
गोपालगंज। बिहार के गोपालगंज जिले से रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य गए करीब 10 मजदूरों को मध्य प्रदेश के रतलाम में कथित तौर पर बंधक बनाए जाने का मामला सामने आया है। मजदूरों ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि उन्हें रोजगार दिलाने के नाम पर मध्य प्रदेश ले जाया गया और वहां एक कंपनी के हाथों एक लाख रुपये में बेच दिया गया। मजदूरों का दावा है कि उनसे जबरन काम कराया जा रहा है और घर वापस नहीं जाने दिया जा रहा है। परेशान मजदूरों ने वीडियो के माध्यम से बिहार सरकार, जिला प्रशासन और प्रदेश के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी से मदद की गुहार लगाई है। मामला सामने आने के बाद बिहार प्रशासन ने संज्ञान लिया है। बिहार भवन के संयुक्त श्रम आयुक्त ने रतलाम के जिलाधिकारी को पत्र भेजकर मजदूरों की स्थिति की जांच करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित मुक्त कराकर बिहार भेजने का अनुरोध किया है।
गोपालगंज के कई गांवों के मजदूर फंसे
जानकारी के अनुसार, कथित रूप से बंधक बनाए गए मजदूर गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर, मांझागढ़ और आसपास के थाना क्षेत्रों के रहने वाले हैं। इनमें बैकुंठपुर के दिघवा-दुबौली और खैरा गांव के अलावा मांझागढ़ के धामापाकड़ तथा भोजपुरवा गांव के मजदूर शामिल हैं।
ये सभी मजदूर रोजगार की तलाश में अपने घरों से निकले थे। उनका उद्देश्य दूसरे राज्य में काम करके परिवार के लिए पैसे कमाना था। लेकिन मजदूरों के आरोपों के मुताबिक, काम मिलने के बाद वे ऐसी स्थिति में फंस गए, जहां उन्हें अपनी इच्छा से घर लौटने की अनुमति नहीं मिल रही है।
मजदूरों ने अपनी परेशानी को लेकर वीडियो बनाया और प्रशासन से जल्द सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है।
एक लाख रुपये में कंपनी को बेचने का आरोप
पीड़ित मजदूरों ने वीडियो में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि उन्हें एक लाख रुपये में एक कंपनी के हाथों बेच दिया गया। हालांकि, मजदूरों के इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सामने आई जानकारी के अनुसार, गोपालगंज जिले के डोमहाता गांव निवासी धर्मेंद्र यादव नामक व्यक्ति पर मजदूरों को रोजगार दिलाने के नाम पर मध्य प्रदेश ले जाने का आरोप है।
मजदूरों का कहना है कि उन्हें काम दिलाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन रतलाम पहुंचने के बाद उनके सामने अलग परिस्थितियां पैदा हो गईं।
अब प्रशासन के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि मजदूरों को किस व्यवस्था के तहत काम पर रखा गया था और उनके साथ किसी प्रकार का अवैध लेनदेन हुआ था या नहीं।
रोजाना 12 घंटे काम कराने का आरोप
मजदूरों ने आरोप लगाया है कि उनसे रतलाम की एक निर्माणाधीन साइट पर प्रतिदिन करीब 12 घंटे तक काम कराया जाता है। उनका कहना है कि काम समाप्त होने के बाद भी उन्हें स्वतंत्र रूप से कहीं जाने की अनुमति नहीं दी जाती।
मजदूरों का दावा है कि वे अपने घर लौटना चाहते हैं, लेकिन उन्हें वापस नहीं जाने दिया जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने वीडियो के माध्यम से मदद मांगने का रास्ता चुना।
यदि मजदूरों के ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह श्रमिकों की स्वतंत्रता और उनके अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है। हालांकि, फिलहाल संबंधित कंपनी या ठेकेदार की ओर से आरोपों पर कोई पुष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
लखनऊ में काम दिलाने के नाम पर ले जाने का आरोप
मजदूरों के अनुसार, उन्हें पहले उत्तर प्रदेश के लखनऊ में काम दिलाने की बात कही गई थी। इसी भरोसे पर वे अपने घरों से निकले थे। लेकिन आरोप है कि उन्हें लखनऊ ले जाने के बजाय मध्य प्रदेश के रतलाम पहुंचा दिया गया।
वहां पहुंचने के बाद जब मजदूरों ने अपने काम और वापस लौटने के बारे में जानकारी मांगी तो उन्हें जाने की अनुमति नहीं दी गई। मजदूरों का दावा है कि विरोध करने पर उन्हें एक स्थान पर ही रहने के लिए मजबूर किया गया।
इस पूरे मामले में रोजगार दिलाने वाले व्यक्ति और संबंधित ठेकेदार की भूमिका की जांच होना बाकी है।
एक लाख रुपये लौटाने की शर्त का दावा
मजदूरों ने शिकायत में बताया कि उन्हें वापस जाने के लिए एक लाख रुपये लौटाने की शर्त रखी गई है। दावा है कि यह रकम उन्हें काम पर लाने वाले बिचौलिए को दी गई थी।
मजदूरों का कहना है कि उनके पास इतनी बड़ी रकम नहीं है। इसी कारण वे रतलाम से अपने घर नहीं लौट पा रहे हैं।
इसके अलावा मजदूरों ने पर्याप्त भोजन, पीने के पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी का भी आरोप लगाया है। इन शिकायतों की प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि की जानी बाकी है।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी से लगाई गुहार
वीडियो जारी करने वाले मजदूरों ने बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी से भी सहायता मांगी है। मजदूरों ने अपील की है कि उनकी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश प्रशासन से संपर्क किया जाए और उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाया जाए।
मिथिलेश तिवारी गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी हैं। इसी क्षेत्र के कई मजदूरों के कथित रूप से फंसे होने की जानकारी सामने आई है।
मजदूरों के परिजनों ने भी बिहार सरकार और गोपालगंज जिला प्रशासन से हस्तक्षेप करने की मांग की है। परिवारों का कहना है कि मजदूरों की सुरक्षित वापसी प्राथमिकता होनी चाहिए।
बिहार भवन ने रतलाम डीएम को भेजा पत्र
मामला सामने आने के बाद बिहार भवन, नई दिल्ली के संयुक्त श्रम आयुक्त कुमार दिग्विजय ने रतलाम के जिलाधिकारी को पत्र भेजा है।
पत्र में मजदूरों की वर्तमान स्थिति और सुरक्षा की तत्काल जांच करने का अनुरोध किया गया है। साथ ही शिकायत सही पाए जाने पर मजदूरों को मुक्त कराने और सुरक्षित बिहार वापस भेजने की कार्रवाई करने को कहा गया है।
श्रम विभाग ने मजदूरों के भोजन, रहने की व्यवस्था, चिकित्सा सहायता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी बताई है।
इसके अलावा मजदूरों के बयान दर्ज करने, बकाया मजदूरी की जांच करने और संबंधित ठेकेदार तथा बिचौलिए की भूमिका की पड़ताल करने का अनुरोध किया गया है।
प्रशासनिक जांच में सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल मजदूरों के आरोपों की जांच की जानी है। रतलाम प्रशासन की ओर से मौके पर जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि मजदूर किन परिस्थितियों में रह रहे हैं और उन्हें घर लौटने से क्यों रोका जा रहा है।
बिहार भवन की ओर से मजदूरों का वीडियो और उपलब्ध जानकारी भी संबंधित प्रशासन को भेजी गई है। अब दोनों राज्यों के प्रशासन के बीच समन्वय के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले में किसी मजदूर को सुरक्षित वापस लाए जाने या संबंधित ठेकेदार की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में मजदूरों की सुरक्षित वापसी और जांच रिपोर्ट का इंतजार बना हुआ है।





