
गुवाहाटी। असम में विनाशकारी बाढ़ का संकट लगातार बना हुआ है। राज्य के कई जिलों में बाढ़ के पानी ने भारी तबाही मचाई है। पिछले कई दिनों से जारी भारी बारिश और नदियों के उफान के कारण लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। इस मुश्किल घड़ी में राहत और बचाव अभियान के बीच एक ऐसा रेस्क्यू ऑपरेशन सामने आया है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
बाढ़ के बीच एक सोए हुए बच्चे को सुरक्षित बचाने की घटना ने मानवीय संवेदना और बचाव दलों की तत्परता की मिसाल पेश की है। जहां एक ओर लोग प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बचाव कर्मियों के साहस और समर्पण से कई जिंदगियां बचाई जा रही हैं।
A sleeping infant carried to safety in the #AssamFloods. A word for all rescue personnel braving the swell to save lakhs from submerged villages & towns. pic.twitter.com/2nCS5vU2fP
— Shiv Aroor (@ShivAroor) July 30, 2026
बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित
असम में पिछले करीब 10 दिनों से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। लगातार बारिश के कारण कई नदियां खतरे के निशान के आसपास बह रही हैं और बड़ी संख्या में गांव जलमग्न हो गए हैं।
प्रशासन के अनुसार, बाढ़ से राज्य के कई जिलों में तीन लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं, इस आपदा में 78 से ज्यादा लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है।
राहत और बचाव अभियान तेज
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने राहत कार्यों को तेज कर दिया है। प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सामग्री पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।
असम सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए जरूरी सामान से भरे 30 ट्रक भेजे गए हैं। इनमें खाद्य सामग्री, दवाएं और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं, ताकि प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता मिल सके।
इसके अलावा राष्ट्रीय और राज्य स्तर की विभिन्न बचाव एजेंसियों की टीमें लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटी हुई हैं।
सोए बच्चे का रेस्क्यू बना चर्चा का विषय
बाढ़ के बीच हुए एक रेस्क्यू ऑपरेशन ने लोगों को भावुक कर दिया। पानी से घिरे इलाके में एक बच्चा सो रहा था, जिसे बचाव दल ने बेहद सावधानी और तत्परता के साथ सुरक्षित बाहर निकाला।
बचावकर्मियों ने मुश्किल हालात के बावजूद बच्चे को नुकसान पहुंचाए बिना उसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। इस घटना ने दिखाया कि आपदा के समय बचाव दल किस तरह अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की मदद करते हैं।
इस रेस्क्यू की तस्वीरों और वीडियो ने लोगों के बीच उम्मीद और सकारात्मक संदेश पहुंचाया है।
गांवों और कस्बों में राहत पहुंचाने की कोशिश
बाढ़ प्रभावित इलाकों में कई गांवों का संपर्क टूट गया है। सड़कें पानी में डूब गई हैं और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। ऐसे में प्रशासन नावों और अन्य साधनों के जरिए लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है।
प्रभावित लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है। इन शिविरों में भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं और रहने की व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी ध्यान
बाढ़ के बाद संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
लोगों को जरूरी दवाएं उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य जांच के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राहत कार्यों में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए।
चुनौतीपूर्ण हालात में जुटे बचावकर्मी
बाढ़ के दौरान बचाव अभियान चलाना आसान नहीं होता। तेज बहाव वाले पानी, खराब मौसम और दुर्गम इलाकों के बावजूद बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता लोगों की जान बचाना और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों के बीच तालमेल बनाकर काम किया जा रहा है।
उम्मीद और साहस की कहानी
असम की बाढ़ ने जहां बड़ी तबाही मचाई है, वहीं सोए हुए बच्चे के रेस्क्यू जैसी घटनाएं यह संदेश देती हैं कि मुश्किल परिस्थितियों में भी इंसानियत और साहस कायम रहता है।
प्रशासन और बचाव एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में राहत और पुनर्वास कार्यों को और तेज करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि बाढ़ प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द सामान्य जीवन में लौटने में मदद मिल सके।





