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Bihar बिहार: भारत की इतिहास में महिलाओं के नेतृत्व और प्रशासनिक क्षमता का प्रतीक मानी जाने वाली माता अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती के मौके पर कलाकार शरा शर्मा ने उनके व्यक्तित्व और जीवन पर अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त की। शरा शर्मा ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर का किरदार निभाना उनके लिए जीवन की सबसे बड़ी चुनौती और अवसर साबित हुआ।
शरा ने मीडिया से बातचीत में बताया, “वास्तव में, वह इतनी असाधारण महिला थीं, इतनी महान शख्सियत कि उनका किरदार निभाना मेरे लिए एक बड़ा अवसर था। उन्होंने कई कठिनाइयों का सामना किया और इतना कुछ हासिल किया। उनके जीवन की कहानी को पर्दे पर जीवंत करना मेरे लिए जिम्मेदारी बन गई।”
अहिल्याबाई होलकर का शासनकाल 18वीं शताब्दी में मराठा साम्राज्य के महत्वपूर्ण हिस्सों में रहा। उन्होंने धार्मिक सहिष्णुता, सामाजिक कल्याण और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में कई अहम कार्य किए। उनका दृष्टिकोण आज भी प्रासंगिक माना जाता है, और यही वजह है कि शरा शर्मा ने उनके किरदार को निभाने में खुद को सौभाग्यशाली समझा।
कलाकार शरा शर्मा ने कहा, “अहिल्याबाई का जीवन प्रेरणा और साहस से भरा हुआ है। उनके प्रशासनिक निर्णय, जनहितकारी योजनाएं और समाज के कमजोर वर्गों के लिए उनकी नीतियां हमें आज भी सीख देती हैं। इस किरदार को निभाना सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और जीवन दर्शन को दर्शकों तक पहुंचाने का माध्यम भी था।”
शरा शर्मा ने यह भी बताया कि इस भूमिका के लिए उन्होंने इतिहास की पुस्तकों, पुरानी दस्तावेज़ों और विशेषज्ञों की सलाह ली। उन्होंने कहा, “मुझे यह समझना था कि अहिल्याबाई सिर्फ एक शासक नहीं थीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने वाली और अपने समय की दूरदर्शी महिला थीं। उनके संघर्ष और उपलब्धियों को सही रूप में प्रस्तुत करना मेरा लक्ष्य था।”
माता अहिल्याबाई के योगदान में धार्मिक स्थलों के निर्माण, किले और सड़क मार्गों के विकास, कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार तथा न्यायप्रिय प्रशासन शामिल हैं। शरा शर्मा ने कहा कि इन पहलुओं को दर्शाने के लिए उन्हें अपने अभिनय में भाव, दृढ़ता और आत्मविश्वास का संतुलन बनाए रखना पड़ा।
इस अवसर पर शरा ने युवा पीढ़ी को भी संदेश दिया। उन्होंने कहा, “माता अहिल्याबाई का जीवन हमें यह सिखाता है कि चुनौतियों का सामना करना और समाज के लिए कार्य करना कितना महत्वपूर्ण है। हम सभी को उनके साहस और निर्णय क्षमता से प्रेरणा लेनी चाहिए।”
शरा शर्मा का मानना है कि इस भूमिका ने उन्हें न केवल एक कलाकार के रूप में विकसित किया, बल्कि जीवन के प्रति उनके दृष्टिकोण और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत किया। उन्होंने कहा, “यह अनुभव मुझे हमेशा याद रहेगा और मेरी अभिनय यात्रा में विशेष महत्व रखेगा।”
माता अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती पर देश भर में उनके योगदान को याद किया जा रहा है। शरा शर्मा का यह प्रयास उनके व्यक्तित्व और आदर्शों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम साबित होगा।
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