
पटना। राज्य में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद्य संरक्षा विभाग की कार्रवाई लगातार जारी है। विभिन्न जिलों से लिए गए खाद्य पदार्थों के नमूनों की प्रयोगशाला जांच में 11 नमूने असुरक्षित और निर्धारित मानकों के विपरीत पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित मामलों में कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
स्वास्थ्य सचिव सह खाद्य संरक्षा आयुक्त कुमार रवि ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत इन मामलों में अभियोजन की स्वीकृति दे दी है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को सक्षम न्यायालय में अभियोजन दायर करने का निर्देश दिया गया है।
विभाग की ओर से अलग-अलग जिलों से खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए थे। इन नमूनों को गुणवत्ता और सुरक्षा की जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया। जांच रिपोर्ट में 11 नमूने तय मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।
नमूनों को असुरक्षित पाए जाने के बाद विभाग ने संबंधित मामलों को गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई शुरू की। खाद्य संरक्षा आयुक्त की स्वीकृति के बाद अब सक्षम न्यायालय में अभियोजन दायर किया जाएगा।
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। बाजार में बेचे जाने वाले खाद्य उत्पादों में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए विभाग समय-समय पर नमूने लेकर उनकी जांच कराता है।
इसी प्रक्रिया के तहत विभिन्न जिलों में खाद्य प्रतिष्ठानों और अन्य स्थानों से नमूने एकत्र किए गए थे। प्रयोगशाला जांच के बाद जिन नमूनों को असुरक्षित या मानकों के विपरीत पाया गया, उनसे संबंधित मामलों में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।
स्वास्थ्य सचिव सह खाद्य संरक्षा आयुक्त कुमार रवि ने संबंधित अधिकारियों से कहा है कि स्वीकृत मामलों में सक्षम न्यायालय के समक्ष अभियोजन दायर किया जाए। इसके बाद संबंधित मामलों में आगे की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, निर्माण, भंडारण और बिक्री से संबंधित विभिन्न प्रावधान किए गए हैं। इन नियमों का उद्देश्य उपभोक्ताओं तक सुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचाना और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाना है।
विभाग की ओर से की जाने वाली नमूना जांच इसी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नमूने लेने के बाद उन्हें प्रयोगशाला भेजा जाता है, जहां निर्धारित मानकों के आधार पर उनकी गुणवत्ता की जांच की जाती है।
प्रयोगशाला रिपोर्ट में नमूना मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने पर संबंधित मामले में आगे की कार्रवाई की जाती है। वर्तमान मामले में 11 नमूनों को असुरक्षित और निर्धारित मानकों के विपरीत पाए जाने के बाद अभियोजन की स्वीकृति दी गई है।
विभाग के अनुसार संबंधित प्रावधानों के तहत दोष सिद्ध होने की स्थिति में तीन महीने तक की जेल और तीन लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी और दंड का अंतिम निर्धारण न्यायालय में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा।
खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कार्रवाई में केवल नमूने लेना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उनकी प्रयोगशाला जांच और रिपोर्ट के आधार पर समय पर कानूनी प्रक्रिया शुरू करना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से अधिकारियों को अभियोजन दायर करने के निर्देश दिए गए हैं।
खाद्य पदार्थों में गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं होने से उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है।
इसी कारण खाद्य संरक्षा विभाग विभिन्न जिलों में निरीक्षण और नमूना संग्रह की कार्रवाई करता है। इस दौरान खाद्य पदार्थों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है। जांच में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठानों या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अधिनियम के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
मौजूदा कार्रवाई में भी विभिन्न जिलों से नमूने लिए गए थे। प्रयोगशाला की रिपोर्ट मिलने के बाद 11 नमूनों के असुरक्षित और तय मानकों के विपरीत होने की बात सामने आई।
इसके बाद खाद्य संरक्षा विभाग ने मामलों की जानकारी खाद्य संरक्षा आयुक्त के सामने रखी। स्वास्थ्य सचिव सह खाद्य संरक्षा आयुक्त कुमार रवि ने इन मामलों में अभियोजन चलाने की अनुमति प्रदान कर दी।
अब संबंधित अधिकारी सक्षम न्यायालय में मामले प्रस्तुत करेंगे। न्यायालय में उपलब्ध साक्ष्यों, प्रयोगशाला रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आगे की प्रक्रिया चलेगी।
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने में कारोबारियों और विक्रेताओं की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। खाद्य सामग्री के निर्माण से लेकर भंडारण और बिक्री तक तय मानकों का पालन करना आवश्यक है।
खराब गुणवत्ता, असुरक्षित सामग्री या निर्धारित मानकों के विपरीत खाद्य पदार्थों की बिक्री उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। इसी वजह से खाद्य सुरक्षा कानून में नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।
विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य बाजार में बिकने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की निगरानी करना और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है।
नमूना जांच के माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि संबंधित खाद्य उत्पाद तय मानकों को पूरा करता है या नहीं। यदि जांच में उत्पाद असुरक्षित मिलता है तो मामले की गंभीरता के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाती है।
विभाग की ओर से अलग-अलग जिलों में इस तरह की जांच आगे भी जारी रहने की संभावना है। खाद्य पदार्थों की नियमित जांच से बाजार में नियमों का पालन सुनिश्चित करने और मिलावट या असुरक्षित खाद्य सामग्री की बिक्री पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है।
उपभोक्ताओं के लिए भी खाद्य सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है। बाजार से खाद्य पदार्थ खरीदते समय पैकेजिंग, निर्माण और समाप्ति तिथि सहित आवश्यक जानकारी की जांच करना उपयोगी होता है।
खुले खाद्य पदार्थों के मामले में साफ-सफाई और भंडारण की स्थिति पर ध्यान देना भी जरूरी है। यदि किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो तो संबंधित विभाग को इसकी जानकारी दी जा सकती है।
फिलहाल प्रयोगशाला जांच में असुरक्षित पाए गए 11 नमूनों से जुड़े मामलों में अभियोजन की अनुमति मिल चुकी है। संबंधित अधिकारियों को अब न्यायालय में मामला दायर करने की प्रक्रिया पूरी करनी है।
स्वास्थ्य सचिव सह खाद्य संरक्षा आयुक्त कुमार रवि के निर्देश के बाद इन मामलों में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी।





