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असम बाढ़ पर PIL खारिज: सुप्रीम COURT का सुनवाई से इनकार

Tara Tandi
6 Oct 2026 2:59 PM IST
असम बाढ़ पर PIL खारिज: सुप्रीम COURT का सुनवाई से इनकार
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गुवाहाटी: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को असम और ब्रह्मपुत्र घाटी में बार-बार आने वाली बाढ़, नदी के किनारे के कटाव और जल निकासी (ड्रेनेज) की समस्याओं से निपटने के लिए ज़्यादा मज़बूत और असरदार उपायों के निर्देश मांगने वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली बेंच ने वकील उज्ज्वल गौर की याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया, लेकिन कोर्ट रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि याचिका की एक कॉपी संबंधित अधिकारियों को भेजी जाए।
बेंच ने अधिकारियों से कहा कि वे याचिका में उठाए गए मुद्दों की जांच करें और उचित सुधारात्मक उपाय करें।
खुद पेश होते हुए, गौर ने तर्क दिया कि उनकी याचिका में बताई गई प्रशासनिक कमियां ऐसी थीं जिनकी न्यायिक जांच हो सकती थी और उन्होंने कोर्ट से अधिकारियों को नोटिस जारी करने का आग्रह किया।
हालांकि, CJI की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा बताए गए सुझाव और कमियां संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने लायक तो हैं, लेकिन यह मामला मूल रूप से "कानूनी प्रकृति का नहीं" है।
इस PIL में असम में बाढ़ नियंत्रण, नदी के किनारे के कटाव और जल निकासी प्रबंधन के लिए मौजूदा कानूनी तंत्रों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई थी। इसमें बार-बार आने वाली चुनौतियों की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ तंत्र बनाने का भी प्रस्ताव दिया गया था।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि बार-बार आने वाली बाढ़ से होने वाली व्यापक तबाही को पूरी तरह से अपरिहार्य नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब बाढ़ और कटाव से संबंधित चिंताओं से निपटने के लिए विशेष संस्थान और कानूनी ढांचे पहले से मौजूद हैं।
याचिका में ब्रह्मपुत्र बोर्ड एक्ट, 1980, असम तटबंध और जल निकासी एक्ट, 1953 और नदी बोर्ड एक्ट, 1956 का हवाला देते हुए कहा गया कि ये कानून वैज्ञानिक अध्ययन, एकीकृत नदी-बेसिन योजना और बाढ़, कटाव और जल निकासी की समस्याओं से निपटने के उपाय प्रदान करते हैं।
याचिकाकर्ता ने भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की लगातार रिपोर्टों का भी हवाला दिया, जिनमें याचिका के अनुसार, बाढ़-नियंत्रण योजना, कार्यान्वयन और रखरखाव, जल निकासी प्रबंधन, बाढ़-मैदान विनियमन और परियोजनाओं की निगरानी में कमियों को उजागर किया गया था। खास तौर पर CAG की 2018 की रिपोर्ट नंबर 5 में शामिल "असम में बाढ़ नियंत्रण" पर किए गए परफॉर्मेंस ऑडिट का ज़िक्र किया गया। याचिका में दावा किया गया कि ऑडिट में इंटीग्रेटेड बेसिन-लेवल प्लानिंग, फ्लडप्लेन ज़ोनिंग, हाइड्रोलॉजिकल और मॉर्फोलॉजिकल स्टडीज़, और बाढ़ नियंत्रण उपायों को लागू करने व उनकी निगरानी में कमियों की पहचान की गई थी।
याचिका में ड्रेनेज में रुकावट, बैकफ़्लो, स्लुइस गेट से अपर्याप्त ड्रेनेज, प्राकृतिक ड्रेनेज चैनलों पर कब्ज़े, तलछट जमा होने और नदी की बनावट में बदलाव जैसे मुद्दों पर सरकारी रिकॉर्ड का भी हवाला दिया गया। इसमें तर्क दिया गया कि ये कारक असम में बार-बार आने वाली बाढ़ के जोखिम को बढ़ा रहे हैं।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने PIL पर सुनवाई नहीं की, लेकिन याचिका को संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाने के निर्देश से उठाए गए मुद्दों पर संबंधित सरकारी एजेंसियों द्वारा विचार करने और सुधारात्मक कार्रवाई करने की गुंजाइश बनी हुई है।
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