
गुवाहाटी। भारत के महान गायक, संगीतकार और भारत रत्न से सम्मानित डॉ. भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित समारोहों का भव्य समापन 29 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में होगा। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल होंगे और प्रसिद्ध पार्श्व गायिका उषा मंगेशकर को पहला ‘भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका राष्ट्रीय पुरस्कार’ प्रदान करेंगे। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री ने समारोह में शामिल होने के लिए अपनी सहमति दे दी है। यह आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री सरमा के अनुसार, डॉ. भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी को यादगार बनाने के लिए असम सरकार ने वर्षभर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य महान कलाकार की संगीत विरासत, सामाजिक योगदान और सांस्कृतिक दृष्टिकोण को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। अब जन्म शताब्दी समारोह के समापन को राष्ट्रीय स्तर पर भव्य स्वरूप देने की तैयारी की जा रही है।
समापन समारोह में राष्ट्रीय और राज्य स्तर के कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। कार्यक्रम में असम की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के साथ भारतीय संगीत की विविधता को प्रदर्शित करने की योजना है। भूपेन हजारिका के लोकप्रिय गीतों और उनके रचनात्मक योगदान को भी इस अवसर पर विशेष रूप से याद किया जाएगा।
असम सरकार ने डॉ. भूपेन हजारिका की स्मृति में राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार स्थापित किया है। इस सम्मान के लिए पहली बार वरिष्ठ गायिका उषा मंगेशकर का चयन किया गया है। उन्हें भारतीय संगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान और भूपेन हजारिका की संगीत रचनाओं से उनके जुड़ाव के लिए सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार के अंतर्गत 10 लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान प्रत्येक तीन वर्ष में दिए जाने का प्रावधान है।
उषा मंगेशकर भारतीय संगीत जगत का प्रतिष्ठित नाम हैं। वह महान पार्श्व गायिका लता मंगेशकर की छोटी बहन हैं। उन्होंने अपने लंबे संगीत करियर में हिंदी के साथ कई क्षेत्रीय भाषाओं में गीत गाए हैं। अपनी मधुर आवाज और गायकी की विशिष्ट शैली के कारण उन्होंने संगीतप्रेमियों के बीच अलग पहचान बनाई है।
उषा मंगेशकर का डॉ. भूपेन हजारिका के साथ भी संगीत संबंध रहा है। दोनों कलाकारों ने भारतीय संगीत की विविध परंपराओं को अपनी रचनाओं और प्रस्तुतियों के माध्यम से समृद्ध किया। इसी जुड़ाव को ध्यान में रखते हुए असम सरकार ने उन्हें इस पुरस्कार का पहला प्राप्तकर्ता बनाने का निर्णय लिया है।
उषा मंगेशकर ने भी सम्मान के लिए चुने जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को पत्र लिखकर आभार जताया और भूपेन हजारिका के साथ अपने संगीत संबंधों को याद किया। उन्होंने 29 नवंबर को नई दिल्ली पहुंचकर पुरस्कार ग्रहण करने की पुष्टि की है।
डॉ. भूपेन हजारिका का जन्म 8 सितंबर 1926 को असम में हुआ था। वह केवल गायक और संगीतकार ही नहीं, बल्कि गीतकार, फिल्मकार और सामाजिक चेतना से जुड़े सांस्कृतिक व्यक्तित्व भी थे। उनके गीतों में मानवीय संवेदनाएं, सामाजिक समानता, भाईचारा और राष्ट्रीय एकता जैसे विषय प्रमुखता से दिखाई देते हैं।
भूपेन हजारिका ने असमिया संगीत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति, लोकजीवन और सामाजिक भावनाओं को व्यापक श्रोतावर्ग तक पहुंचाया। उनकी रचनाएं आज भी संगीतप्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं।
उनका प्रसिद्ध गीत ‘बिस्तीर्ण पारोरे’ मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक चेतना की अभिव्यक्ति माना जाता है। इसी तरह ‘मानुष मानुषेर जोन्यो’ जैसे गीतों ने इंसानियत और भाईचारे का संदेश दिया। हिंदी में उनका लोकप्रिय गीत ‘दिल हूम हूम करे’ भी संगीतप्रेमियों के दिलों में विशेष स्थान रखता है।
भूपेन हजारिका को भारतीय संगीत और कला जगत में उनके असाधारण योगदान के लिए अनेक सम्मान मिले। उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार और पद्म सम्मानों से भी सम्मानित किया गया। वर्ष 2019 में उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया।
उनकी जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में असम सरकार ने वर्षभर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया। इनमें सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, श्रद्धांजलि समारोह और उनकी संगीत विरासत को समर्पित गतिविधियां शामिल हैं। सरकार का प्रयास रहा है कि उनके योगदान को केवल असम तक सीमित रखने के बजाय पूरे देश के सामने प्रस्तुत किया जाए।
इससे पहले सितंबर में आयोजित जन्म शताब्दी कार्यक्रमों के दौरान भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूपेन हजारिका को श्रद्धांजलि दी थी। अब 29 नवंबर को आयोजित होने वाला समापन समारोह उनकी स्मृतियों को राष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर जीवंत करेगा।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा भी की है। असम सरकार इस आयोजन को यादगार बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर तैयारी कर रही है। भारत मंडपम में होने वाला यह समारोह असम की सांस्कृतिक पहचान को देश के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर होगा।
उषा मंगेशकर को पहला राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करने का निर्णय इसलिए भी विशेष माना जा रहा है, क्योंकि इसके माध्यम से दो प्रतिष्ठित संगीत परंपराओं के बीच पुराने संबंधों को सम्मान दिया जाएगा। यह पुरस्कार आने वाले वर्षों में संगीत और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान देने वाली हस्तियों को प्रोत्साहित करने का माध्यम बन सकता है।
29 नवंबर का कार्यक्रम केवल जन्म शताब्दी समारोह का समापन नहीं, बल्कि डॉ. भूपेन हजारिका की संगीत विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश भी होगा। प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति और उषा मंगेशकर को सम्मानित किए जाने से इस आयोजन का महत्व और बढ़ गया है। संगीतप्रेमियों के लिए यह अवसर देश की दो महान संगीत हस्तियों के योगदान को याद करने का विशेष क्षण होगा।





