असम

बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ असम में आंदोलन, सड़कों पर उतरे छात्र

Ratna Netam
7 Nov 2026 5:59 PM IST
बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ असम में आंदोलन, सड़कों पर उतरे छात्र
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गुवाहाटी। असम में बिजली दरों में बढ़ोतरी के फैसले को लेकर विरोध तेज हो गया है। शनिवार, 7 नवंबर को ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) ने राज्यभर में प्रदर्शन कर सरकार के फैसले का विरोध किया। छात्र संगठन ने बिजली की बढ़ी हुई दरों को वापस लेने की मांग उठाई। राज्य के अलग-अलग जिलों में संगठन की स्थानीय इकाइयों और क्षेत्रीय छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी की गई और कई स्थानों पर विभाग के पुतले भी जलाए गए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बिजली जैसी बुनियादी जरूरत के लिए आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है।
बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्र
राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन के तहत असम के कई इलाकों में छात्र संगठनों के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग और राज्य सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया। उनका कहना था कि आम उपभोक्ता पहले से ही महंगाई के कारण परेशान हैं। ऐसे समय में बिजली की दरों में बढ़ोतरी से घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।मोरीगांव में AASU की मोरीगांव सदर इकाई ने प्रदर्शन किया। यहां कार्यकर्ताओं ने बिजली विभाग का पुतला जलाकर बढ़ी हुई दरों के फैसले को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान असम सरकार और बिजली विभाग के खिलाफ नारे लगाए गए। छात्र संगठन ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार को जल्द फैसला लेना चाहिए।
शिवसागर में प्रदर्शन के दौरान बढ़ा तनाव
शिवसागर में विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। यहां प्रदर्शनकारी बिजली विभाग के कार्यालय तक पहुंच गए। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय के प्रवेश द्वार को तोड़कर परिसर में प्रवेश किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई और कार्यालय का कांच का दरवाजा क्षतिग्रस्त हो गया।घटना के दौरान एक पुलिसकर्मी के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। सुरक्षा बलों ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। इस घटना ने बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन को और चर्चा में ला दिया है।
चंद्रपुर और बक्सा में भी प्रदर्शन
राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी बिजली दरों के विरोध में प्रदर्शन किए गए। चंद्रपुर में क्षेत्रीय छात्र संगठन ने हाईस्कूल तीनाली के पास विरोध कार्यक्रम आयोजित किया। यहां बिजली विभाग का पुतला जलाकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को नजरअंदाज कर रही है।इसी तरह बक्सा जिले के सालबारी इलाके में आनंदबाजार में गति क्षेत्रीय छात्र संघ ने अखिल बक्सा जिला छात्र संघ के सहयोग से प्रदर्शन किया। यहां भी बिजली दरों में बढ़ोतरी का विरोध किया गया। प्रदर्शनकारियों ने बिजली की कीमतों के साथ जरूरी वस्तुओं की बढ़ती महंगाई पर भी चिंता जताई।खरीजाबिजनी के लबदंगुरी में माथांगुरी क्षेत्रीय छात्र संघ की पहल पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किया गया। इन प्रदर्शनों में छात्र संगठनों ने सरकार से बिजली की बढ़ी हुई दरों को तत्काल कम करने की मांग की।
सरकार ने क्यों बढ़ाई बिजली की दरें?
दरअसल, असम में नवंबर 2026 से बिजली उपभोक्ताओं को बढ़ा हुआ शुल्क देना पड़ रहा है। असम विद्युत नियामक आयोग (AERC) ने बिजली वितरण कंपनी असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (APDCL) के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके तहत अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच जमा हुए फ्यूल एंड पावर परचेज प्राइस एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPPAS) की वसूली की जानी है।इस अवधि के दौरान बिजली खरीद और संबंधित लागत में उतार-चढ़ाव के कारण लगभग 155.59 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बकाया जमा हुआ था। कंपनी ने इस राशि की वसूली नवंबर 2026 से मार्च 2027 तक चरणबद्ध तरीके से करने का प्रस्ताव दिया था। आयोग की मंजूरी के बाद उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क वसूलने की व्यवस्था लागू की गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया अस्थायी फैसला
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 3 नवंबर को बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर कहा था कि यह स्थायी फैसला नहीं है। उन्होंने बताया था कि पश्चिम एशिया में जारी संकट और वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण बिजली खरीदने की लागत बढ़ी है। इसी वजह से उपभोक्ताओं पर सीमित अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है।मुख्यमंत्री के अनुसार, बिजली दरों में यह बढ़ोतरी अस्थायी होगी और परिस्थितियां सामान्य होने तथा अतिरिक्त लागत की भरपाई के बाद इसे वापस लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि बढ़ोतरी पांच पैसे प्रति यूनिट से अधिक नहीं होगी, जबकि अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणियों के लिए स्वीकृत अतिरिक्त शुल्क अलग-अलग है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
AASU के राज्यव्यापी विरोध का मुख्य उद्देश्य सरकार और बिजली विभाग पर बढ़े हुए शुल्क को वापस लेने के लिए दबाव बनाना है। संगठन की स्थानीय इकाइयों ने अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जाहिर की। छात्र संगठनों का मानना है कि बिजली की दरों में बढ़ोतरी का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव छोटे कारोबारियों और सामान्य परिवारों के खर्च पर भी पड़ सकता है।प्रदर्शनकारियों ने सरकार से सवाल किया कि आम जनता को राहत देने के बजाय उस पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ क्यों डाला जा रहा है। उनका कहना है कि बिजली जैसी जरूरी सेवा को आम लोगों की पहुंच में बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।फिलहाल बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ असम में विरोध प्रदर्शन जारी है। सरकार की ओर से इसे अस्थायी आर्थिक समायोजन बताया गया है, लेकिन छात्र संगठनों की मांग है कि उपभोक्ताओं को तत्काल राहत दी जाए और बढ़ी हुई दरों का फैसला वापस लिया जाए। आने वाले दिनों में सरकार इस आंदोलन को किस तरह संभालती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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