बिहार

टाइगर, शेरू और मोती के साथ निकली शिवभक्ति की यात्रा

Saba Naaz
2 Aug 2026 6:53 PM IST
टाइगर, शेरू और मोती के साथ निकली शिवभक्ति की यात्रा
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बगहा (पश्चिम चंपारण)। सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव के प्रति भक्तों की अलग-अलग आस्था देखने को मिलती है। कोई पैदल कांवड़ यात्रा करता है तो कोई कठिन तपस्या कर भोलेनाथ की आराधना करता है। इसी बीच पश्चिम चंपारण में एक शिवभक्त की अनोखी यात्रा लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। बगहा थाना क्षेत्र के चखनी रजवटिया निवासी करीब 26 वर्षीय धर्मेंद्र साव भगवान शिव की भक्ति में 90 किलोमीटर की पदयात्रा पर निकले हैं। खास बात यह है कि इस यात्रा में उनके साथ उनके तीन पालतू श्वान भी कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं।

धर्मेंद्र सावन के महीने में वाल्मीकिनगर स्थित त्रिवेणी संगम से 111 लीटर पवित्र जल लेकर रामनगर के नीलकंठ नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करने जा रहे हैं। उनकी इस यात्रा में उनके तीन श्वान टाइगर, शेरू और मोती भी शामिल हैं। तीनों श्वान अपने मालिक के साथ पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ यात्रा कर रहे हैं, जिसे देखकर रास्ते में लोग हैरान भी हो रहे हैं और उनकी भक्ति की सराहना भी कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, धर्मेंद्र ने अपनी यात्रा की शुरुआत वाल्मीकिनगर के त्रिवेणी संगम से की है। यहां से उन्होंने 111 लीटर जल लिया और पैदल ही रामनगर की ओर निकल पड़े। वाल्मीकिनगर से रामनगर तक सड़क मार्ग की दूरी करीब 90 किलोमीटर है। इतनी लंबी यात्रा में धर्मेंद्र खुद जल लेकर चल रहे हैं, वहीं उनके तीनों श्वान भी एक डंडे के सहारे बंधे जलपात्र में करीब पांच लीटर जल लेकर उनके साथ चल रहे हैं।

धर्मेंद्र ने बताया कि भगवान शिव उनके आराध्य हैं और वह किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए यह यात्रा नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल श्रद्धा, विश्वास और भगवान भोलेनाथ के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उनका उद्देश्य त्रिवेणी संगम के पवित्र जल से नीलकंठ नर्मदेश्वर महादेव का जलाभिषेक करना है।

धर्मेंद्र ने अपनी इस अनोखी यात्रा को भगवान श्रीराम की वानर सेना से जोड़ते हुए कहा कि जिस तरह भगवान श्रीराम के साथ उनकी वानर सेना थी, उसी तरह उनके साथ उनकी 'श्वान सेना' चल रही है। उन्होंने बताया कि टाइगर, शेरू और मोती उनके परिवार का हिस्सा हैं और हर समय उनका साथ निभाते हैं।

यात्रा के दौरान भी तीनों श्वान अपने मालिक के निर्देशों का पालन कर रहे हैं। धर्मेंद्र जहां विश्राम के लिए रुकते हैं, वहीं तीनों श्वान भी रुक जाते हैं। जैसे ही धर्मेंद्र आगे बढ़ते हैं, वे भी उनके साथ चल पड़ते हैं। उनकी यह अनोखी कांवड़ यात्रा रास्ते से गुजरने वाले लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।

राहगीर जब धर्मेंद्र को अपने श्वानों के साथ जल लेकर चलते देखते हैं तो रुककर इस दृश्य को देखते हैं। कई लोग उनकी भक्ति और पशुओं के प्रति उनके प्रेम की प्रशंसा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं बल्कि इंसान और पशुओं के बीच मजबूत रिश्ते को भी दर्शाती है।

धर्मेंद्र का लक्ष्य सावन के पहले सोमवार को रामनगर पहुंचकर नीलकंठ नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करना है। वह पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ अपनी यात्रा जारी रखे हुए हैं। उनकी इस अनोखी शिवभक्ति ने पश्चिम चंपारण में लोगों के बीच एक अलग पहचान बना ली है और यह यात्रा अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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