किसी भी निजी निवेशक या संस्था को जमीन हस्तांतरित नहीं की जा सकती थी। सरकार द्वारा अधिनियम में संशोधन किए जाने के बाद यह बाधा समाप्त हो गई है और अब जरूरत के अनुसार जमीन का स्वामित्व निवेशकों या सहकारी समितियों को सौंपा जा सकेगा।
उद्योग विभाग के अधिकारियों का मानना है कि राज्य में चीनी उद्योग के पुनर्जीवन से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। मिलों के चालू होने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही परिवहन, मशीनरी, पैकेजिंग और अन्य सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और स्थानीय व्यापार को नई ऊर्जा मिलेगी।
चीनी मिलों के पुनः संचालन का सबसे बड़ा लाभ गन्ना किसानों को मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में कई किसान अपनी उपज को दूसरे राज्यों की मिलों तक पहुंचाने के लिए मजबूर हैं, जिससे परिवहन लागत बढ़ जाती है और समय पर भुगतान भी नहीं मिल पाता। यदि राज्य की बंद मिलें दोबारा शुरू होती हैं तो किसानों को स्थानीय स्तर पर गन्ने की बिक्री का बेहतर अवसर मिलेगा। इससे उनकी आय में वृद्धि होने के साथ-साथ खेती के प्रति उनका उत्साह भी बढ़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में गन्ना उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं, लेकिन पर्याप्त संख्या में संचालित चीनी मिलें नहीं होने के कारण इस क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। यदि सरकार की योजना सफल होती है तो राज्य एक बार फिर देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
सरकार का कहना है कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए आवश्यक सुविधाएं और अनुकूल औद्योगिक वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। आधुनिक तकनीक, बेहतर उत्पादन क्षमता और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप नई व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा। इससे चीनी उत्पादन के साथ-साथ इथेनॉल, बिजली उत्पादन और अन्य सह-उत्पादों के क्षेत्र में भी निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार बंद उद्योगों को पुनर्जीवित करने की यह पहल बिहार के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे राज्य में निजी निवेश बढ़ेगा, औद्योगिक आधार मजबूत होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। यदि परियोजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध तरीके से किया गया तो आने वाले वर्षों में बिहार के चीनी उद्योग में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल सकता है।
कुल मिलाकर, चीनी उपक्रम (अधिग्रहण) अधिनियम में संशोधन बिहार सरकार का एक अहम और दूरगामी निर्णय माना जा रहा है। इससे बंद नौ चीनी मिलों की जमीन निवेशकों और सहकारी समितियों को हस्तांतरित करने का कानूनी मार्ग प्रशस्त हो गया है। सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से राज्य में चीनी उद्योग का पुनरुद्धार होगा, किसानों को उनकी उपज का बेहतर बाजार मिलेगा, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और बिहार के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।





