
Assam असम: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को काज़ीरंगा नेशनल पार्क और कार्बी आंगलोंग क्षेत्र में ढोल (वाइल्ड डॉग) की फिर से मौजूदगी को राज्य के वन्यजीव संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उन्होंने इसे असम की संरक्षण नीतियों की सफलता का प्रमाण बताया।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि ढोल, जिसे एशियाई वाइल्ड डॉग के नाम से भी जाना जाता है, एक समय इस क्षेत्र के जंगलों में सामान्य रूप से पाया जाता था, लेकिन पिछले वर्षों में इसकी संख्या में लगातार गिरावट देखी गई थी और यह प्रजाति लगभग गायब हो गई थी।
उन्होंने कहा कि हाल ही में इस प्रजाति की फिर से उपस्थिति सामने आना राज्य के लिए सकारात्मक संकेत है और यह दिखाता है कि वन्यजीव संरक्षण के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री सरमा ने इस वापसी का श्रेय राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे लगातार संरक्षण उपायों को दिया। उन्होंने बताया कि सरकार ने जंगल क्षेत्र के विस्तार, वन्यजीव कॉरिडोर को मजबूत करने और अवैध कब्जों को हटाने जैसे कई कदम उठाए हैं, जिससे प्राकृतिक आवासों की स्थिति में सुधार हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि इन प्रयासों के चलते विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार हुआ है, जिससे जैव विविधता को बढ़ावा मिला है। काज़ीरंगा-कार्बी आंगलोंग क्षेत्र पहले से ही अपनी समृद्ध वन्यजीव संपदा के लिए जाना जाता है, और ढोल की वापसी इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी के संतुलन को और मजबूत करती है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, ढोल एक महत्वपूर्ण शिकारी प्रजाति है, जो जंगल के पारिस्थितिक तंत्र में संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। इसकी मौजूदगी जंगल की सेहत का संकेत मानी जाती है।
स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी इस विकास का स्वागत किया है और इसे संरक्षण प्रयासों की सफलता का उदाहरण बताया है। उनका कहना है कि यदि इसी तरह के प्रयास जारी रहे तो भविष्य में और भी दुर्लभ प्रजातियों की वापसी संभव है।
कुल मिलाकर, काज़ीरंगा और कार्बी आंगलोंग क्षेत्र में ढोल की पुनः उपस्थिति असम के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय उपलब्धि मानी जा रही है, जो राज्य के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को नई दिशा और मजबूती देती है।





