
बिहिया। नगर पंचायत क्षेत्र में सफाई व्यवस्था पर करीब 7.47 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शहर में कई सफाई कर्मचारी बिना ग्लव्स, उपयुक्त जूते, सेफ्टी जैकेट और निर्धारित ड्रेस के कचरा उठाते और सफाई करते दिखाई दे रहे हैं। जोखिम भरे काम के दौरान जरूरी सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल नहीं होने से कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
नगर पंचायत में सफाई, कचरा उठाव और इससे जुड़े दूसरे कार्यों के लिए 7,46,91,124 रुपये का दो वर्षीय टेंडर किया गया है। सफाई कार्य से संबंधित एग्रीमेंट की शर्तों में कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट प्रावधान होने की बात कही गई है। इसके बावजूद यदि कर्मचारी बिना सुरक्षा उपकरणों के काम कर रहे हैं तो व्यवस्था और निगरानी दोनों पर सवाल खड़े होते हैं।
बिना ग्लव्स के उठाया जा रहा कचरा
नगर पंचायत के विभिन्न इलाकों में सफाई कर्मचारी नियमित रूप से कचरा उठाने और सड़कों की सफाई करने का काम करते हैं। इस दौरान उनका सीधा संपर्क गंदगी और विभिन्न प्रकार के कचरे से होता है।
कई कर्मचारी बिना ग्लव्स के ही कचरे को उठाते दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा उनके पास काम के अनुकूल जूते और अन्य सुरक्षा उपकरण भी नहीं दिख रहे।
कचरे में कांच के टुकड़े, लोहे की नुकीली वस्तुएं, गंदे कपड़े और अन्य हानिकारक सामग्री हो सकती है। बिना ग्लव्स और जूतों के इन्हें संभालने पर चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।
सेफ्टी जैकेट और ड्रेस भी जरूरी
सफाई कर्मचारियों के लिए निर्धारित ड्रेस और सेफ्टी जैकेट केवल पहचान के लिए नहीं बल्कि उनकी सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं।
सड़क किनारे सफाई या कचरा संग्रहण करते समय चमकदार सेफ्टी जैकेट वाहन चालकों को दूर से कर्मचारी की मौजूदगी का संकेत देती है। खासकर सुबह, शाम या कम रोशनी वाले स्थानों पर इसकी जरूरत और बढ़ जाती है।
यदि कर्मचारी सामान्य कपड़ों में सड़क पर काम करते हैं तो दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में सुरक्षा जैकेट और निर्धारित वर्दी उपलब्ध कराने के साथ उनका नियमित इस्तेमाल सुनिश्चित करना जरूरी है।
दो साल के लिए 7.46 करोड़ का टेंडर
नगर पंचायत में सफाई और कचरा उठाव से जुड़े काम के लिए दो वर्षों का टेंडर किया गया है। इसकी कुल राशि 7 करोड़ 46 लाख 91 हजार 124 रुपये है।
इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद कर्मचारियों के पास बुनियादी सुरक्षा उपकरण नहीं दिखाई देना सवाल खड़े करता है। सफाई व्यवस्था पर खर्च होने वाली राशि में केवल कचरा उठाने और परिवहन का काम ही नहीं बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षित कार्य परिस्थितियों का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है।
यदि टेंडर की शर्तों में सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने का प्रावधान है तो यह सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसी और नगर पंचायत की जिम्मेदारी बनती है कि इनका पालन हो।
एग्रीमेंट में सुरक्षा के स्पष्ट प्रावधान
सफाई कार्य से जुड़े एग्रीमेंट की शर्तों में कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई है।
ऐसी स्थिति में यह जांच का विषय है कि कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं या नहीं। यदि उपकरण दिए गए हैं तो उनका उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा और यदि नहीं दिए गए हैं तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
सिर्फ कागज पर सुरक्षा मानकों का उल्लेख पर्याप्त नहीं है। जमीनी स्तर पर उनका पालन होना सबसे जरूरी है।
स्वास्थ्य के लिए भी खतरा
सफाई कर्मचारियों को काम के दौरान कई तरह के स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। सड़ा-गला कचरा, दूषित पानी और अन्य गंदगी के संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा रहता है।
हाथों में चोट या कट लगने की स्थिति में गंदगी के संपर्क से संक्रमण का जोखिम और बढ़ सकता है। इसी कारण ग्लव्स, जूते और अन्य व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल जरूरी माना जाता है।
सफाई कर्मचारियों के लिए सुरक्षित कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करना उनके स्वास्थ्य और सम्मान दोनों से जुड़ा विषय है।
निगरानी व्यवस्था पर सवाल
सुरक्षा उपकरणों के बिना कर्मचारियों के काम करने से नगर पंचायत और संबंधित एजेंसी की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आती है।
यदि किसी एजेंसी को करोड़ों रुपये का सफाई कार्य दिया गया है तो एग्रीमेंट की प्रत्येक शर्त का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण की जरूरत होती है।
नगर पंचायत स्तर पर अधिकारियों को यह देखना चाहिए कि निर्धारित संख्या में कर्मचारी काम पर हैं या नहीं, उन्हें आवश्यक उपकरण मिले हैं या नहीं और सफाई का काम तय मानकों के अनुसार हो रहा है या नहीं।
कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी जरूरी
केवल सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। कर्मचारियों को उनके सही इस्तेमाल और कार्यस्थल पर सुरक्षा से संबंधित प्रशिक्षण देना भी जरूरी है।
कई बार उपकरण उपलब्ध होने के बावजूद जागरूकता की कमी के कारण कर्मचारी उनका इस्तेमाल नहीं करते। ऐसे में संबंधित एजेंसी को कर्मचारियों को यह समझाना चाहिए कि ग्लव्स, जूते और जैकेट उनकी सुरक्षा के लिए कितने जरूरी हैं।
इसके साथ क्षतिग्रस्त सुरक्षा उपकरणों को समय पर बदलने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
करोड़ों के खर्च के बीच जवाबदेही जरूरी
बिहिया नगर पंचायत में दो वर्षों की सफाई व्यवस्था पर करीब 7.47 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इतनी बड़ी सार्वजनिक राशि खर्च होने के साथ सेवा की गुणवत्ता और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर जवाबदेही भी जरूरी है।
नगर पंचायत और संबंधित एजेंसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि सफाई कर्मचारियों को निर्धारित सुरक्षा उपकरण उपलब्ध हों और वे उनका इस्तेमाल करें।
फिलहाल बिना ग्लव्स, उपयुक्त जूते, सेफ्टी जैकेट और निर्धारित ड्रेस के सफाई करते कर्मचारियों की स्थिति ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि नगर पंचायत इस मामले में निरीक्षण कर सुरक्षा संबंधी शर्तों का पालन सुनिश्चित करती है या नहीं।





