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Tinsukia तिनसुकिया। असम के तिनसुकिया जिले के सादिया क्षेत्र में इंसान और हाथियों के बीच बढ़ते संघर्ष का मामला सामने आया है। भाबला बालिजान गांव में जंगली हाथियों के झुंड ने जमकर उत्पात मचाया, जिससे कई घरों को नुकसान पहुंचा, किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं और बड़ी संख्या में मूल्यवान खैर के पेड़ उखड़ गए। क्षेत्रीय वन अधिकारी लकी दत्ता ने आईएएनएस से बताया कि बीते दिन सादिया क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष की घटना में कुल पांच घर क्षतिग्रस्त हुए। इसके अलावा खेतों में खड़ी कई फसलों को भी नुकसान पहुंचा। हाल के दिनों में इस तरह की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।
लकी दत्ता के अनुसार, वन विभाग की फील्ड स्टडी में पाया गया है कि गुरुमुरा नदी और लोहित नदी के आसपास तीन प्रमुख हाथी गलियारों की पहचान की गई है। इन गलियारों को पहले ही सरकारी अधिसूचना के लिए प्रस्तावित किया जा चुका है, लेकिन अब स्थानीय लोग इन क्षेत्रों में मक्का, आलू और अन्य मौसमी फसलों की खेती करने लगे हैं, जिससे हाथियों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से सरकारी भूमि और सपोरी क्षेत्रों में हुए अतिक्रमण को हटाना जरूरी है, ताकि हाथी अपने प्राकृतिक रास्तों से स्वतंत्र रूप से गुजर सकें।
वन विभाग की ओर से लगातार गश्त की जा रही है। इसके साथ ही ग्रामीणों को सहायता के रूप में टॉर्च और पटाखे भी वितरित किए जा रहे हैं, ताकि हाथियों को आबादी वाले इलाकों से दूर भगाया जा सके। विभाग प्रशासन के साथ मिलकर जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाने की भी योजना बना रहा है, जिससे लोगों को यह समझाया जा सके कि ऐसी परिस्थितियों में क्या करना चाहिए और क्या नहीं। लकी दत्ता ने सादिया क्षेत्र के लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे हाथी गलियारों और सपोरी क्षेत्रों में मक्का तथा अन्य आकर्षक फसलों की खेती से बचें। इससे संघर्ष की घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।उन्होंने बताया कि स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के सहयोग से रिजर्व फॉरेस्ट के आसपास के गांवों में सोलर फेंसिंग लगाने की पहल की जा रही है। इसके अलावा जैविक बाड़ के रूप में नींबू के पौधे लगाने को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
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