असम
ज़ुबीन गर्ग केस: हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अमृतप्रभा की रिहाई
Tara Tandi
13 Oct 2026 2:56 PM IST

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गुवाहाटी: असमिया गायक ज़ुबीन गर्ग की मौत के मामले में सात आरोपियों में से एक, गायिका अमृतप्रभा महंता को मंगलवार, 13 अक्टूबर को हाफलॉन्ग सब-जेल से रिहा कर दिया गया। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने उन्हें चार दिन पहले ज़मानत दी थी।
स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ज़ियाउल कमर ने पत्रकारों को बताया कि जस्टिस प्रांजल दास ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को महंता को ज़मानत दी और उन्हें 50,000 रुपये का बॉन्ड और उतनी ही राशि की दो ज़मानत (sureties) जमा करने का निर्देश दिया।
हाई कोर्ट ने कई दिनों तक महंता की ज़मानत याचिका पर सुनवाई की और बुधवार को बहस पूरी हुई। शुक्रवार को फ़ैसला सुनाने से पहले कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।
कमर के अनुसार, सुनवाई के दौरान प्रॉसिक्यूशन ने चार से पाँच दिनों तक अपनी दलीलें पेश कीं।
महंता को हाफलॉन्ग सब-जेल में शेखर ज्योति गोस्वामी के साथ रखा गया था, जो इस मामले में एक और आरोपी और गर्ग के पूर्व बैंडमेट हैं। बाकी आरोपी तामुलपुर जेल में बंद हैं।
गर्ग की मौत से जुड़े मुख्य मामले में किसी आरोपी को ज़मानत मिलने का यह पहला मामला है। इससे पहले, गायक के दो पर्सनल सिक्योरिटी ऑफ़िसर्स को वित्तीय लेन-देन से जुड़े एक अलग मामले में ज़मानत मिली थी, जो मौत की मुख्य जाँच से अलग है।
52 वर्षीय ज़ुबीन गर्ग की मौत 19 सितंबर, 2025 को सिंगापुर के समुद्र में तैरते समय हो गई थी, जहाँ वे नॉर्थ ईस्ट इंडिया फ़ेस्टिवल में शामिल होने गए थे। उनकी मौत के बाद पूरे असम में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और लोगों ने घटना से जुड़ी परिस्थितियों की गहन जाँच की माँग की।
इसके बाद असम सरकार ने मामले की जाँच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया। जाँच के हिस्से के तौर पर सिंगापुर यात्रा के दौरान गर्ग के साथ गए कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया।
गिरफ़्तार किए गए लोगों में फ़ेस्टिवल ऑर्गनाइज़र श्यामकानु महंता, गर्ग के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा और बैंड के सदस्य शेखर ज्योति गोस्वामी और अमृतप्रभा महंता शामिल थे।
बाद में SIT ने आरोपियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर की। अमृतप्रभा महंता, श्यामकानु महंता, सिद्धार्थ शर्मा और शेखर ज्योति गोस्वामी पर हत्या का आरोप लगाया गया। गर्ग के कज़िन, संदीपन गर्ग पर गैर-इरादतन हत्या (हत्या न मानी जाने वाली हत्या) का आरोप लगाया गया, जबकि सिंगर के पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर, नदेश्वर बोरा और परेश बैश्य पर आपराधिक साजिश और आपराधिक विश्वासघात के आरोप लगाए गए।
यह मामला सिंगापुर यात्रा के दौरान गर्ग की मौत से जुड़ी परिस्थितियों और उनके साथ गए लोगों की कथित भूमिकाओं पर केंद्रित है।
महंता को ज़मानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें बरी कर दिया गया है। उन पर और दूसरे आरोपियों पर लगे आरोपों की न्यायिक कार्यवाही जारी है और अदालत ने अभी तक उनके दोषी होने की पुष्टि नहीं की है।
मौत के मुख्य मामले में कानूनी कार्यवाही जारी है और बाकी आरोपी सिंगर की मौत से जुड़े आरोपों का सामना कर रहे हैं।
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