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असम में ISRO की एडवांस्ड रडार रिसर्च फैसिलिटी की नींव रखी गई

Ratna Netam
21 Sept 2026 7:56 PM IST
असम में ISRO की एडवांस्ड रडार रिसर्च फैसिलिटी की नींव रखी गई
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गुवाहाटी। असम के वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्र के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले के चंद्रपुर में **ISTRAC एडवांस्ड रडार रिसर्च फैसिलिटी (IARRF)** का भूमि पूजन किया और इसकी आधारशिला रखी।यह अत्याधुनिक सुविधा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के **ISRO टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (ISTRAC)** के तहत स्थापित की जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य भारत की अंतरिक्ष निगरानी और सुरक्षा क्षमताओं को और मजबूत करना है।
‘प्रोजेक्ट NETRA’ के तहत विकसित होगी सुविधा
ISTRAC एडवांस्ड रडार रिसर्च फैसिलिटी को ISRO के महत्वाकांक्षी **‘प्रोजेक्ट NETRA’** के तहत विकसित किया जा रहा है।प्रोजेक्ट NETRA का उद्देश्य भारत की **स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस (SSA)** क्षमता को बढ़ाना है। इसके जरिए अंतरिक्ष में मौजूद विभिन्न वस्तुओं, जैसे सैटेलाइट, अंतरिक्ष मलबे (Space Debris) और अन्य ऑब्जेक्ट्स की निगरानी और ट्रैकिंग को मजबूत किया जाएगा।
अंतरिक्ष में बढ़ती चुनौतियों से निपटने में मदद
आज के समय में अंतरिक्ष गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। दुनियाभर के देश बड़ी संख्या में उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेज रहे हैं। इसके साथ ही अंतरिक्ष मलबे की समस्या भी एक बड़ी चुनौती बन रही है।ऐसे में किसी भी देश के लिए अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं की सही जानकारी और उनकी गतिविधियों पर नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है।IARRF जैसी अत्याधुनिक रडार सुविधा भारत को अंतरिक्ष में होने वाली गतिविधियों की बेहतर निगरानी करने में मदद करेगी।
असम के लिए तकनीकी विकास का बड़ा अवसर
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस परियोजना की आधारशिला रखते हुए इसे असम के वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।चंद्रपुर में इस तरह की अत्याधुनिक सुविधा स्थापित होने से राज्य की पहचान वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी गतिविधियों के केंद्र के रूप में भी मजबूत हो सकती है।
ISTRAC की अहम भूमिका
ISRO का ISTRAC भारत के अंतरिक्ष अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह उपग्रहों की निगरानी, ट्रैकिंग और कमांड से जुड़े कार्यों को संभालता है।ISTRAC नेटवर्क देश के अंतरिक्ष मिशनों की सफलता में अहम योगदान देता है। नई एडवांस्ड रडार रिसर्च फैसिलिटी इस नेटवर्क को और मजबूत करने में मदद करेगी।
स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस क्षमता होगी बेहतर
स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस का मतलब अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं की स्थिति, गति और संभावित खतरे की जानकारी रखना है।इस क्षमता के मजबूत होने से भारत अपने अंतरिक्ष परिसंपत्तियों की बेहतर सुरक्षा कर सकेगा। साथ ही भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की योजना बनाने में भी सहायता मिलेगी।
वैज्ञानिक अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना से अंतरिक्ष विज्ञान, रडार तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा होने की उम्मीद है।विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी सुविधाएं वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को नई तकनीकों पर काम करने का अवसर प्रदान करती हैं और देश की तकनीकी क्षमता को आगे बढ़ाती हैं।
पूर्वोत्तर भारत में बढ़ेगा महत्व
असम में इस तरह की बड़ी वैज्ञानिक परियोजना की स्थापना पूर्वोत्तर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।इससे क्षेत्र में विज्ञान और तकनीक से जुड़े विकास को बढ़ावा मिल सकता है और युवाओं को वैज्ञानिक क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा मिल सकती है।
भारत की अंतरिक्ष सुरक्षा की दिशा में कदम
भारत लगातार अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने पर काम कर रहा है। उपग्रह संचार, मौसम पूर्वानुमान, रक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष तकनीक की भूमिका बढ़ती जा रही है।IARRF जैसी परियोजनाएं भारत की अंतरिक्ष निगरानी प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
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