बिहार

स्कूलों में 75% उपस्थिति अनिवार्य

Kavita2
23 Sept 2026 2:25 PM IST
स्कूलों में 75% उपस्थिति अनिवार्य
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पटना। राज्य के सरकारी और सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए अब नियमित रूप से स्कूल आना बेहद जरूरी हो गया है। विद्यार्थियों के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य की गई है। निर्धारित सीमा से कम उपस्थिति होने पर संबंधित छात्र-छात्राओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ सकता है। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए प्राथमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। इसके लिए एक अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक की अवधि में विद्यार्थियों की स्कूल में मौजूदगी को आधार बनाया जाएगा। जिन छात्र-छात्राओं की उपस्थिति 75 प्रतिशत या इससे अधिक होगी, उन्हें पात्र माना जाएगा। वहीं 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले विद्यार्थियों को संबंधित सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी हो सकती है।

ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज होगा रिकॉर्ड

प्राथमिक शिक्षा निदेशालय के निर्देश के अनुसार विद्यार्थियों की उपस्थिति से जुड़ी जानकारी ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर अपडेट की जाएगी। इसके माध्यम से यह स्पष्ट होगा कि कौन से विद्यार्थी 75 प्रतिशत उपस्थिति की निर्धारित शर्त पूरी कर रहे हैं और कौन इससे पीछे हैं।

विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की उपस्थिति का सत्यापन करने के बाद पोर्टल पर जानकारी दर्ज की जाएगी। जिन विद्यार्थियों की उपस्थिति 75 प्रतिशत या उससे अधिक होगी, उनके नाम के सामने 'यस' दर्ज किया जाएगा।

वहीं जिन विद्यार्थियों की उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम पाई जाएगी, उनके सामने 'नो' दर्ज किया जाएगा। इसी रिकॉर्ड के आधार पर योजनाओं की पात्रता तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

छह महीने की उपस्थिति बनेगी आधार

नई व्यवस्था में एक अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक विद्यार्थियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होगा। यानी करीब छह महीने की अवधि में छात्र कितने दिन विद्यालय पहुंचे, इसके आधार पर उनकी उपस्थिति का प्रतिशत निकाला जाएगा।

इस अवधि के दौरान विद्यालयों को उपस्थिति रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ ऐसे विद्यार्थियों को मिले जो नियमित रूप से विद्यालय में पढ़ाई कर रहे हैं।

स्कूल प्रशासन को भी विद्यार्थियों की हाजिरी दर्ज करने में सावधानी बरतनी होगी, क्योंकि रिकॉर्ड में किसी तरह की गलती होने पर पात्र विद्यार्थी सरकारी लाभ से वंचित हो सकता है।

75 प्रतिशत से कम हाजिरी पर असर

सरकार की नई व्यवस्था का सीधा असर उन विद्यार्थियों पर पड़ेगा जो नियमित रूप से विद्यालय नहीं आते हैं। यदि निर्धारित अवधि में किसी विद्यार्थी की उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम रहती है तो ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर उसके सामने 'नो' दर्ज किया जाएगा।

ऐसे विद्यार्थियों को उपस्थिति आधारित सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा। इससे छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।

अभिभावकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चे बिना किसी उचित कारण के विद्यालय से अनुपस्थित न रहें और उनकी उपस्थिति निर्धारित सीमा से नीचे न जाए।

जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश

प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को इस संबंध में दिशा-निर्देश भेजे हैं।

जिला स्तर के अधिकारियों को अपने क्षेत्र के सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में व्यवस्था का पालन सुनिश्चित कराना होगा। विद्यालयों द्वारा दर्ज किए गए आंकड़ों की निगरानी भी की जा सकती है, ताकि उपस्थिति से संबंधित जानकारी में किसी तरह की गड़बड़ी न हो।

इसके साथ ही स्कूल प्रमुखों और शिक्षकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति दर्ज करने से लेकर निर्धारित अवधि का सही प्रतिशत निकालने तक पूरी प्रक्रिया में रिकॉर्ड की शुद्धता जरूरी होगी।

नियमित स्कूल आने के लिए बढ़ेगा दबाव

75 प्रतिशत उपस्थिति को सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रमुख प्रभाव विद्यार्थियों की नियमितता पर पड़ सकता है। स्कूलों में कई बार छात्र लंबे समय तक अनुपस्थित रहते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।

नई व्यवस्था के बाद विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा।

इससे विद्यालयों में विद्यार्थियों की मौजूदगी बढ़ाने और ड्रॉपआउट जैसी समस्याओं को कम करने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि इसका वास्तविक असर व्यवस्था लागू होने और उपस्थिति रिकॉर्ड की निगरानी के बाद ही स्पष्ट होगा।

अभिभावकों की भी बढ़ेगी जिम्मेदारी

विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने में अभिभावकों की भूमिका अहम रहेगी। अगर बच्चा लगातार विद्यालय नहीं जा रहा है तो उसकी उपस्थिति 75 प्रतिशत से नीचे जा सकती है।

ऐसे में अभिभावकों को समय-समय पर स्कूल से बच्चे की उपस्थिति की जानकारी लेने की जरूरत होगी। विशेष रूप से लंबी अनुपस्थिति की स्थिति में यह देखना जरूरी होगा कि विद्यार्थी की कुल हाजिरी पर कितना असर पड़ रहा है।

बीमारी या अन्य आवश्यक कारणों से लंबे समय तक स्कूल नहीं जा पाने वाले विद्यार्थियों के मामले में क्या व्यवस्था होगी, यह संबंधित विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार तय किया जाएगा।

रिकॉर्ड में गलती न हो इसका रखना होगा ध्यान

उपस्थिति का आंकड़ा सरकारी योजनाओं की पात्रता से जुड़ने के कारण विद्यालयों को रिकॉर्ड दर्ज करते समय विशेष सावधानी बरतनी होगी।

किसी विद्यार्थी की वास्तविक उपस्थिति 75 प्रतिशत से अधिक होने के बावजूद अगर तकनीकी या मानवीय गलती से पोर्टल पर 'नो' दर्ज हो जाता है तो उसे परेशानी हो सकती है।

इसलिए स्कूल स्तर पर डेटा अपलोड करने से पहले रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी। जिला स्तर पर भी निगरानी की व्यवस्था से गलत आंकड़ों को रोकने में मदद मिल सकती है।

सरकारी और सहायता प्राप्त दोनों स्कूल शामिल

75 प्रतिशत उपस्थिति की शर्त केवल पूरी तरह सरकारी विद्यालयों तक सीमित नहीं है। सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर भी यह व्यवस्था लागू होगी।

इससे बड़ी संख्या में विद्यार्थी नई व्यवस्था के दायरे में आएंगे। संबंधित विद्यालयों को भी तय अवधि की उपस्थिति का रिकॉर्ड तैयार कर ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जानकारी दर्ज करनी होगी।

सितंबर तक की हाजिरी होगी महत्वपूर्ण

विद्यार्थियों के लिए अब 30 सितंबर 2026 तक की उपस्थिति बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। एक अप्रैल से सितंबर के अंत तक के रिकॉर्ड से यह तय होगा कि विद्यार्थी ने न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति की शर्त पूरी की है या नहीं।

जिन विद्यार्थियों की उपस्थिति निर्धारित सीमा पूरी करेगी, उनके सामने पोर्टल पर 'यस' दर्ज किया जाएगा। कम उपस्थिति होने पर 'नो' दर्ज होगा।

नई व्यवस्था से सरकार का जोर विद्यार्थियों की नियमित स्कूल उपस्थिति सुनिश्चित करने पर है। इसके बाद स्कूलों, विद्यार्थियों और अभिभावकों तीनों को हाजिरी पर विशेष ध्यान देना होगा। सरकारी योजनाओं से उपस्थिति को जोड़ने के कारण आने वाले समय में विद्यालयों में छात्रों की नियमितता और उपस्थिति रिकॉर्ड की निगरानी दोनों बढ़ने की संभावना है।

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