असम

Kakopathar में रति बिहू की तैयारी, मोरन समुदाय बढ़ा रहा है सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा

Harrison
23 April 2026 7:04 PM IST
Kakopathar में रति बिहू की तैयारी, मोरन समुदाय बढ़ा रहा है सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा
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Kakopathar काकोपाथर: असम के काकोपाथर क्षेत्र में 25 अप्रैल को रति बिहू के आयोजन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से मोरन समुदाय अपनी पारंपरिक संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण और सांस्कृतिक पर्यटन को भी विकसित करने की दिशा में प्रयास कर रहा है।
रति बिहू असम की पारंपरिक सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जिसमें लोकगीत, नृत्य और पारंपरिक रीति-रिवाजों की झलक देखने को मिलती है। काकोपाथर में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम स्थानीय संस्कृति को संरक्षित रखने और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने का एक प्रयास है।
मोरन समुदाय इस आयोजन के जरिए क्षेत्रीय पहचान को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रहा है। ग्रामीण इलाकों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन से न केवल परंपराओं को जीवित रखा जाता है, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिलता है।
आयोजन समिति के अनुसार, रति बिहू के कार्यक्रम में पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल होंगी। स्थानीय कलाकार इस अवसर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। इसके अलावा, ग्रामीण जीवन और परंपराओं को दर्शाने वाले कई कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य काकोपाथर क्षेत्र को सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है। मोरन समुदाय का मानना है कि यदि स्थानीय संस्कृति को सही मंच मिले तो यह पर्यटन के नए अवसर पैदा कर सकता है।
रति बिहू के आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह देखा जा रहा है। युवा वर्ग भी इस कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है, जिससे पारंपरिक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिल रही है।
आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर तैयारियां की जा रही हैं। इसमें मंच निर्माण, कलाकारों का चयन और दर्शकों के लिए सुविधाओं की व्यवस्था शामिल है।
इस सांस्कृतिक आयोजन से यह उम्मीद की जा रही है कि काकोपाथर क्षेत्र में आने वाले समय में सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय समुदाय को आर्थिक रूप से भी लाभ होगा।
मोरन समुदाय द्वारा उठाया गया यह कदम क्षेत्रीय संस्कृति के संरक्षण और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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