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शिलांग से सीमा तक तनाव आखिर क्यों आमने सामने आए असम और मेघालय

Ratna Netam
23 Aug 2026 8:29 PM IST
शिलांग से सीमा तक तनाव आखिर क्यों आमने सामने आए असम और मेघालय
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गुवाहाटी। असम और मेघालय के बीच सीमा पर एक बार फिर तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। शिलांग में हुई हिंसा के बाद दोनों राज्यों के बीच माहौल बिगड़ गया और इसका असर सीमा क्षेत्रों में भी देखने को मिला। असम के कुछ इलाकों में मेघालय नंबर वाले वाहनों को रोके जाने की घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद दोनों राज्यों के बीच तनाव और बढ़ गया।
यह विवाद केवल हालिया घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें दशकों पुराने सीमा विवाद में छिपी हुई हैं। असम और मेघालय के बीच करीब 884 किलोमीटर लंबी सीमा है, जहां कई स्थानों को लेकर दोनों राज्यों के बीच मतभेद रहे हैं। समय-समय पर स्थानीय विवाद बड़े तनाव में बदल जाते हैं।
शिलांग की घटना के बाद बिगड़े हालात
हालिया विवाद की शुरुआत मेघालय की राजधानी शिलांग में हुई एक रैली के दौरान हिंसा के बाद हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार, खासी स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) की रैली के दौरान तनाव बढ़ा और कुछ वाहनों में तोड़फोड़ की गई। इस घटना में असम नंबर के वाहनों को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई।
इसके बाद असम के परिवहन संगठनों और टैक्सी संचालकों में नाराजगी बढ़ गई। उन्होंने असम-मेघालय सीमा के पास जोराबाट इलाके में मेघालय नंबर के वाहनों को रोकना शुरू कर दिया। जवाब में मेघालय की ओर से भी असम नंबर वाले वाहनों की आवाजाही रोकने की खबरें सामने आईं।
असली वजह क्या है?
असम और मेघालय के बीच सीमा विवाद काफी पुराना है। वर्ष 1972 में मेघालय के अलग राज्य बनने के बाद से ही दोनों राज्यों के बीच कुछ क्षेत्रों के सीमांकन को लेकर मतभेद रहे हैं।
मेघालय का आरोप रहा है कि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हें असम के हिस्से में दिखाया गया, जबकि ऐतिहासिक और प्रशासनिक आधार पर उनका संबंध मेघालय से होना चाहिए। वहीं असम अपने प्रशासनिक रिकॉर्ड और सीमांकन को आधार मानता है।
किन इलाकों को लेकर विवाद है?
दोनों राज्यों के बीच कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां सीमा को लेकर विवाद रहा है। इनमें पश्चिम जयंतिया हिल्स, री-भोई और पश्चिम खासी हिल्स जैसे इलाके शामिल हैं।
स्थानीय स्तर पर जमीन, जंगल, खेती और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। कई बार गांवों के लोग भी आमने-सामने आ जाते हैं, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो जाती है।
पहले भी हो चुकी हैं हिंसक घटनाएं
असम और मेघालय के बीच सीमा विवाद पहले भी हिंसक रूप ले चुका है। दोनों राज्यों के सीमावर्ती इलाकों में झड़पें होती रही हैं। कई बार प्रशासन को सुरक्षा बल तैनात करने पड़े हैं।
सीमा विवाद का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ता है। स्थानीय निवासियों को आवाजाही, व्यापार और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है।
2022 में सुलझाने की हुई थी कोशिश
दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद को खत्म करने के लिए बातचीत भी होती रही है। वर्ष 2022 में असम और मेघालय सरकारों ने विवादित क्षेत्रों में से कुछ हिस्सों को लेकर समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए थे।
दोनों राज्यों ने आपसी बातचीत के जरिए सीमा विवाद कम करने की कोशिश की थी, लेकिन सभी मुद्दों का पूरी तरह समाधान नहीं हो पाया है। यही वजह है कि छोटे विवाद भी कई बार बड़े तनाव में बदल जाते हैं।
आम लोगों पर असर
सीमा तनाव के कारण सबसे ज्यादा परेशानी आम लोगों को उठानी पड़ती है। सड़क मार्ग प्रभावित होने से यात्रियों, व्यापारियों और जरूरी सामान की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
जोराबाट-बरनिहाट जैसे महत्वपूर्ण रास्तों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। प्रशासन की कोशिश रहती है कि जरूरी सेवाओं और आम नागरिकों की आवाजाही बाधित न हो।
सरकारों ने संभाला मोर्चा
स्थिति बिगड़ने के बाद दोनों राज्यों के प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की।
प्रशासन का कहना है कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और कानून के जरिए ही निकाला जा सकता है। हिंसा या तोड़फोड़ से समस्या और गंभीर हो जाती है।
आगे क्या?
असम और मेघालय के बीच सीमा विवाद का स्थायी समाधान आसान नहीं है, क्योंकि इसमें जमीन, इतिहास और स्थानीय भावनाएं जुड़ी हुई हैं। हालांकि, दोनों राज्यों के बीच बातचीत जारी रहने से समाधान की उम्मीद बनी रहती है।
फिलहाल ताजा तनाव शिलांग की घटना और उसके बाद हुई जवाबी कार्रवाई से जुड़ा है। प्रशासन हालात सामान्य करने में जुटा है, लेकिन यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि पूर्वोत्तर राज्यों के बीच सीमा विवाद आज भी एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।
असम-मेघालय सीमा का विवाद केवल जमीन का मामला नहीं है, बल्कि इससे जुड़े लोगों की सुरक्षा, पहचान और अधिकार भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए स्थायी समाधान के लिए संवाद और आपसी सहयोग सबसे जरूरी रास्ता माना जा रहा है।
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