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Assam असम: ऊपरी असम के तिनसुकिया जिला के डूमडूमा क्षेत्र में स्थानीय मोरान समुदाय की सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से “रति बिहू उद्यापन-2026” का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 27 अप्रैल को डूमडूमा टाउन फील्ड में आयोजित होगा, जिसकी तैयारी ऑल मोरान स्टूडेंट्स यूनियन (AMSU) की डूमडूमा यूनिट द्वारा की जा रही है।
आयोजन का मुख्य उद्देश्य तेजी से बदलते सामाजिक और सांस्कृतिक माहौल के बीच मोरान समुदाय की पारंपरिक पहचान को बनाए रखना और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। आयोजकों के अनुसार, आधुनिक जीवनशैली और शहरीकरण के प्रभाव के कारण कई स्थानीय रीति-रिवाज धीरे-धीरे कमजोर पड़ते जा रहे हैं। ऐसे में इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम समुदाय को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं।
“रति बिहू” असम की पारंपरिक बिहू उत्सव श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जिसमें लोकगीत, नृत्य और पारंपरिक वेशभूषा के माध्यम से सांस्कृतिक अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। इस आयोजन में भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है, जिसमें स्थानीय कलाकार और युवा भाग लेंगे।
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक बिहू नृत्य, लोक संगीत प्रस्तुतियां और सांस्कृतिक प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही पारंपरिक खान-पान और वेशभूषा को भी प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न पहलुओं की झलक मिल सके। आयोजकों का कहना है कि इस आयोजन के जरिए न केवल मनोरंजन का अवसर मिलेगा, बल्कि सांस्कृतिक शिक्षा का भी माध्यम तैयार होगा।
ऑल मोरान स्टूडेंट्स यूनियन के प्रतिनिधियों ने बताया कि समुदाय के बुजुर्गों और जानकारों को भी कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है, ताकि वे नई पीढ़ी को पारंपरिक ज्ञान और अनुभव साझा कर सकें। उनका मानना है कि मौखिक परंपराएं और सांस्कृतिक जानकारी तभी जीवित रह सकती हैं, जब उन्हें पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया जाए।
इस आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों में भी उत्साह देखा जा रहा है। डूमडूमा और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। आयोजकों ने यह भी बताया कि कार्यक्रम में सभी वर्गों के लोगों को आमंत्रित किया गया है, जिससे सांस्कृतिक एकता और सामाजिक जुड़ाव को बढ़ावा मिल सके।
समिति के सदस्यों के अनुसार, इस तरह के कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि बदलते दौर में भी पारंपरिक पहचान बनी रहे। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत केवल उत्सवों तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह लोगों के जीवन और सोच का हिस्सा होती है, जिसे संरक्षित करना जरूरी है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए स्थानीय प्रशासन और विभिन्न सामाजिक संगठनों का भी सहयोग लिया जा रहा है। आयोजन स्थल पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं, ताकि आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
“रति बिहू उद्यापन-2026” को एक ऐसे मंच के रूप में देखा जा रहा है, जहां परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का अवसर देगा, बल्कि समाज में अपनी पहचान और विरासत को लेकर जागरूकता भी बढ़ाएगा।
कुल मिलाकर, डूमडूमा में होने वाला यह कार्यक्रम मोरान समुदाय की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और उसे आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में सामने आ रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिल सके।
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