बिहार

दो बहनों का बड़ा फैसला, मृत्योपरांत अंगदान कर जरूरतमंदों की मदद का संकल्प

nidhi
16 Oct 2026 8:22 AM IST
दो बहनों का बड़ा फैसला, मृत्योपरांत अंगदान कर जरूरतमंदों की मदद का संकल्प
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मधेपुरा से मानवता का संदेश
मधेपुरा: जीवन के बाद भी दूसरों के काम आने की सोच के साथ मधेपुरा की दो बहनों ने मृत्योपरांत अंगदान का संकल्प लिया है। गरिमा उर्विशा और उनकी छोटी बहन लीजा मान्या का यह निर्णय जरूरतमंदों को जीवन की नई संभावना देने की भावना से जुड़ा है। गरिमा ने वर्ष 2022 में अपने जन्मदिन पर अंगदान की घोषणा की थी। बाद में लीजा ने भी अपने 23वें जन्मदिन पर यह संकल्प लिया। दोनों के फैसले अलग-अलग समय पर लिए गए हैं।
गरिमा ने 12 अगस्त 2022 को अपने जन्मदिन के अवसर पर अंगदान का संकल्प सार्वजनिक किया था। उन्होंने पटना के बेली रोड स्थित दधीचि देहदान समिति के निर्धारित प्रपत्र पर हस्ताक्षर करके अपनी इच्छा दर्ज कराई। उनके संकल्प में मृत्योपरांत हृदय, किडनी और नेत्रदान की इच्छा शामिल थी। यह घोषणा उनके सामाजिक सेवा के प्रयासों में एक और कदम बनी।
गरिमा रक्तदान से भी जुड़ी रही हैं। अंगदान की घोषणा वाले जन्मदिन पर उन्होंने मधेपुरा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में अपना 12वां रक्तदान किया था। इस अवसर पर उनके परिवार के सदस्य और परिचित मौजूद रहे। भाई सुनीत और बहन लीजा ने आयोजन की व्यवस्था में सहयोग किया था। इस तरह परिवार ने उनके निर्णय का समर्थन करने के साथ उस दिन रक्तदान के संदेश को भी आगे बढ़ाया।
बड़ी बहन की सेवा भावना से प्रेरित लीजा मान्या ने अपने 23वें जन्मदिन पर मृत्योपरांत नेत्र, लीवर, किडनी और हृदय दान करने की इच्छा जताई। जनवरी 2026 में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, मधेपुरा के कर्पूरी नगर की रहने वाली लीजा ने देहरादून के उत्तरांचल विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उनके निर्णय में बड़ी बहन के अंगदान संकल्प और नियमित रक्तदान की भूमिका रही।
लीजा की भावना है कि मृत्यु के बाद भी उनके अंग किसी जरूरतमंद के काम आ सकें। छोटी बहन के फैसले पर गरिमा ने भी गर्व व्यक्त किया और इसे मानवता की सेवा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। दोनों बहनों की कहानी व्यक्तिगत संकल्प के साथ परिवार से मिलने वाली प्रेरणा को भी सामने रखती है। यहां अंगदान का संकल्प लिया गया है; वास्तविक अंगदान या प्रत्यारोपण हो जाने की सूचना नहीं है।
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