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गुवाहाटी। रायजोर दल के विधायक अखिल गोगोई ने असम के लोगों की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य के लोग गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह असम के इतिहास में अपनी तरह की पहली घटना है और परिस्थितियों ने आम लोगों की आर्थिक तथा सामाजिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया है।
गोगोई ने कहा, “पूरे असम के लोग जिस तरह की स्थिति से गुजर रहे हैं, वह बेहद गंभीर है। लोगों की कमर टूट चुकी है।” उन्होंने जुलाई 2019 की आपदा का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस समय आई आपदा ने भी असम के लोगों को बड़े स्तर पर प्रभावित किया था।
अखिल गोगोई के बयान में जुलाई 2019 का संदर्भ महत्वपूर्ण है। उस समय असम में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अत्यधिक बारिश, बाढ़, भूस्खलन और नदी कटाव से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था। असम सरकार के 29 जुलाई 2019 के आधिकारिक आदेश में 18 जिलों को पूरी तरह और बाकी जिलों को आंशिक रूप से आपदा प्रभावित घोषित किया गया था।
जुलाई 2019 की बाढ़ के दौरान लाखों लोग प्रभावित हुए थे। 23 जुलाई 2019 तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 19 जिलों में 28 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित थे और 2,500 से ज्यादा गांव पानी की चपेट में थे। गोगोई ने अपने बयान में कहा कि उस आपदा ने लोगों की आर्थिक स्थिति और सामान्य जीवन को गहरा नुकसान पहुंचाया था। उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों को भी आम जनता के लिए चुनौतीपूर्ण बताते हुए सरकार से लोगों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया।
हालांकि, गोगोई द्वारा मौजूदा स्थिति को “असम के इतिहास की पहली घटना” और लोगों की “कमर टूटने” के रूप में पेश करना उनका राजनीतिक आकलन है। उनके दिए बयान के उपलब्ध अंश में यह स्पष्ट नहीं है कि वह किस हालिया घटना को असम के इतिहास में पहली घटना बता रहे हैं। इसलिए इस दावे के संदर्भ को लेकर अतिरिक्त विवरण की आवश्यकता है। असम में बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाएं लंबे समय से बड़ी चुनौती रही हैं। राज्य का जल संसाधन विभाग भी वर्ष 2019 सहित अलग-अलग वर्षों के दैनिक बाढ़ बुलेटिन का रिकॉर्ड रखता है।
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